NEET फर्जीवाड़ा: मेडिकल स्टूडेंट अर्पित सिंह निकला मास्टरमाइंड, मुजफ्फरपुर से चला रहा था 9 सॉल्वर्स का सिंडिकेट
NEET Re-Exam Mastermind Arpit Singh: नीट री-एग्जाम फर्जीवाड़े मामले का मास्टरमाइंड मगध मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित सिंह निकला है, जिसने बायोमेट्रिक कर्मियों से साठगांठ कर 9 सॉल्वर्स को परीक्षा केंद्रों पर अवैध रूप से बैठाया था।

NEET Re-Exam Mastermind Arpit Singh: नीट पुनरीक्षा में सामने आए बड़े स्कॉलर सिंडिकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके मास्टरमाइंड अर्पित सिंह के खौफनाक नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। मुजफ्फरपुर के भगवानपुर के यादव नगर का निवासी मेडिकल छात्र अर्पित सिंह ही इस पूरे सॉल्वर गैंग को तैयार करने से लेकर बायोमेट्रिक जांच करने वाली एजेंसी से साठगांठ करने का मुख्य सूत्रधार है। मगध मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र अर्पित ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कराने के लिए एक जाल बुना था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गया जी के टाउन डीएसपी-2 धर्मेंद्र भारती और मगध मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने ओल्ड बॉयज हॉस्टल स्थित अर्पित के कमरे में ताबड़तोड़ छापेमारी कर उसका इलेक्ट्रॉनिक टैब जब्त कर लिया है, जिससे इस सिंडिकेट के कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है।
नौ स्कॉलर्स को मोटी रकम देकर परीक्षा में बैठाया
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अर्पित सिंह ने भारी-भरकम रकम का लालच देकर नौ अलग-अलग सॉल्वर्स को तैयार किया और उन्हें लखीसराय के परीक्षा केंद्रों पर बैठाया। मुजफ्फरपुर के कांटी अंतर्गत हरचंदा गांव के निवासी विवेक कुमार को अर्पित ने अपने गिरोह में मुख्य स्कॉलर के रूप में शामिल किया था। लखीसराय के केआरके उच्च विद्यालय सेंटर पर जब विवेक को प्रभात अमन नामक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, तब पुलिसिया पूछताछ में मास्टरमाइंड अर्पित सिंह के नाम का महाविस्फोट हुआ। विवेक से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों (केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय) से अर्पित द्वारा सेट किए गए सभी नौ सॉल्वर्स को दबोच लिया। इस पूरी साजिश को रचने में अर्पित ने रंजित कुमार और रविशंकर की भी मदद ली थी।
बायोमेट्रिक कर्मियों को पैसे देकर खरीदा
मास्टरमाइंड अर्पित सिंह के हौसले इस कदर बुलंद थे कि उसने बायोमेट्रिक जांच करने वाली निजी एजेंसी 'साई एजुकेयर' के 18 कर्मियों को मोटी रकम देकर पहले ही खरीद लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के छात्र रंजित कुमार ने अपने भाई संजीत कुमार को पास कराने के लिए और फरार आरोपी रविशंकर ने अपनी पत्नी की जगह सॉल्वर बैठाने के लिए सीधे अर्पित से संपर्क साधा था। बायोमेट्रिक जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ में न आए, इसके लिए अर्पित ने पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप उर्फ अश्विनी के जरिए बायोमेट्रिक एजेंसी के तीन सुपरवाइजरों (बादल कुमार, विशाल कुमार, अमलेश कुमार) से तगड़ी सेटिंग की थी। सुपरवाइजरों के हरी झंडी देते ही बायोमेट्रिक जांच करने वाले अन्य 18 कर्मी भी मूकदर्शक बन गए। फिलहाल अर्पित, विवेक और रंजित पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।


