बिहार में प्राइवेट स्कूल खोलने की राह आसान, जमीन और NOC नियमों में ढील; ऐसे मिलेगा फायदा

Jayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार सरकार राज्य में निजी स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए भूमि और एनओसी (NOC) की शर्तों में ढील देने जा रही है। इसके लिए उद्योग विभाग को नोडल बनाया गया है। अब 1 एकड़ जमीन की अनिवार्यता और हर 3 साल में रिन्यूअल जैसी जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा, जिससे राज्य में…

बिहार में प्राइवेट स्कूल खोलने की राह आसान, जमीन और NOC नियमों में ढील; ऐसे मिलेगा फायदा

Patna News: बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने वालों और निजी स्कूल चलाने के इच्छुक लोगों के लिए नीतीश सरकार ने बड़ी राहत का रास्ता साफ कर दिया है। राज्य में 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए अब प्राइवेट स्कूल खोलने की शर्तों में बड़ी छूट दी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्राइवेट सेक्टर को प्रोत्साहित करना है ताकि राज्य के बच्चों को अधिक से अधिक शैक्षणिक विकल्प मिल सकें।

उद्योग विभाग बना नोडल, नियमावली में होगा बदलाव

इस नई पहल को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने उद्योग विभाग को नोडल विभाग बनाया है। शिक्षा विभाग ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है और माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक को इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार प्राइवेट स्कूल खोलने संबंधी मौजूदा नियमावली में जरूरी संशोधन करने जा रही है, जिससे स्कूल प्रबंधन को भूमि और अन्य संसाधनों के इंतजाम में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सके।

भूमि और NOC की कड़ाई होगी कम

वर्तमान में बिहार में सीबीएसई (CBSE) या आईसीएसई (ICSE) बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करने के लिए शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य है। इसकी शर्तें काफी कड़ी हैं:

CBSE स्कूल: कम से कम एक एकड़ भूमि की अनिवार्यता है।

ICSE स्कूल: कम से कम 50 डिसमिल भूमि होना जरूरी है।

रिन्यूअल: हर तीन साल में NOC को रिन्यूअल कराने की बाध्यता भी एक बड़ी चुनौती है।

माना जा रहा है कि नई नीति के तहत भूमि की इन शर्तों में रियायत दी जा सकती है। साथ ही, NOC रिन्यूअल की प्रक्रिया को भी सरल या इसकी समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है, जिससे स्कूल संचालकों को बार-बार विभाग के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का मानना है कि प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देने से राज्य में अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण स्कूल खुल सकेंगे। इससे न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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