कोरोना से मौत पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुंगेर के एक केस में अधिकारियों को दिया यह आदेश

हिन्दुस्तान, पटना, विधि संवाददाता
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न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

Patna High Court
कोरोना से मौत पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है।

कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील

कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है।

यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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