
रीतलाल यादव को पटना हाईकोर्ट से झटका; चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगे; दानापुर से RJD प्रत्याशी हैं
दानापुर से आरजेडी प्रत्याशी और बाहुबली रीतलाल यादव को पटना हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए जेल से बाहर आने के मामले में किसी तरह की राहत देने से साफ इंकार कर दिया। अब जेल में रहकर ही वे चुनाव लड़ेंगे।
Bihar Elections 2025: पटना हाईकोर्ट ने दानापुर विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी रीतलाल यादव को चुनाव प्रचार के लिए जेल से बाहर आने के मामले में किसी तरह का राहत देने से साफ इंकार कर दिया। शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई की।हालांकि कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए एमपी एमएलए कोर्ट से औपबंधिक जमानत की गुहार लगाने की पूरी छूट दी है। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिये जेल से छोड़ने के लिए दायर अर्जी को खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि रीतलाल यादव की ओर से चुनाव को लेकर औपबंधिक जमानत देने की गुहार हाई कोर्ट से लगाई गई थी। इसके पूर्व एमपी एमएलए कोर्ट से दानापुर विधानसभा से राजद उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने की गुहार लगाई थी। एमपी एमएलए कोर्ट ने पुलिस संरक्षण में रीतलाल यादव को नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए भागलपुर जेल से दानापुर लाने का निर्देश जेल प्रशासन को दिया था।
पुलिस संरक्षण में रीतलाल ने किया नामांकन किया था
जिसके बाद उन्हें नामांकन करने के लिए भागलपुर जेल से दानापुर लाया गया। नॉमिनेशन के बाद उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया। पुलिस संरक्षण में रहते हुए दानापुर से राजद प्रत्याशी के रुप में नामांकन दाखिल किया हैं। जेल में बंद दानापुर विधानसभा क्षेत्र के राजद विधायक और प्रत्याशी रीतलाल यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार प्रसार करने के लिए चार सप्ताह का औपबंधिक जमानत देने की गुहार हाई कोर्ट से लगाई थी।
दानापुर से आरजेडी प्रत्याशी हैं रीतलाल यादव
विधायक की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि विशेष परिस्थिति होने के कारण यह अर्जी दायर की गई हैं। उनका कहना था कि आवेदक को दानापुर विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी बनाया गया है। और आगामी 6 नवम्बर को मतदान होना हैं।चुनाव प्रचार के लिए उन्हें सिर्फ चार सप्ताह के लिए औपबंधिक जमानत पर छोड़ने की मांग कोर्ट से की। वही राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही का कहना था कि अर्जी सुनवाई के योग्य नहीं है। आवेदक को सक्षम न्यायालय से जमानत लेना चाहिए।





