
तेजस्वी फेल हैं; RJD संभालने मीसा, रोहिणी आगे आएं; लालू की बेटियों को BJP के यादव नेता की सलाह
बिहार चुनाव में आरजेडी की हार के बाद लालू यादव परिवार में तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्या के झगड़ों के बीच बीजेपी नेता निखिल आनंद ने रोहिणी और मीसा भारती से आगे आकर राजद को संभालने की सलाह दी है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू यादव के परिवार में चुनाव में हार को लेकर तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्या का झगड़ा खुलकर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के यादव नेता निखिल आनंद ने रोहिणी और मीसा भारती को आगे आने और राजद संभालने की सलाह दी है। निखिल आनंद 2020 के चुनाव में मनेर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और राजद के विधायक भाई वीरेंद्र से हार गए थे। निखिल ने कहा है कि तेजस्वी पार्टी को चलाने में बुरी तरह फेल हो चुके हैं और परिवार को भी एकजुट नहीं रख पा रहे हैं। रोहिणी ने कल शाम कहा था कि राबड़ी आवास पर हार के कारण में संजय यादव का नाम लेने पर उन पर चप्पल चलाया गया और उन्हें गालियां भी दी गई। रोहिणी ने आज कहा कि मां, पिता और बहनें उनके साथ हैं जो सब कल झगड़े के दौरान उनके साथ रो रहे थे।
भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव निखिल ने ट्वीट करके कहा- ‘रोहिणी जी! मुझे सचमुच बहुत दुख हो रहा है। आप एक बहादुर बेटी हैं, जिन्होंने पिता को अपनी किडनी दान की है। बेहद दुखद है कि आप परिवार से नाता तोड़ रही हैं और राजनीति भी छोड़ रही हैं। राजद के संकट की घड़ी में आपको और मीसा भारती को लालू प्रसाद की असली राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने के लिए आगे आना चाहिए था। तेजस्वी यादव पार्टी का नेतृत्व करने और परिवार को एकजुट रखने में बुरी तरह विफल रहे हैं। राजनीति से परे, मैं आपकी सराहना करता हूं और हर कोई आपकी जैसी पिता के प्रति समर्पित बेटी का हकदार हो।’
निखिल ने एक और ट्वीट के जरिए मीसा भारती और बाकी बेटियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा- ‘रोहिणी आचार्य के साथ ये सारी घटना जब हो रही है तो लगता है कि लालू और राबड़ी मजबूर नजर आ रहे हैं। क्या तेजस्वी यादव ने सबको डरा- धमकाकर बंधक बना दिया है? लेकिन जब लालू परिवार बिखर रहा है तो परिवार के अन्य सदस्यों का तटस्थ रहना भी उन्हें दोषी बनाता है। परिवार की अगली पीढ़ी की सबसे बड़ी सदस्य मीसा भारती चुप क्यों है? लालू के बेटों में सबसे बड़े तेज प्रताप घर से निकाले जाने के बाद भले बेदखल हों, लेकिन नैतिकता के लिहाज से मूकदर्शक बने रहना भी ठीक नहीं। यह दोनों भाई-बहन मजबूती से माता- पिता के साथ आगे आकर परिवार को बचाएं।’





