हर दिन मौसम का बदलता मिजाज सेहत पर पड़ने लगा है भारी

हिन्दुस्तान, नवादा
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जिले में इस समय मौसम का अजीब विरोधाभास है। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मौसमी बीमारियों के मरीज कम हैं। लोग सावधानी बरत रहे हैं, जिससे अस्पतालों में अन्य बीमारियों के मरीज अधिक हैं। चिकित्सकों के अनुसार, जागरूकता ने मौसम के प्रतिकूल प्रभावों को कम किया है।

हर दिन मौसम का बदलता मिजाज सेहत पर पड़ने लगा है भारी

जिले में इन दिनों मौसम का अजब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ आसमान से आग बरस रही है और नौतपा के चलते भीषण गर्मी का प्रकोप है, तो दूसरी तरफ बीच-बीच में बादलों की आवाजाही जारी है। हालांकि, झुलसाती धूप के बीच कई बार बारिश के अनुकूल आसार बनते तो दिख रहे हैं, लेकिन बादल बिना बरसे ही आगे निकल जा रहे हैं। धूप और उमस के इस दोहरे मिजाज का सीधा असर आम जनजीवन और लोगों की सेहत पर पड़ रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि इनमें मौसमी बीमारों की संख्या कम है, लेकिन अन्य बीमारियों के मरीज बढ़े हैं।

मौसमी बीमारियों की कमी

भीषण गर्मी और उमस की अधिकता के कारण मंगलवार को सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में मरीजों की भीड़ आम दिनों की तरह नहीं रही। इसका कारण धूप तेज होने के कारण लोग दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। इसके साथ ही, मौसम के मिजाज को भांपते हुए लोग खान-पान और दिनचर्या में अपने स्तर से व्यापक सावधानी बरत रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि इन दिनों मौसमी बीमारियों जैसे लू लगना, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन, सर्दी-खांसी और तेज बुखार के मरीजों में कमी आई है। सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में इस समय मौसमी बीमारियों से इतर अन्य शारीरिक समस्याओं शरीर दर्द, हंफनी और पुरानी बीमारियों ज्वाइंट पेन आदि से पीड़ित लोग ही अधिक संख्या में चिकित्सीय परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।

ओपीडी में मरीजों की स्थिति

मंगलवार को ओपीडी में पहुंचे 270 मरीज ​मंगलवार को सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में तैनात चिकित्सकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि फिलहाल मौसमी मरीजों का ग्राफ नियंत्रण में है। डॉक्टरों के अनुसार, लोग अब सावधानीवश बीमारी के लक्षण उभरने का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि पहले से ही एहतियात बरत रहे हैं। ओपीडी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. शशिकांत ने बताया कि उन्होंने दिनभर में लगभग 136 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि इन मरीजों में मौसमी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या कम थी, जबकि अन्य जटिलताओं या रूटीन चेकअप वाले मरीज अधिक थे। वहीं, ओपीडी में ही तैनात डॉ. श्रीकांत कुमार ने भी लगभग 135 मरीजों को देखा और उनकी स्थिति की जांच की। डॉ. श्रीकांत ने भी बताया कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में मौसमी बीमारियों के लक्षण वाले मरीजों की संख्या उनकी तुलना में कम रहा, जो शरीर दर्द, सांस की समस्या या जोड़ों के दर्द आदि की समस्या लेकर पहुंचे थे।

सजगता ने दी मौसम के मिजाज को मात

सिविल सर्जन डॉ.बिनोद कुमार ने बताया कि आमतौर पर भीषण गर्मी वाले अनिश्चित मौसम में अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं होती है, लेकिन इस बार अलग स्थिति है। लोग धूप में निकलने से परहेज कर रहे हैं और शरीर में पानी की कमी नहीं होने दे रहे हैं। इस प्रकार, आमजनों की सजगता और एहतियात ने मौसम के इस खतरनाक मिजाज को मात दे दी है। सिविल सर्जन ने कहा कि यदि लोग इसी तरह जागरूक रहे, तो इस भीषण गर्मी में भी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम किया जा सकता है। फिलहाल, सदर अस्पताल प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। (नवादा से राजेश मंझवेकर)

सामान्य प्रश्न

इस समय मौसम में क्या विरोधाभास है?
एक तरफ आसमान से आग बरस रही है और नौतपा के चलते भीषण गर्मी का प्रकोप है, तो दूसरी तरफ बीच-बीच में बादलों की आवाजाही जारी है।
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