नीतीश को शराब पर ओवैसी का साथ मिला; समीक्षा का दबाव बना रहे हैं मांझी और माधव

Feb 19, 2026 11:51 am ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
share Share
Follow Us on

बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए के ही नेताओं द्वारा शराबबंदी की समीक्षा की उठ रही मांग के बीच ओवैसी की पार्टी ने कह दिया है कि वो शराब बैन के समर्थन में है।

नीतीश को शराब पर ओवैसी का साथ मिला; समीक्षा का दबाव बना रहे हैं मांझी और माधव

बिहार में राज्यसभा चुनावों के ऐलान से पहले शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठाकर जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियां एनडीए सरकार चला रहे नीतीश कुमार पर दबाव बना रही थी। राज्यसभा चुनावों के ऐलान के बाद शराबबंदी पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इस मसले पर नीतीश के साथ रहने का ऐलान कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान ने कहा है कि एआईएमआईएम शराबबंदी की पक्षधर है। हालांकि अख्तरुल ईमान ने यह आरोप लगाया है कि प्रशासनिक पदाधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत से यह शराब बैन पूरी तरह फेल है। घर-घर में शराब की होम डिलीवर की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पर सरकार को ऐक्शन लेना चाहिए।

बुधवार को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के विधायक दल के नेता माधव आनंद ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा था कि शराबबंदी कानून की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए। माधव आनंद ने यह भी कहा था कि उन्हें पूरा भरोसा है कि नीतीश कुमार इसकी समीक्षा करेंगे और आवश्यक निर्णय लेंगे।

बुधवार को ही गयाजी में केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के नेता जीतनराम मांझी ने शराब बैन की समीक्षा की मांग दोहराई थी। मांझी पहले भी शराबबंदी के खिलाफ बोलते रहे हैं। मांझी ने बुधवार को कहा था कि शराबबंदी से बिहार को आर्थिक नुकसान हो रहा है, इसलिए समीक्षा होनी चाहिए। मांझी ने भी शराब की होम डिलीवरी का जिक्र किया था और कहा था कि शराब तस्करों को पैसा लेकर छोड़ दिया जाता है। मांझी का कहना था कि बड़े लोग बच जाते हैं और गरीब लोग फंस जाते हैं।

कुशवाहा और मांझी की पार्टी की तरफ से शराब बैन को लेकर नीतीश पर बनाए जा रहे दबाव के बीच कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने सरकार की चुटकी ले ली थी। अभिषेक रंजन ने कहा था कि राज्य सरकार के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की जांच होगी, तो शराबबंदी कानून की पोल खुल जाएगी। उन्होंने कहा था कि होम डिलीवरी से शराब हर जगह पहुंच रही है। डिमांड करने पर विधानसभा में भी शराब पहुंच जाएगी।

नीतीश के करीबी संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने शराबबंदी का बचाव करते हुए कहा था कि किसी का यह कहना कि सदन के सदस्य शराब पीते हैं, बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि नीतीश के नेतृत्व में शराबबंदी की नीति अपनाई गई और सदन के सभी दलों ने एक स्वर से समर्थन किया था। ऐसे में बिहार में शराब पीने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है।

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने शराबबंदी को लेकर एनडीए और भाजपा के मजे लिए और कहा कि अगर यह इतना ही अच्छा है तो इसे पूरे देश में लागू कर देना चाहिए। पीके ने कहा कि पूरे देश में ना भी हो तो कम से कम भाजपा अपनी सरकार वाले राज्यों में इसे लागू कर दे। याद दिला दें कि प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनने पर शराबबंदी खत्म करने का वादा किया था।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें