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सीतामढ़ी मेला : दिख रहा आस्था, मनोरंजन व काष्ठ कला का संगम

सीतामढ़ी मेला : दिख रहा आस्था, मनोरंजन व काष्ठ कला का संगम

संक्षेप:

नवादा/मेसकौर। हिसं/निप्रमगध क्षेत्र का सुविख्यात सीतामढ़ी मेला गुरुवार से शुरू हो गया। मेले में हर साल की भांति इस बार भी आस्था और मनोरंजन के साथ ही काष्ठकला का संगम देखने को मिल रहा है।

Dec 06, 2025 02:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा/मेसकौर। हिसं/निप्र मगध क्षेत्र का सुविख्यात सीतामढ़ी मेला गुरुवार से शुरू हो गया। मेले में हर साल की भांति इस बार भी आस्था और मनोरंजन के साथ ही काष्ठकला का संगम देखने को मिल रहा है। मेले के बहाने यहां आने वाले श्रद्धालु मां सीता की शरणस्थली और लवकुश की जन्मस्थली की मिट्टी को नमन कर रहे हैं जबकि विभिन्न जातियों के पूजनस्थल पर भी पूजन की होड़ लगी हुई है। अगहन यानी मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन से इस बार लगातार तीन दिनों की बजाय सात दिनों तक चलने वाले सीतामढ़ी मेले में मौसम के खुल जाने के बाद शुक्रवार को भारी भीड़ उमड़ती रही।

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मेले के कारण सीतामढ़ी ही नहीं बल्कि यहां से 10 किलोमीटर के आस-पास की आबादी में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। सीतामढ़ी के आसपास के 50 से अधिक गांवों के हर घर में काफी संख्या में रिश्ते-नाते के लोग पहुंच चुके हैं। इस बार मौसम काफी साफ है और फसल भी अच्छी होने से हर परिस्थितियां मेले के अनुकूल हो चुकी हैं इसलिए इस बार मेले में अधिक से अधिक लोग जुट रहे हैं। इधर, मेला ठेकेदार पवन कुमार चौहान 17.21 लाख में हुए महंगे ठेके को लेकर मेले को विशिष्ट बनाने में जुटे हैं, ताकि सात दिनों के मेले में राजस्व वसूली पूरी तरह से कर ली जाए। कल्याण सिन्हा एंड टीम ने खूब किया मनोरंजन राजकीय मेले का दर्जा पाने के बाद पहली बार आयोजित हो सीतामढ़ी मेला महोत्सव में कलाकार कल्याण सिन्हा एंड टीम ने उपस्थित लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। गीत-संगीत की प्रस्तुति से कलाकारों ने सभी का दिल जीत लिया। कल्याण सिन्हा एंड की संगीतमयी प्रस्तुति ने मेले में पहुंचे लोगों का दिल जीत लिया। वंस मोर, वंस मोर का शोर लगातार उठता रहा और माहौल ढलती शाम के साथ और भी खुशगवार होती चली गयी। सीतामढ़ी मेले के क्रम में एकदम से नया अनुभव पा कर उपस्थित लोग बेहद पुलकित दिखे। लोगों ने इस पल को जिया और यादगार लम्हें अपने साथ यादों की पोटली में समेट कर ले गए। लोग इस आयोजन की चर्चा करने में मशगूल दिखे। ग्रामीण मेले में आज भी जिंदा है ग्रामीण संस्कृति सीतामढ़ी मेले में ग्रामीण संस्कृति की स्पष्ट झलक आज भी दिख रही है। मेले में अब आधुनिकता हावी होती जा रही है लेकिन आज भी थिएटर और नाच-गाने के अलावा हिंडोला और कठघोड़ी जैसे झूले इसकी पहचान को बचाए रख रहे हैं। इस बार ऐसे झूले लगाए गए हैं। यह और बात है कि आसमानतारा और नाव वाले झूले भी अपनी धाक जमाए बैठे हैं। आसमानी झूला से लेकर ब्रेक डांस व दूसरे तमाम तरह के मनोरंजन के साधन व खेल-खिलौना से सजी दुकानें खुल भी गई हैं। मेले को लेकर दर्जनों व्यापारी सीतामढ़ी पहुंच चुके हैं। तरह-तरह की दुकानों के क्रम में कोई व्यापारी खिलौने की दुकान तो कोई काष्ठ सामग्री और कोई मौत का कुआं तथा मीना बाजार व खाने-पीने की सामग्री तिलकुट, मसका, चाट व गोलगप्पे की दुकान लगा कर ग्राहकी करने में व्यस्त है। इस मेले के दौरान गांवों और हाट-बजारों की प्रसिद्ध मिठाई तेल वाली जलेबी से लेकर झिल्ली की बिक्री यहां बड़े पैमाने पर हो रही है। जबकि इस मेले में मसका, परम जैसे ठेठ देहाती मिठाई और फल की भी जबरदस्त बिक्री जारी है। यह सारी चीजें मेले में अभी भी अपनी उपस्थिति बना रही है।