
डिटेक्टिव, खुफिया और इंटेलिजेंस शब्द ना लगाएं, निजी सुरक्षा एजेंसियों को गृह विभाग का आदेश
विभाग के मुताबिक निजी सुरक्षा एजेंसियों को पीएसएआरए (प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट) के तहत सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिलता है। उनके नाम में डिटेक्टिव, सर्विलांस आदि शब्द लग जाने से आम जन में भ्रम पैदा होता है
गृह विभाग ने निजी सुरक्षा एजेंसियों को नाम के साथ डिटेक्टिव, खुफिया, इंटेलिजेंस जैसे शब्द लगाने पर रोक लगा दी है। जिन निजी सुरक्षा एजेंसियों के नाम में डिटेक्टिव, इन्वेस्टिगेशन, सर्विलांस, इंटेलिजेंस, फैसिलिटी या सप्लायर जैसे शब्द लगे होंगे, उनको लाइसेंस नहीं मिलेगा।
साथ ही पूर्व लाइसेंसधारियों के लाइसेंस का नवीकरण नहीं किया जाएगा। सुरक्षा के नाम पर लाइसेंस लेने वाली एजेंसियों की ओर से नाम का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत पर गृह विभाग ने इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी किया है।
डिटेक्टिव एजेंसी बता कर आम जन को भ्रमित न करें
विभाग के मुताबिक निजी सुरक्षा एजेंसियों को पीएसएआरए (प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट) के तहत सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिलता है। उनके नाम में डिटेक्टिव, सर्विलांस आदि शब्द लग जाने से आम जन में भ्रम पैदा होता है। सरकार की चिंता है कि सिक्योरिटी गार्ड का लाइसेंस रखने वाली एजेंसी खुद को सरकारी जांच या खुफिया एजेंसी दिखा कर स्टिंग, निगरानी आदि के नाम पर लोगों की प्राइवेसी और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन न करे।
केंद्रीय कानून के तहत खुफिया एजेंसी का संचालन करने के लिए अलग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। राजस्थान, महाराष्ट्र सहित दूसरे कई राज्यों में भी राज्य सरकार ने इन शब्दों के उपयोग पर रोक लगा रखी है।
बिहार में निजी सुरक्षा को नई नियमावली लागू
बिहार में निजी सुरक्षा प्रबंधन को लेकर 2025 में ही नयी नियमावली लागू की गयी है। गृह विभाग की इस नियमावली में सुरक्षा का कारोबार करने वाली सभी एजेंसियों के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। निजी गार्ड मुहैया कराने वाली एजेंसियों को इनका पालन करना अनिवार्य है। अनुपालन नहीं करने वाली एजेंसियों पर विभाग के स्तर पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।





