
बक्सर के राजपुर से एनडीए कैंडिडेट फाइनल? नीतीश ने संतोष निराला को आगे कर बड़ी बात कह दी
सीएम ने संतोष निराला की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह अच्छे आदमी है। हमारे मंत्रीमंडल में पूर्व मंत्री भी रह चुके है। इस बार इनको चुनाव में जीत दिलाइयेगा ना।
बिहार विधानसभा चुनाव के सीट शेयरिंग का पैटर्न फाइनल होने से पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा संकेत दिया है। इशारों में नीतीश कुमार ने बक्सर की राजपुर सीट पर अपनी पार्टी का दावा ठोक दिया है और कैंडिडेट भी फाइनल कर दिया है। मुख्यमंत्री शनिवार को राजपुर में उद्घाटन शिलान्यास के बाद कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे थे। खुले मंच से सीएम के बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है।

सीएम नीतीश कुमार की सभा अंतिम चरण में थी। दोपहर के 11 बजकर तीस मिनट हो रहा था। उस समय तेज गर्मी व उसम से सभी हाल-बेहाल हो रहे थे। तभी सीएम ने अचानक मंच से कुछ ऐसा कहा कि कार्यकर्ताओं का जोश हाई हो गया। सीएम ने कहा कि अरे भाई कहां गए, आइए यहां पर सामने। जेडीयू के वरिष्ठ नेता संतोष निराला हल्की मुस्कान के साथ हाथ जोड़े हुए सभी के सामने आए। सीएम ने संतोष निराला की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह अच्छे आदमी है। हमारे मंत्रीमंडल में पूर्व मंत्री भी रह चुके है। इस बार इनको चुनाव में जीत दिलाइयेगा ना। इनको चुनाव में जीत दिलाना है। ऐसे में कार्यकर्ताओं में जोश उमड़ पड़ा। संतोष निराला जिन्दाबाद के नारा लगने लगा। यह स्पष्ट हो गया कि जेडीयू इस बार पुन: संतोष निराला पर विश्वास करते हुए चुनावी दंगल में उतार रही है।
2015 में हार गए
पिछले कुछ चुनाव को आंकड़ों को देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि संतोष निराला ने पिछले चुनाव को छोड़कर हर बार राजपुर में अपनी मजबूत पकड़ बनाकर रखा। वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू संतोष निराला उतरे थे। उन्होंने 54,802 वोट हासिल कर जीत दर्ज किया था। वर्ष 2015 में जेडीयू महागठबंधन में शामिल हो गया। जेडीयू ने पुन: संतोष निराला पर विश्वास किया। इस बार इन्हें 84 हजार 184 वोट प्राप्त हुए। वहीं इसके विरोध में भाजपा ने विश्वनाथ राम का उतारा था। उन्हें मात्र 51 हजार 396 वोट प्राप्त हुआ था। इस जीत के बाद संतोष निराला का कद भी पार्टी में बढ़ा। उन्हें सरकार में मंत्री बनाया गया और महत्वपूर्ण परिवहन विभाग भी दिया गया था।
हार के बाद भी सक्रिय रहे
हालांकि वर्ष 2020 के चुनाव में जनता की नाराजगी बढ़ी और चुनावी समीकरण में भी बदलाव हो गया। जेडीयू एनडीए में पुन: वापस आ गई थी। भाजपा के प्रत्याशी विश्वनाथ राम ने ऐन मौके पर पाला बदल लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस प्रत्याशी विश्वनाथ राम ने 67 हजार 871 वोट हासिल कर संतोष निराला को हरा दिया। पार्टी के लिए समर्पित रहे संतोष निराला को चुनाव हारने के बाद भी महत्वपूर्ण पद पर रखा गया था। उन्हें कुछ समय के लिए महादलित आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया था।





