पत्नी को आपत्तिजनक स्थिति में देखने से व्यभिचार साबित नहीं होता, पटना HC में पति की याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक स्थिति में होना और यौन संबंध बनाना दो अलग बातें हैं। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कथित घटना के बाद पति ने न तो पुलिस में कोई शिकायत की, न सनहा दर्ज कराया और न ही अपने ससुराल पक्ष अथवा अन्य रिश्तेदारों को इस संबंध में सामने लाया।

पटना हाईकोर्ट ने एक पति की अपील खारिज की, जिसमें उसने व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर शादी खत्म करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को सिर्फ आपत्तिजनक स्थिति में देखने से साबित नहीं होता कि उसने दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाए। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने मधुबनी के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज का फैसला बरकरार रखा। अपीलकर्ता ने दो जुलाई, 2006 को प्रतिवादी से शादी की थी। बाद में 2010 में जोड़े का एक बेटा हुआ। पति के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद उसकी पत्नी ने अपने जीजा के साथ नाजायज संबंध बनाए। दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देखा।
वहीं, पत्नी ने कहा-आरोप मनगढ़ंत और बनावटी है। उसने तर्क दिया कि ऐसा आरोप लगाना ही अपने आप में क्रूरता है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति ने उसे जहर देकर मारने की कोशिश की थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोप लगा देने से नहीं होता, उसके लिए कोर्ट में सबूत पेश करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक स्थिति में होना और यौन संबंध बनाना दो अलग बातें हैं। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कथित घटना के बाद पति ने न तो पुलिस में कोई शिकायत की, न सनहा दर्ज कराया और न ही अपने ससुराल पक्ष अथवा अन्य रिश्तेदारों को इस संबंध में सामने लाया।


