अब HIV की पहचान के लिए खून की जांच जरूरी नहीं, दो छात्रों की नई तकनीक को मिला पेटेंट
छात्रों ने इस तकनीक को बिहार के सरकारी अस्पतालों में लागू करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग और बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से संपर्क किया है। उनका कहना है कि यदि इस तकनीक को अपनाया जाता है, तो एचआईवी जांच के लिए रक्त के नमूने एकत्र करने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

अब बिना रक्त जांच के भी एचआईवी की पहचान संभव होने का दावा किया गया है। आईआईटी पटना और एनआईईटी नोएडा के छात्र ने एक तकनीक विकसित की है, जिससे किसी व्यक्ति में एचआईवी संक्रमण जांच के लिए रक्त का नमूना लेने की जरूरत नहीं होगी। हथेली या कंधे के पीछे के हिस्से को स्कैन करके एचआईवी संक्रमण की स्क्रीनिंग की जा सकेगी। इस तकनीक को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से 25 अप्रैल, 2026 को पेटेंट भी प्रदान किया गया है। दोनों छात्रों ने एक विशेष थर्मल कैमरा विकसित किया है।
कैमरे की मदद से हथेली या कंधे के पीछे के हिस्से को स्कैन कर यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है या नहीं। आईआईटी पटना के कंप्यूटर साइंस (2024 बैच) के छात्र अंकित शंकर ने बताया कि इससे एचआईवी की पहचान आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। स्कैनिंग पूरी होने के तुरंत बाद परिणाम भी उपलब्ध हो जाएगा। वहीं, एनआईईटी नोएडा के कंप्यूटर साइंस (2024 बैच) के छात्र पार्थ शांडिल्य ने बताया कि स्कैनिंग के बाद एक स्कोर बोर्ड तैयार होता है, जिसके आधार पर एचआईवी संक्रमण की आशंका का आकलन किया जाता है।
वर्तमान में रक्त नमूने से होती है एचआईवी की जांच
वर्तमान में एचआईवी की जांच रक्त के नमूने के माध्यम से की जाती है। किसी व्यक्ति में संक्रमण की आशंका होने पर उसका रक्त नमूना लिया जाता है, जिसे जांच के लिए पीएमसीएच के बायोमाइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रयोगशाला में भेजा जाता है। जांच के बाद ही यह पता चलता है कि व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है या निगेटिव। पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 10 से 15 दिन का समय लग जाता है।
स्वास्थ्य विभाग और बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से किया संपर्क
छात्रों ने इस तकनीक को बिहार के सरकारी अस्पतालों में लागू करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग और बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से संपर्क किया है। उनका कहना है कि यदि इस तकनीक को अपनाया जाता है, तो एचआईवी जांच के लिए रक्त के नमूने एकत्र करने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो सकती है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक होगी।
7.86 लाख लोगों पर किया गया परीक्षण
पेटेंट मिलने के बाद छात्रों ने विभिन्न अस्पतालों के सहयोग से इस तकनीक का परीक्षण किया। अंकित शंकर ने बताया कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कई अस्पतालों में अबतक 7 लाख 86 हजार 330 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 1,800 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए, जबकि लगभग दो लाख लोग हाई-रिस्क श्रेणी में आए, यानी उनमें संक्रमण की आशंका पाई गई। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में तीन लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वहीं, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में अब तक 36 लोगों की जांच की गई, जिनमें 50 प्रतिशत लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई।


