बांकीपुर उपचुनाव: 10वीं के बाद सीधा ग्रेजुएशन! बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा के हलफनामे पर उठ रहे सवाल
13 जुलाई को नीरज कुमार ने पर्चा भरा और चुनाव आयोग के सामने चुनावी हलफनामा भी दाखिल किया। इस हलफनामे में नीरज ने अपनी शैक्षिणक योग्यता की जानकारी भी दीं, लेकिन सवाल तब खड़े हुए, जब हलफनामे में 10वीं के बाद सीधे ग्रेजुएशन की जानकारी दी गई।

बांकीपुर उपचुनाव बीजेपी के लिए नाक की लड़ाई है, क्योंकि यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है और पटना की हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है। हालांकि, इस उपचुनाव में पार्टी के लिए मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा उर्फ बंटी ने नामांकन भरने के एक दिन बाद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, तो पार्टी को 24 घंटे के भीतर कैंडिडेट बदलना पड़ा और अनन-फनन में नीरज कुमार सिन्हा के नाम का ऐलान किया गया। नीरज के नाम के साथ पार्टी ने उम्मीदवार का जो बायोडेटा जारी किया, तो उस पर भी सवाल उठने लगे। अब एक नया विवाद नीरज कुमार के चुनावी हलफनामे को लेकर खड़ा होता दिख रहा है।
दरअसल 13 जुलाई को नीरज कुमार ने पर्चा भरा और चुनाव आयोग के सामने चुनावी हलफनामा भी दाखिल किया। इस हलफनामे में नीरज ने अपनी शैक्षिणक योग्यता की जानकारी भी दीं, लेकिन सवाल तब खड़े हुए, जब हलफनामे में 10वीं के बाद सीधे ग्रेजुएशन की जानकारी दी गई। मतलब बीजेपी उम्मीदवार ने हलफनामे में यह नहीं बताया कि उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई कब और कहां से की।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या उन्होंने 10वीं (मैट्रिक) पास करने के बाद सीधे ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री हासिल कर ली?
नीरज सिन्हा के हलफनामे में क्या लिखा है?
चुनावी हलफनामे के अनुसार, नीरज कुमार सिन्हा की उम्र 32 साल है। उन्होंने अपनी शिक्षा का जो विवरण दिया है, वो इस प्रकार है:
- हाई स्कूल (मैट्रिक): उन्होंने साल 2012 में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) से गोना से मैट्रिक पास किया।
- ग्रेजुएशन (स्नातक): उन्होंने मगध महाविद्यालय, सकुराबाद, जहानाबाद से साल 2024 में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है।
सवाल क्यों उठ रहे हैं?
राजनीतिक गलियारों में लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि हलफनामे में 12वीं (इंटरमीडिएट) की पढ़ाई या डिग्री का तो कोई जिक्र ही नहीं है। 2012 में 10वीं करने के बाद सीधे 2024 में ग्रेजुएशन की डिग्री दिखाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिना इंटरमीडिएट किए कोई स्नातक कैसे हो सकता है?
लाइव हिन्दुस्तान ने जब नीरज सिन्हा से इस पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो नीरज सिन्हा की ओर से कोई जवाब नहीं आया। पिछले 24 घंटे में उन्हें कॉल भी गईं और मैसेज के जरिए भी संपर्क किया गया, लेकिन उनकी तरफ से मैसेज का भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
साथ ही जब बीजेपी प्रवक्ता से भी इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने ऐसी कोई भी जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया।
जब नीरज के बायोडेटा को लेकर भी उठे सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब पार्टी ने नीरज को टिकट देने का ऐलान किया और उनका बायोडेटा जारी किया, तब भी सवाल उठे थे। क्योंकि बायोडेटा के हिसाब से नीरज ने 12 साल की उम्र में बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता ली थी।
बायोडेटा में नीरज सिन्हा की जन्म तिथि 1 जुलाई 1994 बताई गई और नीचे दी गई उनकी राजनीतिक यात्रा में बताया गया कि उन्होंने साल 2006 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली थी। इस पर सवाल उठने लगे कि क्या नीरज ने महज 12 साल की उम्र में ही पार्टी ज्वाइन कर ली थी?
विवाद बढ़ता देख पार्टी ने एक नया बायोडेटा जारी किया और उसमें से 2006 में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेने वाली बात हटा दी गई। हालांकि, पार्टी ने यह नहीं बताया कि पहले बायोडेटा में ऐसी गड़बड़ी क्यों हुई और दूसरे बायोडेटा में इसे क्यों हटा दिया गया।
बांकीपुर का सियासी समीकरण
बांकीपुर उपचुनाव इस समय बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक बन चुकी है। इस सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प है।
भाजपा के गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में पार्टी ने पहले अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को टिकट दिया था, लेकिन उनके पीछे हटने के बाद नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा।
इस सीट पर उनका सीधा मुकाबला जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) से है, जो खुद इस उपचुनाव के जरिए अपनी चुनावी राजनीति का आगाज कर रहे हैं।
नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, संजय सरावगी और सांसद रविशंकर प्रसाद जैसे दिग्गज बीजेपी नेता नीरज सिन्हा के समर्थन में मौजूद रहे, जो उन्हें संगठन का एक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता बता रहे हैं।


