होली में 10 टन जहर परोसने की तैयारी; नकली खोवा, पनीर, घी के साथ जली मोबिल से बने तेल बाजार में
पूर्णिया इलाके से बस में बुक कर नकली सेंथेटिक खोवा, पनीर और घी की खेप मुजफ्फरपुर भेजी जा रही है। हर दिन सुबह-सुबह बैरिया बस स्टैंड में पूर्णिया से आने वाली बसों पर इसकी खेप उतर रही है।

रंगों के त्योहार होली के अवसर पर इस साल 10 टन से अधिक नकली व सिंथेटिक खोवा, पनीर और घी खपाने की तैयारी है। केमिकल, एसेंस, अरारोट, मैदा और पाम ऑयल से बना यह खोवा व पनीर पूर्णिया इलाके से लाया जा रहा है। इसके अलावा मिलावटी मसाला और बेसन तक बाजार में आ गए हैं। मिलावटी बेसन से बने लड्डू और पशु की चर्बी में एसेंस मिलाकर नकली घी बनाकर बाजार में उतारा जा रहा है। घी में वनस्पति घी, रिफाइंड आयल, नारियल व तिल तेल, पिघला हुआ बटर या उबले आलू-शकरकंद की पिसाई कर उसमें एसेंस मिलाकर घी बनाया जा रहा है।
पूर्णिया इलाके से बस में बुक कर नकली सेंथेटिक खोवा, पनीर और घी की खेप मुजफ्फरपुर भेजी जा रही है। हर दिन सुबह-सुबह बैरिया बस स्टैंड में पूर्णिया से आने वाली बसों पर इसकी खेप उतर रही है। यहां किसी टीम की तैनाती नहीं होने से नकली खोवा-पनीर पकड़ी नहीं जा रही है।
अधिकारी हलकान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी ने बताया कि बीते साल होली के समय जिला प्रशासन से तीन टीम गठित की गई थी। इस बार अब तक कोई टीम नहीं बनी है। खुद सुदामा चौधरी के पास छापेमारी के लिए पर्याप्त मानव बल नहीं है, इसलिए वह छापेमारी को नहीं निकल पा रहे हैं।
होली में महज 10 दिन अब तक नहीं बनी टीम
होली में महज 10 दिन शेष रह गए हैं। अब तक नकली खाद्य पदार्थों की जांच को टीम नहीं बनी है। पिछले साल डीएम ने आठ मजिस्ट्रेट की चार टीम बनाई थी। टीम ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक कई जगहों पर जांच व छापेमारी की थी। पिछले साल नकली खोवा-पनीर की जांच रिपोर्ट आई थी, जिसपर अब केस करने की तैयारी चल रही है।
मोबिल से बनाया जा रहा नकली सरसों तेल
दो माह पहले अहियापुर के पटियासा में नकली सरसों तेल की बड़ी फैक्ट्री पकड़ी गई थी। इसमें जले हुए मोबिल को साफ कर उसमें एसेंस मिलाकर सरसों तेल तैयार किया जा रहा था। इस बार होली में बड़े पैमाने पर नकली सरसों तेल उतारा जा रहा है। अहियापुर की तरह कई फैक्ट्रियां होने की आशंका है, जहां बना नकली सरसों तेल मार्केट में पहुंच रहा है।
मोबाइल लैब में चालक न टेक्नीशियन
नकली खाद्य पदार्थों की जांच से खाद्य संरक्षा विभाग से मुजफ्फरपुर के लिए मोबाइल लैब मिली है। लेकिन, डेढ़ साल से यह मोबाइल लैब शोभा की वस्तु बनी है। मोबाइल लैब चलाने को चालक नहीं है। इसमें लैब टेक्नीशियन भी तैनात नहीं है। मलेरिया विभाग के एक कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति मोबाइल लैब पर की गई है, जो हर दिन हाजिरी बनाकर निकल जाता है।
एक अधिकारी को छह जिलों का चार्ज
मुजफ्फरपुर जिले के खाद्य संरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी को छह जिलों का चार्ज है। उनके पास महज दो अन्य कर्मचारी में एक डेटा ऑपरेटर है। उन्होंने बताया कि अकेले दम पर छह जिलों में जितना संभव होता है जांच व कार्रवाई करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की टीम बनती है तब कोई अभियान चलाया जाता है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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