Hindi NewsBihar NewsNitish Kumar relinquishes Home portfolio for the first time as BJP takes over NDA shifts power balance
पहली बार नीतीश ने छोड़ा अपना मजबूत किला, गृह विभाग लेकर भाजपा ने दिखाई ताकत; क्यों खास?

पहली बार नीतीश ने छोड़ा अपना मजबूत किला, गृह विभाग लेकर भाजपा ने दिखाई ताकत; क्यों खास?

संक्षेप:

यह बदलाव NDA में शक्ति संतुलन का स्पष्ट संकेत है। भाजपा को 14, JD(U) को 8 मंत्री मिले हैं। नीतीश ने खुद सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता विभाग रखे हैं, जो IAS अधिकारियों के तबादले आदि को नियंत्रित करते हैं।

Nov 22, 2025 06:49 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार में दो दशक बाद पहली बार गृह विभाग भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मंत्रालयों का बंटवारा करते हुए गृह विभाग अपने उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को सौंप दिया। इसके बदले जेडीयू को वित्त विभाग और वाणिज्य कर विभाग मिला है, जो पहले बीजेपी के पास थे।

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गृह विभाग जैसे अहम मंत्रालय का बीजेपी को दिया जाना एनडीए के भीतर बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। विधानसभा में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी अब राज्य की कानून-व्यवस्था नीति में प्रमुख भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल विभागीय आवंटन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है- यह बिहार की कानून-व्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता और भविष्य की सत्ता की दौड़ को प्रभावित करने वाला है।

सुशासन को और मजबूत करूंगा- सम्राट चौधरी

गृह विभाग संभालने को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा- मैं नीतीश कुमार द्वारा जमीन पर किए गए कामों को आगे बढ़ाने की कोशिश करूंगा। यह मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी है और मैं सुशासन को और मजबूत करने के लिए काम करूंगा। इस फैसले के बाद पहली बार ऐसा होगा कि बिहार में गृह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के हाथ में नहीं, बल्कि सहयोगी दल के नेता के पास रहेगा। हालांकि, नीतीश कुमार सामान्य प्रशासन, विजिलेंस, कैबिनेट सचिवालय, निर्वाचन सहित अपने पुराने अहम विभाग अपने पास ही रखेंगे।

गृह विभाग: 20 साल से नीतीश का मजबूत किला

नीतीश कुमार ने 2005 से बिहार की सत्ता संभाली है और उनके पिछले सभी कार्यकालों में गृह विभाग उनके पास ही रहा। यह विभाग राज्य पुलिस, खुफिया तंत्र और कानून-व्यवस्था का केंद्र है। गृह विभाग किसी भी मुख्यमंत्री के लिए 'क्राउन ज्वेल' की तरह होता है, क्योंकि इससे राज्य की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण सीधे जुड़ा होता है। अधिकांश राज्यों में मुख्यमंत्री खुद ही गृह विभाग रखते हैं, ताकि कोई भी सहयोगी पार्टी उनकी सत्ता को चुनौती न दे सके। पिछले दो दशकों में चाहे नीतीश का किससे गठबंधन रहा हो, उन्होंने गृह विभाग हमेशा अपने पास रखा।

यहां तक कि जब भले ही 2020 में JD(U) की सीटें घटकर 43 रह गईं तब भी नीतीश ने गृह विभाग नहीं छोड़ा था। जीतन राम मांझी के CM कार्यकाल में भी विभाग सीएम ऑफिस के नियंत्रण में था और नीतीश का प्रभाव बना रहा। महागठबंधन सरकार में भी साथियों की मांग के बावजूद उन्होंने यह विभाग नहीं छोड़ा। अब पहली बार यह विभाग बीजेपी के पास है, जो राज्य की राजनीति में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।

विभागों का बड़ा फेरबदल: कौन, क्या संभालेगा?

