CO, DCLR, AC की लापरवाही या उदासीनता नहीं चलेगी; कोर्ट में केस डिस्पोजल की समय सीमा जान लें
राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल की ओर से सभी समाहर्ताओं को पत्र भेजा गया है।
बिहार में राजस्व न्यायालयों में वादों का निपटारा समय से किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल की ओर से सभी समाहर्ताओं को पत्र भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आरसीएमएस/बिहारभूमि पोर्टल पर दायर मामलों की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय मिल सके। राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने वादों के निपटारे में तेजी लाने पर बल दिया था।
प्रधान सचिव ने अपने निर्देश में कहा है कि राजस्व न्यायालयों में वादों की सुनवाई एवं आदेश पारित करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को सुने बिना दंडित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक को अपना पक्ष रखने, साक्ष्यों का प्रतिवाद करने और निर्णय से पूर्व अपनी सफाई प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। यह सिद्धांत न्यायिक प्रक्रिया को पक्षपात से मुक्त रखने की आधारशिला है। दरअसल, विभागीय समीक्षा में पाया गया है कि अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता तथा अपर समाहर्ता के न्यायालयों में कई राजस्व वाद निर्धारित समय-सीमा के बावजूद लंबित हैं। पत्र में कहा गया है कि विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत इन वादों के निष्पादन की समय-सीमा पूर्व से निर्धारित है, फिर भी अनावश्यक विलंब हो रहा है। इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
वादों के निष्पादन के लिए तय समय-सीमा
पत्र के अनुसार अंचल अधिकारी न्यायालय में भूमि दाखिल-खारिज (बिना आपत्ति) का निबटारा 35 दिन तो आपत्ति होने पर 75 दिन में निबटारा करना होगा। लोक भूमि अतिक्रमण वाद का निबटारा 90 दिन, भू-मापी वाद 7 से 11 दिन में निबटारा करना होगा। वहीं भूमि सुधार उप समाहर्ता न्यायालय में दाखिल-खारिज अपील की सुनवाई 30 दिनों में करनी होगी। भूमि विवाद निराकरण का निबटारा 90 दिन, लगान निर्धारण 90 दिन, बकास्त रैयतीकरण 90 दिन तो दान-पत्र सम्पुष्टि 90 दिन, 48(ई) बटाईदारी वाद 90 दिन में निबटारा करना होगा। अपर समाहर्ता न्यायालय में जमाबंदी रद्दीकरण 30 दिन, बंदोबस्ती अपील 90 दिन, लगान निर्धारण अपील 90 दिन, भू-हदबंदी अधिनियम, 1961 से संबंधित वाद 90 दिन, बिहार भू-दान यज्ञ अधिनियम, 1954 से संबंधित वाद 90 दिन, दाखिल-खारिज रिवीजन अपील 30 दिन में निबटारा करना होगा।
प्रधान सचिव ने सभी समाहर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने न्यायालयों के साथ-साथ अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की सतत समीक्षा करें और समय-सीमा का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही, मामलों के निष्पादन की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आरसीएमएस/बिहारभूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों का निर्धारित समय-सीमा में निष्पादन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। अनावश्यक विलंब, लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीन महीने के भीतर लंबित वादों के निपटारे का निर्देश
प्रधान सचिव सीके अनिल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सभी वादों का निष्पादन तीन माह के भीतर करना अनिवार्य है। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर अधिकतम तीन माह के भीतर वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करें। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि भूमि विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। भूमि विवाद के मामलों का त्वरित गति से निष्पादन के उद्देश्य से लंबित की परिभाषा स्पष्ट की गई है। यह पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय कार्यक्रम के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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