नवादा के पुराने बस स्टैंड से वाहनों का हो रहा परिचालन, परेशानी
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर एक प्रमुख स्थल माना जाने वाला टीचर ट्रेनिंग क्षेत्र यानी पुराना बस स्टैंड इन दिनों अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। घनी आबादी, संकरी गलियां और ऊपर से बेतरतीब ढंग...

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर एक प्रमुख स्थल माना जाने वाला टीचर ट्रेनिंग क्षेत्र यानी पुराना बस स्टैंड इन दिनों अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। घनी आबादी, संकरी गलियां और ऊपर से बेतरतीब ढंग से खड़ी विशालकाय बसें-यह दृश्य यहां की नियति बन चुका है। जिला प्रशासन द्वारा शहर के बाहर सुव्यवस्थित बस पड़ाव बुधौल में बनाए जाने के बावजूद, निजी बस संचालकों की मनमानी के कारण पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में जाम का झाम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पुराने बस स्टैंड इलाके में सुबह 08 बजे से ही अराजकता का माहौल शुरू हो जाता है।
नियमों को ताक पर रखकर बस चालक मुख्य सड़क के बीचों-बीच गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इस कारण स्कूली बच्चों को बस के पीछे छिपकर सड़क पार करनी पड़ती है, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है। बुजुर्गों के लिए पैदल चलना दूभर है और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं घंटों इस ट्रैफिक में फंसी रहती हैं। नवादा के इस क्षेत्र में स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। स्थानीय लोग अब ऊबते जा रहे हैं। लोगों की मांग स्पष्ट है कि बसों का संचालन केवल निर्धारित पड़ावों से हो। इसकी व्यवस्था की गेंद अब जिला प्रशासन के पाले में है। जिला प्रशासन जनहित में कड़ा फैसला ले और बस संचालकों को निर्देशित करे ताकि इस संकट का समाधान निकल सके। प्रशासनिक उपेक्षा पर उठते सवाल हैरानी की बात यह है कि जब शहर में बुधौल और तीन नंबर बस स्टैंड जैसे विकल्प मौजूद हैं, तो फिर शहर के इस सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र को बस स्टैंड के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली बस ऑपरेटरों और निचले स्तर के कर्मियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता है। हालिया दिनों में एनएच स्थित केन्दुआ के समीप से ही बसों की आवाजाही की व्यवस्था से लोगों का खर्च थोड़ा बढ़ गया था क्योंकि शहर तक आने के लिए अलग से टोटो का खर्च उठाना पड़ता था, लेकिन शहर में जाम जैसी स्थिति से छुटकारा मिल गया था। लेकिन एक बार फिर से इसी स्थाान पर बसों को लगा कर रखे जाने के कारण जाम का संकट गहरा गया है। निराशाजनक तो यह है कि इसका समाधान निकलता भी नहीं दिख रहा है। व्यापार और स्वास्थ्य पर बुरा असर जाम की वजह से न केवल राहगीर, बल्कि स्थानीय दुकानदार भी खून के आंसू रो रहे हैं। दुकानों के ठीक सामने बसें खड़ी होने से ग्राहक वहां पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। धूल, धुंआ और लगातार बजते प्रेशर हॉर्न ने लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ दिया है। नवादा शहर के टीचर ट्रेनिंग स्थित पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में इन दिनों यात्री बसों के संचालन को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। घनी आबादी और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इस इलाके में बसों की पार्किंग और यात्रियों के चढ़ने-उतरने की व्यवस्था होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय जब बाजार में लोगों की आवाजाही अपने चरम पर होती है, उसी दौरान यहां बसों को यात्रियों के लिए खड़ा किया जाता है। बसों के रुकने से सड़कें पूरी तरह जाम हो जाती हैं, जिससे पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और स्थानीय दुकानदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भी जाम में फंसना पड़ता है, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस भीड़भाड़ वाले इलाके में बसों का संचालन करना पूरी तरह अनुचित है। लोगों का मानना है कि यह न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की सुविधा और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। कई नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बस चालक और संचालक अपनी सुविधा के अनुसार बसों को यहां खड़ा कर लेते हैं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है। दुकानदार लगातार जाहिर कर रहे अपनी नाराजगी दुकानदारों ने भी इस समस्या को लेकर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि बसों के कारण दुकान के सामने ग्राहकों का आना-जाना बाधित हो जाता है, जिससे उनके व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है। कई दुकानदारों ने बताया कि जाम और भीड़ के कारण ग्राहक इस क्षेत्र में आने से कतराने लगे हैं, जिससे उनकी आय में गिरावट आई है। वहीं, राहगीरों का कहना है कि उन्हें कई बार बसों के बीच से जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपनी परेशानियां साझा करते हुए कहा कि बसों की भीड़ और शोरगुल के कारण यहां चलना