सबसे जरूरी वित्त विभाग JD(U) के सीनियर नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव को दिया गया है, जिन्हें कमर्शियल टैक्स का विभाग भी दिया गया है। ये दोनों पिछले टर्म में सम्राट चौधरी के पास थे। बिजेंद्र यादव अपने पिछले डिपार्टमेंट एनर्जी, और प्लानिंग एंड डेवलपमेंट भी अपने पास रखेंगे, साथ ही ड्राई स्टेट के प्रोहिबिशन, एक्साइज और रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट का चार्ज भी अपने पार्टी साथी रत्नेश सदा से लेंगे, जिन्हें हटा दिया गया है।

JD(U) ने एजुकेशन (सुनील कुमार), रूरल डेवलपमेंट (श्रवण कुमार), सोशल वेलफेयर (मदन साहनी), फूड एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन (लेशी सिंह), रूरल वर्क्स (अशोक चौधरी) और माइनॉरिटी वेलफेयर (जमा खान) जैसे जरूरी डिपार्टमेंट में अपने मंत्रियों को फिर से रखा है। इसके अलावा, श्रवण कुमार को ट्रांसपोर्ट दिया गया है, जिसे अब हटा दी गईं JD(U मिनिस्टर शीला मंडल संभाल रही थीं, जबकि साइंस, टेक्नोलॉजी और टेक्निकल एजुकेशन पोर्टफोलियो एजुकेशन मिनिस्टर सुनील कुमार को दिया गया है, क्योंकि JD(U) के पूर्व मिनिस्टर सुमित कुमार सिंह चकाई में RJD से हार गए हैं।

जेडीयू की पूर्व सरकार के दो मंत्री- महेश्वर हजारी और जयंती राज को मंत्रिपरिषद से बाहर किया गया। उनके विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क और भवन निर्माण, अब विजय कुमार चौधरी संभालेंगे।

बीजेपी: पुरानी पकड़ पर नए मंत्रालय

  • स्वास्थ्य और विधि विभाग- मंगल पांडे के पास बरकरार
  • पथ निर्माण प्लस नगर विकास एवं आवास- नितिन नबीन को मिला
  • उद्योग विभाग- दिलीप जायसवाल (नए उद्योग मंत्री)
  • कृषि- रामकृपाल यादव
  • पर्यटन, कला एवं संस्कृति- अरुण शंकर प्रसाद
  • आईटी और खेल- शूटर और पूर्व ओलंपियन श्रेयसी सिंह

दो पूर्व मंत्री- नीरज बाबू और कृष्णानंदन पासवान को हटाया गया है। एलजेपी (राम विलास) और अन्य सहयोगियों को भी जगह मिली है।

  • संजय कुमार- लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण
  • संजय कुमार सिंह- गन्ना उद्योग
  • दीपक प्रकाश (आरएलएम)- पंचायती राज विभाग
  • हम (सेक्युलर)- सूक्ष्म जल संसाधन, संतोष कुमार सुमन

राजनीतिक मायने

गृह विभाग का बीजेपी को मिलना एनडीए में बीजेपी की बढ़ती शक्ति का स्पष्ट संकेत है। यह राज्य की कानून-व्यवस्था में बीजेपी की सीधी भूमिका को बढ़ाता है। नीतीश के पास प्रमुख प्रशासनिक विभाग रहते हुए भी अब गृह मंत्रालय बीजेपी के पास रहने से सत्ता संतुलन में बदलाव दिख रहा है। बिहार कैबिनेट में यह फेरबदल न केवल राजनीतिक साझेदारी की नई दिशा तय करता है, बल्कि आने वाले वर्षों की शासन शैली पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

भाजपा के लिए रणनीतिक जीत: कानून-व्यवस्था पर फोकस

गृह विभाग का महत्व बिहार के संदर्भ में और भी गहरा है। राज्य लंबे समय से 'जंगल राज' की छाया से जूझता रहा है, और नीतीश की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया। लेकिन उनके पिछले कार्यकाल के अंत में अपराधों में वृद्धि को लेकर सहयोगी चिराग पासवान तक ने आलोचना की। अब भाजपा के पास यह विभाग होने से पार्टी अपनी चुनावी प्रतिबद्धताओं को लागू करने का मौका पाएगी।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया था, खासकर मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में। भाजपा नेता मानते हैं कि सम्राट चौधरी अब 'घुसपैठियों को बाहर करने' में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, पुलिस सुधार, खुफिया तंत्र को मजबूत करना और अपराध दर घटाना जैसे मुद्दों पर भाजपा का केंद्रीय एजेंडा अब राज्य स्तर पर लागू होगा। यह विभागीय नियंत्रण भाजपा को नीतीश पर निर्भरता कम करने और अपनी छवि को 'कानून का राज' स्थापित करने वाला बनाने में मदद करेगा।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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