आर्म्स ऐक्ट में सजायाफ्ता पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को फौरी राहत, पटना हाईकोर्ट से 8 सप्ताह की जमानत मिली
पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय जेल में बंद पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को इलाज के लिए 8 सप्ताह के लिए जमानत दी है।

पटना उच्च न्यायालय ने बेगूसराय के चेरियाबरियारपुर थाना कांड संख्या-143/2018 से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री और अपीलकर्ता मंजू वर्मा को चिकित्सा कारणों के आधार पर आठ सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। न्यायमूर्ति शैलेन्द्र सिंह की अदालत ने यह आदेश 28 अगस्त 2026 को दिया। सुनवाई के दौरान सीबीआई के स्थायी वकील ने अपीलकर्ता के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत की प्रार्थना का विरोध नहीं किया। जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, अपीलकर्ता अधिक उम्र की हैं तथा उन्हें हृदय और रीढ़ की हड्डी की जांच सहित विशेष चिकित्सा की आवश्यकता है। मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा आर्म्स ऐक्ट के मामले में बेगूसराय मंडल कारा में सात साल की सजा काट रहे हैं।
इन शर्तों पर मिली राहत
अदालत ने 20,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदारों को निचली अदालत (विशेष न्यायाधीश, बेगूसराय) के समक्ष संतुष्ट करने की शर्त पर यह राहत दी है। विदित हो कि विशेष न्यायालय के द्वारा सजा सुनाने के बाद से पूर्व मंत्री मंजू वर्मा एवं उनके पति चंद्रशेखर वर्मा जेल में है। एमपी-एमएलए विशेष अदालत बेगूसराय ने आर्म्स एक्ट के मामले में 01 अगस्त 2026 को पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट के मामले में सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया था। इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट की एक अन्य धारा में पति-पत्नी को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। दोनों सजाएं साथ-साथ चल रही हैं। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने सजा की बिंदु पर सुनवाई के बाद उपलब्ध साक्ष्य और गवाही के आधार पर यह फैसला दिया था।
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरपुर के चर्चित बालिका गृह कांड में मंजू वर्मा पर बड़े आरोप लगे थे। समाज कल्याण मंत्री रहते मंजू वर्मा से बालिका गृह कांड के मास्टर माइंड ब्रजेश ठाकुर के साथ मिली भगत बात सामने आई थी। संलिप्तता के आरोप में बालिका गृह कांड की जांच कर रही सीबीआइ ने साल 2018 में तत्कालीन मंत्री मंजू वर्मा के चेरियाबरियारपुर क्षेत्र के खांजहापुर गांव स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान मंत्री के बंद कमरे से थ्री-नाट-थ्री राइफल सहित अन्य हथियार एवं कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद सीबीआइ की शिकायत पर चेरियाबरियारपुर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसके बाद मंजू वर्मा की कुर्सी चली गई थी। नीतीश कुमार सरकार के मंत्री पद से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।


