किशनगंज में NIA की रेड, 2 लोगों को उठाया; PFI के पूर्व बिहार चीफ की गिरफ्तारी के बाद चौथा छापा
पीएफआई कनेक्शन को लेकर NIA ने शुक्रवार को बिहार के किशनगंज में छापा मारा। इस दौरान टीम ने 2 युवकों को हिरासत में लिया है। जिन से टाउन थाने में कई घंटों पूछताछ हुई। इससे पहले PFI के पूर्व बिहार चीफ महबूब आलम उर्फ महबूब नदवी की गिरफ्तारी हुई थी।

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व बिहार अध्यक्ष महबूब आलम नदवी की गिरफ्तारी के बाद किशनगंज में जांच एजेंसियों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम शुक्रवार को चौथी बार किशनगंज पहुंची और सदर थाना में दो संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की। एनआईए की इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। शुक्रवार को दिल्ली से पहुंची एनआईए की दो सदस्यीय टीम सीधे किशनगंज सदर थाना पहुंची। यहां पहले से नोटिस दिए गए दो लोगों को थाना बुलाया गया, जिनसे पीएफआई से कथित संबंध और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता को लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान थाना के जिस कक्ष में एनआईए की टीम मौजूद थी, वहां किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक रही। पुलिस अधिकारियों ने भी मामले में कोई विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया। एसपी सागर कुमार ने कहा कि पीएफआई से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में एनआईए की टीम किशनगंज आई है। आपको बता दें 11 सितंबर 2025 को केंद्रीय एजेंसी और किशनगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पीएफआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम नदवी (39) को किशनगंज शहर के हलीम चौक से गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक पूछताछ में भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। इसी क्रम में एनआईए की टीम बार-बार किशनगंज पहुंचकर स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने किशनगंज के मोहउद्दीनपुर इलाके में नदवी के एक अन्य ठिकाने पर भी छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसी के हाथ कई संदिग्ध दस्तावेज लगे, जिनकी जांच की जा रही है। बताया जाता है कि नदवी मार्च 2025 से गिरफ्तारी के डर से किशनगंज में रह रहा था और हलीम चौक पर एक किराए के मकान में छिपकर रह रहा था।
मूल रूप से कटिहार जिले के हसनगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर पंचायत के वंशीबाड़ी गांव का रहने वाला महबूब आलम नदवी वर्ष 2022 में पटना के फुलवारी शरीफ में एटीएस की छापेमारी के बाद दर्ज कांड में नामजद था। गिरफ्तारी के डर से वह उस समय अरब देश ओमान चला गया था, जहां करीब दो वर्षों तक रहा। भारत लौटने के बाद उसने किशनगंज को अपना ठिकाना बनाया। एनआईए द्वारा गिरफ्तार महबूब आलम नदवी वर्ष 2013 में वह प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़ा था। वर्ष 2016-17 के दौरान वह पीएफआई का बिहार राज्य अध्यक्ष भी रह चुका है।
मार्च 2025 से वह किशनगंज में वह एक निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में भी कार्यरत था। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी को लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर शक था और उस पर कट्टरपंथी नेटवर्क को मजबूत करने के आरोप हैं। एनआईए की बार-बार हो रही कार्रवाई से साफ है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है। स्थानीय संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और संगठनात्मक नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। फिलहाल एजेंसी और पुलिस दोनों ही जांच को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