मुश्किल हो गया है। खासकर बच्चों और स्कूली छात्रों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है। अभिभावकों ने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों को स्कूल आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और किसी भी समय कोई अप्रिय घटना हो सकती है। निर्धारित बस पड़ावों पर ही रूकें बसें ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का अनियंत्रित संचालन गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रशासन स्पष्ट नियम बनाए और उनका सख्ती से पालन कराए। साथ ही, बस चालकों और संचालकों को भी निर्धारित स्थानों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर अब लोगों की उम्मीदें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। शहरवासी कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि शहर के सुचारु संचालन और आम जनता की सुविधा के लिए आवश्यक है कि प्रशासन इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाले। भीड़भाड़ वाले पुराने बस स्टैंड क्षेत्र से बसों को हटाकर निर्धारित बस पड़ावों पर ही संचालन सुनिश्चित करना ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। -------------------------- जनता की आवाज: 1.यहां स्थित दुकानों के ठीक सामने बसों की लंबी कतार लग जाती है। ग्राहक भीड़ और जाम देखकर वापस लौट जाते हैं। सारा दिन हॉर्न का शोर और डीजल का धुआं झेलना पड़ता है। दुकानदारों की शिकायत प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। अगर यही हाल रहा तो इन दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा। -सुनील साव, सद्भावना चौक, नवादा। 2.बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। बसें इतनी बेतरतीब खड़ी रहती हैं कि पैदल चलने की जगह भी नहीं बचती। कई बार बस के पीछे से अचानक कोई बाइक आ जाती है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि बसों को तुरंत शहर से बाहर अथवा बुधौल शिफ्ट किया जाए। घनी आबादी के बीच बस स्टैंड होना जानलेवा साबित हो रहा है। -अशोक कुमार, पुरानी बाजार, नवादा। 3.किसी भी शहर के विकास के लिए सुचारु यातायात अनिवार्य है। पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की क्षमता अब बसों का भार सहने की नहीं है। प्रशासन को नो-पार्किंग जोन सख्ती से लागू करना चाहिए। जब तक भारी वाहनों को शहर की सीमा के बाहर नहीं रोका जाएगा, तब तक नवादा को जाम मुक्त करना नामुमकिन है। -फिरोज खान, भदौनी, नवादा। 4.रोज सुबह ट्यूशन और कॉलेज जाने के समय बसें सड़क जाम कर देती हैं। कभी-कभी तो स्कूली बच्चे परीक्षा के लिए भी लेट हो जाते हैं। प्रशासन को आम जनता की तकलीफ दिखाई नहीं देती। अगर जल्द ही इन बसों का संचालन यहां से बंद नहीं हुआ, तो छात्र समेत तमाम लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। -मनीष कुमार, राम नगर, नवादा। ---------------------------- शहरी नियोजन की विफलता साबित हो रही नियमों की अनदेखी नवादा। नवादा के पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में उपजी यह समस्या केवल ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन की विफलता और नियमों के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का एक बड़ा उदाहरण बन रहा है। तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो टीचर ट्रेनिंग और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र शहर का सबसे संवेदनशील संकरा मार्ग बन चुका है। जानकारों का मानना है कि किसी भी शहर के बीचों-बीच भारी वाहनों का प्रवेश न केवल भौतिक अवरोध पैदा करता है, बल्कि यह उस क्षेत्र की आधारभूत संरचना को भी समय से पहले नष्ट कर देता है। सरकारी दस्तावेजों में बसों के ठहराव के लिए निश्चित बस स्टैंड चिह्नित हैं। इसके बावजूद पुराने बस स्टैंड पर बसों का संचालन एक समानांतर अवैध व्यवस्था की तरह चल रहा है। यहां समस्या केवल बसों के रुकने की नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए जाने वाले टाइम-कीपिंग की भी है। एक बस को भरने के चक्कर में चालक उसे आधे-आधे घंटे तक बीच सड़क पर खड़ा रखते हैं, जिससे पीछे वाहनों की एक लंबी कतार लग जाती है। --------------------- सुरक्षा मानकों का रहता है अभाव नवादा। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बसों के संचालन से आगजनी या भगदड़ जैसी स्थितियों में राहत कार्य करना लगभग असंभव हो जाएगा। यहां की सड़कें इतनी संकरी हो चुकी हैं कि दो बसें एक साथ गुजरने पर पैदल यात्रियों के लिए इंच भर की जगह नहीं बचती। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शाम के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब स्ट्रीट लाइटों की कमी और बसों की चकाचौंध रोशनी के बीच राहगीरों का चलना दूभर हो जाता है। यदि प्रशासन नो-एंट्री के घंटों को सख्ती से लागू करे और पुराने बस स्टैंड क्षेत्र को जीरो टॉलरेंस जोन घोषित कर दे, तो इस समस्या का समाधान 24 घंटे के भीतर हो सकता है। जुर्माना लगाना केवल एक अस्थायी उपाय है। स्थायी समाधान के लिए बसों को उनके निर्धारित डिपो तक सीमित करना अनिवार्य है।
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