
तेजस्वी के स्वागत में कोई विधायक नहीं आया, यह अच्छा लक्षण नहीं; शिवानंद तिवारी ने फिर घेरा
शिवानंद तिवारी ने कहा कि स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं से ज़्यादा बाइट लेने के लिए कैमरे वालों की भीड़ ही ज़्यादा थी। तेजस्वी अपनी पार्टी के राज्य कार्यालय में झांकने भी नहीं गए। हवाई अड्डे से सीधे अपने घर चले गए। यह सब कुछ अच्छा लक्षण नहीं है।
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJD) की करारी हार के बाद से राजद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री शिवानंद तिवाारी कई बार तेजस्वी यादव पर निशाना साधते आए हैं। अब एक बार फिर शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी यादव को घेरा है। रविवार को जारी बयान में शिवानंद ने कहा कि तेजस्वी के आगवानी में हवाई अड्डे पर राजद का कोई विधायक नज़र नहीं आया। स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं से ज़्यादा बाइट लेने के लिए कैमरे वालों की भीड़ ही ज़्यादा थी। तेजस्वी अपनी पार्टी के राज्य कार्यालय में झांकने भी नहीं गए। हवाई अड्डे से सीधे अपने घर चले गए। यह सब कुछ अच्छा लक्षण नहीं है।
यहां बता दें कि तेजस्वी यादव सपिरवार छुट्टी मनाकर रविवार को पटना लौटे। पटना में तेजस्वी यादव ने कहा कि हम शुरू से ही सकारात्मक राजनीति करते आए हैं। इसलिए सरकार गठन के 100 दिन तक नई सरकार की नीतियों, निर्णयों और कार्यक्रमों पर टिप्पणी नहीं करेंगे। मगर लोगों के साथ सरकार के कार्यों की विवेचना करते रहेंगे। बिहारवासियों को नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरा देश कह रहा है कि हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में लोक हारा और तंत्र जीता।
उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार में अपराध, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, पलायन, शिक्षा, चिकित्सा और विधि व्यवस्था का क्या हश्र है, यह किसी से छुपा नहीं है? कहा कि हम चाहते हैं कि डबल इंजन (एनडीए) सरकार अपने घोषणा पत्र पर अमल करे, जिसमें प्रदेश की ढाई करोड़ महिलाओं को दो-दो लाख रुपये देने का वादा किया गया था।
शिवानंद तिवारी ने पहले भी घेरा
इससे पहले विधानसभा सत्र के दौरान तेजस्वी यादव के विदेश यात्रा पर जाने को लेकर भी शिवानंद तिवारी ने तंज कसा था। शिवानंद तिवारी ने कहा था कि तेजस्वी यादव ने मैदान छोड़ दिया है। अगले पांच साल तक विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाने की क्षमता उनमें नहीं है।
शिवानंद तिवारी ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में यह भी कहा था कि जय और पराजय सहज और सामान्य नियम हैं। लेकिन अहम सवाल यह है कि हम अपने जय या पराजय को किस तरीके से लेते हैं। तेजस्वी यादव को बिहार लौटना चाहिए। उन्हें नेता की तरह नहीं बल्कि कार्यकर्ता की तरह सबसे मिलना चाहिए।





