लालू की विरासत पर पप्पू यादव ने दावा ठोका; कर्पूरी और चरण सिंह का नाम लेकर समझाया

Ritesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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  • पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत पर दावा किया है। उन्होंने चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर का नाम लेकर उनके उत्तराधिकारियों का नाम भी गिनाया।

लालू की विरासत पर पप्पू यादव ने दावा ठोका; कर्पूरी और चरण सिंह का नाम लेकर समझाया

पूर्णिया के बहुचर्चित निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत पर दावा ठोक दिया है। पप्पू यादव ने कहा है कि लालू यादव की संपत्ति और दूसरी चीजों का उत्तराधिकारी जो हो, लेकिन उनकी वैचारिक विरासत के उत्तराधिकारी वो हैं। राजद में लालू यादव के उत्तराधिकारी माने जा रहे तेजस्वी यादव को पप्पू ने नेता मानने से मना कर दिया और कहा कि वो एक औसत आदमी हैं और उनके छोटे भाई हैं। वो तेजस्वी को नेता नहीं मानते हैं।

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक यू-ट्यूब पॉडकास्ट में कहा- “जब हमें पार्टी से निकाला गया, तब मैंने कहा था कि लालू यादव की संपत्ति और किसी चीज का कोई उत्तराधिकारी हो, वैचारिक और सामाजिक न्याय का उत्तराधिकारी पप्पू होगा। कर्पूरी ठाकुर के राजनीतिक उत्तराधिकारी लालू बने, उनके बेटे नहीं। चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी मुलायम सिंह यादव हुए, चौधरी अजित सिंह नहीं।"

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बता दें कि दिग्गज समाजवादी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के दो बेटे हैं। बड़े बेटे रामनाथ ठाकुर मौजूदा सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेता हैं और इस समय केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री हैं। उनके छोटे बेटे वीरेंद्र ठाकुर पेशे से डॉक्टर हैं और अब राजनीति में आना चाहते हैं। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद वीरेंद्र ठाकुर की पत्नी कनकलता ने मीडिया से कहा था कि सरकारी सेवा में रहने के कारण उनके पति 25 साल पहले राजनीति में नहीं आए लेकिन अब वो तैयार हैं।

पप्पू यादव ने लालू यादव को अपना राजनीतिक गुरु मानने से भी इनकार कर दिया और कहा कि वो कर्पूरी ठाकुर के अनुयायी हैं। उन्होंने कहा कि जब वो 1990 में पहली बार निर्दलीय विधायक बने तो लालू यादव की पार्टी से नहीं बने थे। बल्कि लालू यादव को 11 निर्दलीय विधायक के साथ सपोर्ट देकर मुख्यमंत्री बनाए थे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी जब पहली बार सीएम बने तो पहला सपोर्ट पप्पू यादव ने किया था। उन्होंने कहा कि वो सात बार चुनाव जीते हैं और ज्यादातर चुनाव वो लालू यादव के खिलाफ ही जीते हैं।

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पप्पू यादव ने कहा कि लालू यादव उनके लिए पिता समान हैं और राजनीति में उन्होंने लालू यादव की कई बार मदद की है। उन्होंने कहा कि लालू यादव भले पप्पू यादव को गले ना लगाएं लेकिन पप्पू यादव हमेशा उनके संकट में उनके साथ खड़ा रहा है। तेजस्वी की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर पप्पू ने कहा कि सीएम जनता बनाती है। उन्होंने कहा- "लालू ने और पार्टी ने तेजस्वी को डिप्टी सीएम बना दिया तो मेरे भाई को बना दिया लेकिन तेजस्वी मेरे नेता कैसे हो जाएंगे। वो एक औसत आदमी हैं और लालू यादव के बेटे हैं। मैं उनको भाई मानता हूं, नेता मानता ही नहीं हूं।"

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उन्होंने कहा कि मेरा पटना जाने का रास्ता अलग है, उनका रास्ता अलग है। उन्होंने कहा कि लालू यादव के कारण तेजस्वी यादव अपनी जाति के बड़े नेता हो सकते हैं, रामविलास पासवान का बेटा होने से चिराग पासवान अपनी जाति के बड़े नेता हो सकते हैं लेकिन सभी जाति और धर्म की बात होगी तो वो बिहार के सबसे बड़े बेटे हूैं, सबसे बड़े सेवक हैं। पप्पू खुद को नेता नहीं मानते।

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लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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