
आदर्श आचार संहिता की भेंट चढ़ा तमसा महोत्सव
संक्षेप: हिसुआ, निज संवाददाता।पर्यावरण संरक्षण को समर्पित हिसुआ का प्रसिद्ध तमसा महोत्सव इस बार राजकीय समारोह के रूप में नहीं मनाया जा सका।
हिसुआ, निज संवाददाता। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित हिसुआ का प्रसिद्ध तमसा महोत्सव इस बार राजकीय समारोह के रूप में नहीं मनाया जा सका। हालांकि संस्थापक सदस्यों ने परम्परा को जीवित रखा और पूर्व की तरह इस बार भी तमसा महोत्सव अपने स्तर से मनाया। ओंकार शर्मा की अध्यक्षता और जीतेन्द्र राज आर्यन के संयोजन में कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में ज्ञान भारती हिसुआ, जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल, सरस्वती नेशनल स्कूल सहित कई अन्य विद्यालय के छात्राओं नें नदी एवं जलवायु संरक्षण के प्रति आकर्षक रंगोली बनाई। उसके बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। महोत्सव का मुख्य आकर्षण स्थानीय कलाकार डॉ शैलेन्द्र कुमार प्रसून्न एवं देवेंद्र विश्वकर्मा द्वारा नदी की रेत पर ऊकेरी गई सैंड आर्ट रहा, जो लोगों को नदी एवं पर्यावरण के प्रति प्रेरित कर रहा था।

शाम होते ही प्राचीन तमसा तट कच्ची मिट्टी से बने हजारों दीये से जगमगा उठा उसके बाद लोगों की उपस्थिति में गंगा आरती की गई। बता दें कि तमसा तट पर नदी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित समारोह तमसा महोत्सव की शुरुआत शिक्षाविद व राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक दिवंगत डॉ मिथलेश कुमार सिन्हा की पहल पर वर्ष 2015 को देवोत्थान एकादशी के दिन हुई थी। जिसमें शहर के पत्रकारों, साहित्यकारों सहित काफी संख्या में युवाओं नें अपनी सहभागिता निभाई थी। हाल में मिला है राजकीय समारोह का दर्जा जिले के इस महोत्सव को हाल में ही जिला प्रशासन की पहल पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा सीतामढ़ी मेला और तमसा नदी महोत्सव को राजकीय समारोह का दर्जा दिया गया था। जिससे इसबार इस कार्यक्रम को स्थानीय लोग वृहत पैमाने पर मनाये जाने की आस लगाए हुए थे। लेकिन इसे संयोग कहा जाये या दुर्भाग्य, पहला राजकीय समारोह विधानसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता की भेंट चढ़ गया।

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