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जिले के एथलीट के हौसलों को लॉकडाउन ने किया पस्त

हिन्दुस्तान टीम,नवादाPublished By: Newswrap
Wed, 16 Jun 2021 04:50 PM
जिले के एथलीट के हौसलों को लॉकडाउन ने किया पस्त

नवादा। नगर संवाददाता

जिले के एथलीट लॉकडाउन अवधि में अपनी ऊर्जा गंवा चुके हैं। दो साल के लम्बे वक्त ने एथलीट के हौसलों को पस्त कर दिया है। लॉकडाउन अवधि में अभ्यास छूटने से खिलाड़ियों का खेल सीधा-सीधा प्रभावित हुआ है। जिला से लेकर राज्य स्तर तक अब भी खेल आयोजनों को लेकर संशय बना हुआ है। ऐसे में खिलाड़ियों में भारी निराशा छायी हुई है। इस अवधि में ओवरएज हो गए खिलाड़ियों को अलग संवर्ग में बेहतर करने की बाध्यता झेलने की नौबत है। यह अलग ही परेशानी का सबब है।

खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया के जिला नोडल प्रभारी संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया एवं खेलो इंडिया अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालयों में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि सभी बच्चे शारीरिक रूप से फिट रह सकें और शरीर में किसी भी प्रकार की कोई बीमारी न आए। इसके लिए सभी युवाओं एवं युवतियों के लिए खेल निर्धारित की गई है जिसके तहत स्वास्थ्य प्राप्ति के साथ-साथ खेल में अपने गांव, जिला, राज्य एवं देश का नाम रोशन कर सकें। इसके लिए नित्य दिन कड़े अभ्यास करने की जरूरत है लेकिन लॉकडाउन के कारण इस पर विराम लग गया है। यहां उल्लेखनीय है कि खिलाड़ी शारीरिक व मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ होते हैं तथा उन पर वायरस का असर बिल्कुल नहीं के बराबर हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय सर्वे में बताया गया है। ऐसे में एथलीट के लिए अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। ऐसा ही एथलीट अलीशा राज और चंदन कुमार आदि भी कहते हैं। सभी में खेल शुरू किए जाने की छटपटाहट दिख रही है।

खिलाड़ियों का दर्द:

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर बेहतर प्रदर्शन कर 2019 में पदक प्राप्त की थी और फिर इसके बाद इधर दो वर्षों में खेल बंद होने के कारण प्रतियोगिता और मेडल सपना बन कर रह गया है। सबसे परेशानी तो यह है कि किसी तरह की प्रैक्टिस भी नहीं हो पा रही है। लॉकडाउन के कारण पढ़ाई के साथ ही खेल कैरियर भी तबाह होता दिख रहा है। अब कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जाए तो ही खिलाड़ियों का भला हो सकता है। - आरती कुमारी, नेशनल एथलीट, नवादा

विद्यालय स्तरीय खेलों के लिए मेरी उम्र शेष बची थी लेकिन लॉकडाउन में सभी विद्यालय स्तर के खेल स्थगित हो गए। ऐसे में हमारी योजनाएं भी लॉकडाउन की भेंट चढ़ गए। अब मेरे सामने सिर्फ और सिर्फ सीनियर प्रतियोगिताओं में भाग लेने की बाध्यता आ गयी है। विद्यालय खेल में पदक प्राप्त होने का अच्छा चांस था लेकिन सीनियर प्रतियोगिताओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ सकता है। - पूनम कुमारी, एथलीट, नवादा

कई स्तर पर बेहतर प्रदर्शन जारी रख कर भविष्य को लेकर यह योजना थी कि अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए गोल्ड हासिल करना है और अपना खेल रिकॉर्ड बेहतर बना लेना है। इसी आधार पर लगातार नेशनल तक खेलने का मौका मिल सका। नेशनल लेवल पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने की पूरी तैयारी धरी की धरी रह गयी। लॉकडाउन ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। - अनिल कुमार, नेशनल एथलीट

खेल अधिकारी का वर्जन:

खिलाड़ियों से उनका खेल निखारने का हर मौका इस लॉकडाउन ने छीन लिया। स्कूल स्तर से लेकर राज्य और राष्ट्र स्तर पर जिले की प्रतिभाओं ने अपना दम-खम दिखाया है। पदक भी जीते हैं। बीते दो सालों में पदक तालिका और भी मजबूत हो चुकी होती जबकि कई खिलाड़ियों की खास पहचान बन चुकी होती लेकिन लॉकडाउन ने सब बर्बाद कर दिया। अब तो कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है। - विक्रम कुमार, सचिव, जिला एथलेटिक्स संघ, नवादा

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