कोई दूसरा नीतीश नहीं हो सकता, सीएम के इस्तीफे पर रोने लगे अशोक चौधरी; पुराने किस्से सुनाए
नीतीश को मानस पिता और राजनैतिक गुरु मानने वाले मंत्री(ग्रामीण कार्य विभाग) अशोक चौधरी उनके इस्तीफे के बाद फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ बिताए पलों और उनके कार्यों को याद करते हुए कई किस्से भी सुनाए।

Ashok Choudhary breaks down on Nitish Resignation: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उनका राज्यसभा जाना तय हो गया। नीतीश को मानस पिता और राजनैतिक गुरु मानने वाले मंत्री(ग्रामीण कार्य विभाग) अशोक चौधरी उनके इस्तीफे के बाद फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ बिताए पलों और कार्यों को याद करते हुए कई किस्से भी सुनाए।
अशोक चौधरी ने मीडिया कर्मियों से भरे मन और रूंधे गले से बात की। कहा कि नीतीश कुमार के जैसा कोई दूसरा नेता देश में नहीं हो सकता। उन्होंने एक पिता, अभिभावक और गुरु की भांति स्नेह और सम्मान दिया। उन्होंने विकट परिस्थियों में ट्रेनिंग दी और संरक्षण भी प्रदान किया। उनके साथ 12 सालों से हाउस में रहा। जब कांग्रेस में थे तब भी नीतीश कुमार सम्मान देते थे। कोरोना काल में और भी करीब आए।
अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के काम करने का तरीका अलग है। वे विरोधियों को सम्मान करते हैं और उनकी सुविधाओं का भी खयाल रखते हैं और सहायता करते हैं। सदन में एक अभिभावक की भांति डांटना, पुचकारना और मंत्री जब जवाब में फंस जाए तो उनको बेल आउट करना, ये सभी गुण नीतीश कुमार में हैं। वे नॉर्मल आदमी नहीं थे। उनका विभागों पर कंट्रोल रहता था।
शिक्षा मंत्री के रूप मे उन्होंने एक वाकया याद दिलाया। कहा कि मैट्रिक की परीक्षा में दीवार पर चढ़कर चोरी करने की तस्वीर अखबार में छपी थी। उसी समय अमेरिका की एक पत्रिका की ओर उनको सम्मान दिया गया था। लेकिन चोरी वाली तस्वीर से बिहार की भद पिट गई थी। नीतीश कुमार ने बुलाकर कहा कि जैसे भी हो चोरी बंद करवाइए। इसी से पता चलता है कि वे बिहार की छवि के लिए हमेशा जागरुक रहते थे। इस बार मैट्रिक की परीक्षा में लड़कियों का झंडा बुलंद हुआ, इसमें नीतीश कुमार की बड़ी भूमिका है।आने वाले दिनों में लोग उन्हें विद्याचंद सागर, मदन मोहन मालवीय की तरह समाज सुधारक के रूप में याद करेंगे।
आज अच्छा नहीं लग रहा है। नीतीश जी हाउस में नहीं रहेंगे तो काफी अखरेगा। लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उनका इस्तीफा देना जरूरी था। जिसे आप गुरु मानते हैं उनका सानिध्य मिलता रहे यह बहुत बड़ी बात है। आगे भी वे अभिभावक के रूप में उनका मार्गदर्शन जदयू और बिहार को मिलता रहेगा। नीतीश कुमार ऐसे शख्स का नाम है जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बता दें कि नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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