सेहत के नाम पर बीमारी परोस रही हैं हरी सब्जियां

हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा में हरी सब्जियां सेहत के नाम पर बीमारी फैला रही हैं। सब्जियों में रसायनों और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ गया है, जिससे लोगों के लीवर, किडनी और नर्वस सिस्टम पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासनिक पहल की कमी और किसानों द्वारा प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग चिंता का विषय बन चुका है।

सेहत के नाम पर बीमारी परोस रही हैं हरी सब्जियां

नवादा में इन दिनों सेहत के नाम पर हरी सब्जियां बीमारी परोस रही हैं। जिस थाली को घरों में गृहिणियां हरी और सेहतमंद समझकर अपने परिवार के सामने रखती हैं, वह दरअसल धीमी मौत का सामान बन चुकी है। नवादा जिले के प्रमुख सब्जी उत्पादक क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों में रसायनों और कीटनाशकों का ऐसा घालमेल कर दिया गया है कि शहरवासियों के लीवर, किडनी और नर्वस सिस्टम पर सीधा प्रहार हो रहा है। ​

खतरनाक सब्जियों का सच

नवादा की मंडियों में सुबह-सुबह पहुंचने वाली ताजी और चमकदार लौकी, कद्दू और बैंगन के पीछे का सच बेहद डरावना है। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थानीय से लेकर बाहर से आने वाली सब्जियों का आकार रातों-रात बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोनल इंजेक्शन का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। ​चौंकाने वाला सच यह है कि शाम को जो लौकी एक छोटी बेल जितनी होती है, इंजेक्शन के प्रभाव से सुबह तक वह दो से तीन गुना बड़ी और चमकदार हो जाती है। यह हार्मोन इंसानी शरीर, विशेषकर बच्चों के विकास के लिए अत्यंत घातक है।

कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग

प्रतिबंधित कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव इलाके के विभिन्न सब्जी फार्मों अथवा खेतों में कीटों से फसल बचाने के नाम पर उन कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है, जिन्हें सरकार ने सालों पहले बेहद खतरनाक श्रेणी में डालकर प्रतिबंधित कर दिया था। आम तौर पर कीटनाशक के छिड़काव के कम से कम एक सप्ताह बाद फसल की तुड़ाई होनी चाहिए, लेकिन नवादा में आज छिड़काव होता है और कल ही सब्जी मंडी में बिकने पहुंच जा रही है। इन रसायनों के अवशेष सब्जियों की ऊपरी परत के जरिए आम आदमी के खून में मिल रहे हैं।

प्रशासनिक पहल की कमी

जांच के नाम पर प्रशासनिक पहल शून्य ​नवादा की पुरानी कचहरी के समीप स्थित सब्जी मंडी हो या भगत सिंहं चौक अथवा इंदिरा चौक से लेकर रेलवे क्रॉसिंग के समीप की सब्जी मंडी समेत शहर भर में जहां कहीं भी सब्जियां बिक रही हों, कहीं भी सब्जियों की शुद्धता मापने का कोई पैमाना नहीं है। जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें कभी-कभार मिठाई की दुकानों पर तो छापामारी करती हैं, लेकिन मंडियों में जहर की तरह बिक रही इन सब्जियों की जांच के लिए आज तक कोई ठोस अभियान नहीं चलाया गया। प्रयोगशाला के अभाव में किसान बेखौफ होकर अपनी फसलों को रसायनों से नहला रहे हैं।

बीमारियों का बढ़ता खतरा

कैंसर और किडनी रोगों में उछाल ​नवादा सदर अस्पताल और निजी क्लीनिकों में पिछले कुछ वर्षों में पेट दर्द, समय से पहले बुढ़ापा, किडनी में खराबी और कैंसर के मामलों में जो वृद्धि देखी गई है, डॉक्टर उसका एक बड़ा कारण जहरीली डाइट मानते हैं। शहर की एक गृहिणी न्यू एरिया की प्रियंका कुमारी बताती हैं कि हम बच्चों को जंक फूड से बचाकर हरी सब्जियां खिलाते हैं, लेकिन अब तो डर लगता है कि कहीं हम उन्हें जहर तो नहीं दे रहे? बैंगन और गोभी को धोकर बनाने के बाद भी उनकी महक और स्वाद में रसायनों का अहसास होता है।

समाधान की तलाश

नवादा को इस धीमी मौत से बचाने के लिए केवल प्रशासन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की भी जरूरत है, ऐसा जागरूक नागरिक वीरेन्द्र कुमार कहते हैं। उनका कहना है कि ​ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास होना चाहिए। प्रशासन को उन किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए जो जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, बीज और खाद की दुकानों पर बिकने वाले अवैध रसायनों और प्रतिबंधित दवाओं पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। जिले में कम से कम एक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब होनी चाहिए, जो रैंडम आधार पर मंडियों से सब्जियों के सैंपल लेकर उनकी जांच कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि नवादा की धरती सोना उगलने की क्षमता रखती है, लेकिन रसायनों के इस अंधाधुंध खेल ने इसे जहरीला बना दिया है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाली पीढ़ी शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और बीमारियों से ग्रस्त पैदा होगी। अब समय है कि सस्ती और सुंदर सब्जी के बजाय हम सभी को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिल सके। (नवादा से राजेश मंझवेकर)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवादा में सब्जियों में किस प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जा रहा है?
नवादा में सब्जियों में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोनल इंजेक्शन और प्रतिबंधित कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है।
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