पटना का नाम पाटलिपुत्र किया जाए, राज्यसभा में बोले उपेद्र कुशवाहा- जेपी नड्डा के मन में भी गुदगुदी होती होगी
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कभी बिहार का इतिहास ही भारत का इतिहास होता था। इतिहास के स्वर्णिम काल में भारत की राजधानी बिहार में हुआ करता था और उसका नाम पाटलिपु था। पटना का नाम फिर से पाटलिपुत्र कर दिया जाए।
Patna to be renamed Patliputra: बिहार की राजधानी पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र है। शहर के एक इलाके को पाटलिपुत्र कॉलनी के नाम से जाना जाता है। राजधानी को पुराना नाम दिए जाने की मांग उठ रही है। राज्यभा में सांसद सह राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने यह मांग रखी। अपने वक्तव्य में उन्होंने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा के पटना से पुराने रिश्ते की याद दिलाई।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कभी बिहार का इतिहास ही भारत का इतिहास हुआ करता था। हमारे इतिहास के स्वर्णिम काल में भारत की राजधानी तब बिहार में हुआ करता था और उसका नाम पाटलिपु्त्र था। आज जिसे पटना कहते हैं वहीं से बर्मा से लेकर अफगानिस्तान तक शासन चलाने का काम होता था। हमारा गौरवशाली इतिहास है। आज देश में कई शहरों के नाम बदल रहे हैं। ऐसे में हमारी अपेक्षा है कि पटना का नाम भी पाटलिपुत्र कर दिया जाए। इससे बिहार के लोगों को प्रसन्नता होगी क्योंकि, यहां के लोग भी चाहते हैं कि पटना को इसके प्राचीन नाम से जाना जाए। सदन इस प्रस्ताव पर गंभीरता के साथ विचार करे।
जेपी नड्डा को गुदगुदी क्यों
कुशवाहा ने कहा कि इससे हमारे बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी को भी खुशी होगी क्योंकि उनका पटना से काफी गहरा नाता रहा है। जब बिहार के गौरव की चर्चा हो रही है तो इनके मन में भी गुदगुदी होती होगी। उन्होंने पटना में काफी वक्त गुजारा है। कुशवाहा ने कहा कि इस काम के लिए यह बहुत उचित समय है क्योंकि केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकारें हैं। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो इसे कार्यान्वित करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसलिए अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने के लिए पटना का नाम फिर से पाटलिपुत्र कर दिया जाए। केंद्र की सरकार से आग्रह है कि इस दिशा में सार्थक पहल करे।
गुरुवार को संसद के मानसून सत्र का अंतिम दिन था। सदन की कार्रवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया। इस बार संसद के दोनों सदनों में मानसून सत्र हंगामेदार रहा। अयोध्या में चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष ने काफी हंगामा किया। लोकसभा की कार्रवाही शुरू होने के साथ स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। तमाम हंगामे और शोर-शराबे के बीच वंदे मातरम विधेयक को पास कराने में एनडीए सरकार कामयाब रही।


