मरने से पहले NEET छात्रा ने रेप को लेकर मां को बताया, पिता बोले-पैसों का ऑफर मिला
छात्रा के पिता ने बताया है कि अस्पताल में मरने से पहले उनकी बेटी ने अपनी मां को क्या बताया था। यहीं नहीं पिता ने यह भी बताया है कि उन्हें इस पूरे मामले को दबाने के लिए मुंह मांगी रकम का ऑफर अस्पताल प्रबंधन ने किया था। पिता ने पुलिस की लीपापोती की भी कलई खोल कर रख दी है।

पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में मौजूद शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा से हुई दरिंदगी के बाद पटना पुलिस की अजीबोगरीब कार्रवाई लगातार सवालों के घेरे में है। हालांकि, शुरू से ही इस मामले में पुलिसिया चूक के सामने आने और पुलिस की काफी ज्यादा किरकिरी होने के बाद पूरे मामले की जांच के लिए अब SIT जरुर बना दी गई है। हालांकि, परिवारवालों का अब भी कहना है कि जांच पुलिस करे, एसआईटी करे या फिर सीबीआई उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए।
नीट छात्रा के पिता ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कई बड़ी बातों का खुलासा किया है। छात्रा के पिता ने बताया है कि अस्पताल में मरने से पहले उनकी बेटी ने अपनी मां को क्या बताया था। यहीं नहीं पिता ने यह भी बताया है कि उन्हें इस पूरे मामले को दबाने के लिए मुंह मांगी रकम का ऑफर अस्पताल प्रबंधन ने किया था। पिता ने पुलिस की लीपापोती की भी कलई खोल कर रख दी है।
न्यूज 18 से बातचीत में पीड़िता के पिता अभी तक कि जो जांच हुई है उससे वो सहमत नहीं हैं क्योंकि इस जांच से कई भी परिणाम सामने नहीं आया है। जब तक मेरी बेटी को को न्याय मिलता है तब तक मैं संतुष्ट नहीं हूं। पिता ने आगे कहा कि वो अभी तक एसआईटी ने जो जांच की है उससे भी हम सहमत नहीं हैं। पुलिस ने अभी तक सिर्फ लीपापोती की है।
पिता ने इस बातचीत के दौरान डॉक्टर सतीश को गुनहगार बताते हुए कहा कि सौ फीसदी उनकी मिलीभगत से मेरी बेटी की हत्या की गई है। उसके बाद किसी मनीष रंजन की जो गिरफ्तारी हुई है तो फिर उसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे तुरंत रिमांड पर क्यों नहीं लिया? उसे तुरंत जेल क्यों भेज दिया गया? यह मामला संदेहास्पद है। अब तक हॉस्टल संचालक गिरफ्तार नहीं हुआ है। हम चाहते हैं कि सीबीआई या एसआईटी या किसी भी माध्यम से जांच हो तो हमें न्याय मिले।
इसके बाद पिता ने बताया कि कैसे उन्हें अपनी बेटी के बारे में पता चला। छात्रा के पिता ने बताया कि हॉस्टल संचालक ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी की तबीयत खराब हो गई है और आप आईए। पिता ने कहा, 'करीब सवा पांच बजे हमें जानकारी मिली और हम आननफानन में हम छह बजे यहां से पटना के लिए निकल गए। हॉस्टल संचालक ने सहजानंद शर्मा के यहां मेरी बेटी को भर्ती कराया। उसके बाद उन्होंने कहा कि नहीं मामला गंभीर है लिहाजा इन्हें दूसरी जगह ले जाएं। इसके बाद प्रभात हॉस्पिटल में बेटी को भर्ती कराया गया। हमलोग साढ़े आठ बजे वहां पहुंचे और देखे तो मेरी बेटी बेहोश पड़ी थी और बिल्कुल अस्वस्थ थी। जानबूझ कर हॉस्टल संचालक और अस्पताल की मिलीभगत से मेरी बेटी की हत्या कर दी गई।
कुछ देर के लिए होश में आई थी बेटी
इस साक्षात्कार के दौरान छात्रा के पिता ने बताया कि कुछ देर के लिए उनकी बेटी अस्पताल में होश में आई थी। मेरी पत्नी ने उससे पूछा कि क्या बेटी तुम्हारे साथ गलत हुआ है तो उसने हां में कुछ पल के लिए सिर हिलाया और वो रोने लगी। इसके बाद हमें जबरन वहां से निकाल दिया गया। अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टर सतीश ने जबरन हमलोगों को वहां से निकाल दिया।
'जितना चाहे उतना पैसा ले लो'
हमसे कहा गया कि औकात दिखा देंगे। सभी लोग मिले हुए हैं। वहां के एसएचओ की भी मिलीभगत है। हमलोग जब अस्पताल में इलाज करवा रहे थे तब हॉस्टल की संचालिक नीलम अग्रवाल वहां आईं और उन्होंने कहा कि आपको जितना पैसा चाहिए उतना पैसा देते हैं। हमें प्रलोभन दिया गया कि पैसे लेकर केस मैनेज कर लीजिए। लेकिन हमने कहा कि नहीं हम पैसा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि जितना पैसा चाहिए उतना पैसा हम देंगे। पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था लेकिन वो चकनाचूर हो गया। पिता ने कहा कि मेरी बेटी अब आएगी नहीं लेकिन हमें न्याय मिले। पिता ने इस इंटरव्यू में दोषियों के लिए फांसी की सजा की भी मांग की है।





