पटना मेट्रो को सस्ती दर पर नहीं मिलेगी बिजली, विद्युत आयोग ने खारिज कर दी याचिका
सुबह छह से शाम पांच बजे तक मेट्रो के कुल परिचालन को 45 फीसदी हिस्सा होता है। इस अवधि में मेट्रो को खपत का 80 फीसदी ही विद्युत शुल्क देना होगा। इसके बाद तीन घंटे तक मेट्रो को सामान्य बिजली शुल्क यानी 100 फीसदी बिल देना होगा।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने पटना मेट्रो को सस्ती दर पर बिजली देने की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि वह एक दिन में औसतन 16 घंटे तक मेट्रो का परिचालन करेगा। साथ ही कम दूरी होने पर भी वह रेलवे से अधिक किराया की वसूली करेगा। इसलिए पूर्व में तय की गई बिजली दर ही मान्य होगी। पटना मेट्रो की दलील थी कि 24 घंटे मेट्रो का परिचालन नहीं होगा। इसलिए रेलवे की तरह ही पटना मेट्रो को बिजली दिया जाना अनुचित है।

लेकिन आयोग ने मेट्रो की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि रिव्यू पीटिशन का अर्थ टंकण भूल या तथ्यात्मक गलती होती है। आयोग ने जब बिजली दर तय कर दी है तो वही लागू होगा। गौरतलब है कि रेलवे की तर्ज पर ही पटना मेट्रो के लिए बिजली शुल्क तय किया गया है। मेट्रो को 540 रुपए प्रति केवीए फिक्सड चार्ज, जबकि 8.16 रुपये प्रति यूनिट विद्युत शुल्क तय किया गया है।
मेट्रो पर भी टीओडी (टाईम ऑफ डे) लागू होगा। सुबह छह से शाम पांच बजे तक मेट्रो के कुल परिचालन को 45 फीसदी हिस्सा होता है। इस अवधि में मेट्रो को खपत का 80 फीसदी ही विद्युत शुल्क देना होगा। इसके बाद तीन घंटे तक मेट्रो को सामान्य बिजली शुल्क यानी 100 फीसदी बिल देना होगा। वहीं केवल सात घंटे ही मेट्रो का परिचालन पीक आवर में होगा।
इस दौरान मेट्रो को 120 फीसदी यानी सामान्य से 20 फीसदी अधिक विद्युत शुल्क देना होगा। हर एलिवेटेड स्टेशन पर शुरुआत में 200 किलोवाट बिजली खपत होने का अनुमान है, जो बाद के वर्षों में 300 किलोवाट तक बढ़ सकता है। वहीं भूमिगत स्टेशनों पर बिजली खपत 1500 किलोवाट होगी जो बाद के वर्षों में 2000 किलोवाट तक बढ़ सकती है।



