हादसे को दावत दे रहे शहर के खुले नाले, नहीं हो रहा समाधान
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।बीते शनिवार को पटना के फुलवारीशरीफ में एक दो साल की मासूम की नाले के खुले चेंबर में गिरने से हुई मौत ने नवादा शहर के भी हर माता-पिता के दिल में खौफ भर दिया है।

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। बीते शनिवार को पटना के फुलवारीशरीफ में एक दो साल की मासूम की नाले के खुले चेंबर में गिरने से हुई मौत ने नवादा शहर के भी हर माता-पिता के दिल में खौफ भर दिया है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि नवादा शहरी क्षेत्र में भी अनेक स्थानों पर नाले पर स्लैब टूटे पड़े हैं तो कई स्थानों पर मैनहोल खुले पड़े हैं। शहर के पॉश इलाकों से लेकर घनी आबादी वाली गलियों तक, दुर्घटना के सबब बने पड़े ये खुले दरवाजे राहगीरों और बच्चों का इंतजार कर रहे हैं। छिटपुट घटनाएं तो आम हैं, जो बारिश के दिनों में खतरनाक साबित होते हैं।
हालांकि नवादा शहर में कोई मौत की सूचना अब तक नहीं है। नवादा शहर के न्यू एरिया, गढ़पर और राजेंद्र नगर जैसे पॉश इलाकों में जब आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने पड़ताल की, तो कई स्थानों पर खुले नाले वाला नजारा आम दिखा। न्यू एरिया में मुख्य सड़क से सटी गलियों में कई जगहों पर नाले के ढक्कन गायब दिखा। गढ़पर की स्थिति भी खराब है। नालियों के ऊपर रखे स्लैब कई स्थानों पर टूट चुके हैं। कई स्थानों पर बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। शहर के राजेंद्र नगर में नाली निर्माण तो हुआ, लेकिन इसके लिए बनाए गए चेंबर को अब भी ढंकना शेष है। पांच-छह महीने से खुले हैं यह नाले समीप के निवासियों के अनुसार, बीत पांच-छह महीने से नाले खुले पड़े हैं। कई जगहों पर निर्माण कार्य के दौरान ढक्कन हटाए गए जो फिर वापस नहीं लगे। कुछ जगहों पर भारी वाहनों के दबाव से ढक्कन टूट गए, जिन्हें बदलने का अब भी इंतजार है। कुछ स्थानों पर नाले की सफाई के समय स्लैब हटाने के क्रम में टूट गए। हालांकि संबंधित वार्ड पार्षदों की तत्परता दिखती है, जो संबंधित विभागीय जेई के साथ इसका निरीक्षण कर समाधान को तत्पर दिख रहे हैं। लेकिन कम से कम पांच-छह महीने का समय इसमें लग ही जा रहा है। तब लोगों की जान संकट में रहती है। संज्ञान में नहीं आते सामान्य हादसे आधिकारिक तौर पर हाल-फिलहाल में किसी की जान जाने की खबर नहीं है, लेकिन छोटे-मोटे हादसे इन स्थानों पर रोज की बात हैं। राजेंद्र नगर में पिछले हफ्ते एक बाइक सवार युवक खुले नाले में गिरते-गिरते बचा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। गढ़पर में आए दिन आवारा पशु इन गड्ढों में गिरकर जख्मी हो जा रहे हैं। स्थानीय निवासी सुरेन्द्र कुमार बताते हैं कि पटेल नगर के समीप खुले नाले में पूरी बाइक के साथ एक माह पूर्व एक युवक गिर पड़ा, जिससे उसे तो चोटें आयी ही, उसकी बाइक भी स्टार्ट नहीं हो सकी, जिसे टोचन कर ले जाने की नौबत रही। इससे उत्पन्न अपमानजनक स्थिति का जो सामना करना पड़ा, वह तो अलग ही युवक की दुर्दशा कर गयी। इन इलाकों में स्थानीय लोगों का कहना है कि हम तो अब अपने बच्चों को घर से बाहर अकेले निकलने ही नहीं देते। रात के अंधेरे में ये खुले नाले तो मौत का कुआं बन जाते हैं। आम जनता की परेशानियां, डर के साये में जीवन अपनी पीड़ा साझा करते हुए अनेक लोगों ने कहा कि इन हालातों में स्कूली बच्चों का सबसे अधिक खतरा बना रहता है। सुबह के वक्त जब बच्चे स्कूल वैन के लिए निकलते हैं, तो माता-पिता को उनके गिरने का डर सताता रहता है। ऐसे में कई अभिभावक तो साथ ही स्कूल वैन तक बच्चों को छोड़ने और ले जाने आते हैं। एक अलग ही संकट लोगों को झेलना पड़ता है। खुले मैनहोल अथवा स्लैबविहीन नाले के कारण सामान्य कचरा सीधे नाले में जाता है, जिससे नाले जाम हो जाते हैं और गंदा पानी सड़कों पर बहता है। खुले नालों से उठती बदबू और पनपते मच्छरों ने मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल कर रखा है। सामान्यजन उठा रहे विभिन्न मांगें प्रभावित सामान्यजन विभिन्न मांगें उठाते दिख जाते हैं। लोगों ने इस समस्या के समाधान के लिए कहा कि जैसे ही पहली सूचना विभाग तक पहुंचे, अगले 48 घंटों के भीतर सभी चिह्नित खुले मैनहोल अथवा स्लैबविहीन नाले को अस्थायी रूप से घेर दिया जाए। एक सप्ताह के अंदर पक्के ढक्कन यानी आरसीसी स्लैब लगा दिए जाएं। लापरवाही न हो, फिर भी लापरवाही हो संबंधित पक्षों व संवेदकों पर सख्त कार्रवाई हो। -------------------- वर्जन: खुले मैनहोल अथवा स्लैबविहीन नाले की सूचना मिलने पर स्थानीय वार्ड पार्षद व संबंधित जेई इसका निरीक्षण करते हैं, जिसके बाद इसे दुरुस्त करने की कवायद नियमित रूप से की जाती है। हर छह महीने पर इसे ठीक कराया जाता है। संबंधित वार्ड पार्षदों को तीन-तीन लाख रुपए का फंड उपलब्ध करा दिया जाता है, जिससे इसे सही करा दिया जाता है। गली-मोहल्लों में स्थित छोटे और कम खतरनाक नाले की सूचना मिलने में भले देर हो जाए, लेकिन बड़े नाले पर कहीं ऐसी स्थिति रहती है तो उसे शीघ्रता से बनवाने की पहल की जाती है। कुल मिला कर साइट और नाले की साइज के आधार पर इस समस्या का समाधान निकालने का कार्य तत्परता से पूरा किया जाता है। -पिंकी कुमारी, मुख्य पार्षद, नगर परिषद, नवादा।
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