
फिश क्रॉप क्रांति: नवादा के शिवम कुमार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराया परचम
नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड स्थति एक छोटे से गांव अड़सनियां के रहने वाले शिवम कुमार ने अपनी प्रतिभा और नवाचार के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड स्थति एक छोटे से गांव अड़सनियां के रहने वाले शिवम कुमार ने अपनी प्रतिभा और नवाचार के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में घोषित आईडीएस यान इंटरनेशनल इनोवेशन कम्पटीशन 5.0 के परिणामों में शिवम कुमार की टीम ने देश-विदेश की कई टीमों को पछाड़ते हुए तृतीय स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें 75,000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया है। उन्होंने फिश क्रॉप तकनीक के क्षेत्र में नवाचार कर अपनी प्रतिभा का लोह मनवा लिया है। उनके तकनीक की भूरि-भूरि प्रशंसा खुले मंच से की गयी, जिसे शिवम अपनी थाती मानते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता का पहला और दूसरा इनाम नासिक जैसे मेट्रो सिटी के प्रतिभागियों को मिला, जबकि तीसरा पुरस्कार बिहार राज्य के नवादा निवासी शिवम की झोली में आई। फिश क्रॉप तकनीक है नए जमाने की सोच वर्तमान में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल से सॉइल साइंस एंड एग्रीकल्चर केमिस्ट्री में एम.एससी. में अंतिम वर्ष के छात्र रहे शिवम कुमार ने फिश क्रॉप नामक एक अनूठी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक भविष्य की खेती के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। इसकी मुख्य विशेषताएं यह है कि इस विधि में मिट्टी, रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों की आवश्यकता बिल्कुल ही नहीं होती। बिना मिट्टी और रसायनों की खेती का दोहरा लाभ भी है। इसमें नीचे तालाब या पानी के टैंक में मछली पालन किया जाता है और उसके ऊपर विशेष तकनीक से सब्जियां या फसलें उगाई जाती हैं। इससे बंजर भूमि का सदुपयोग भी संभव है। शिवम बताते हैं कि यह तकनीक उन इलाकों के लिए वरदान है, जहां जमीन खेती योग्य नहीं है। इसके जरिए बंजर भूमि पर भी जैविक फसलें उगाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि यह तकनीक कम लागत से अधिक आय प्राप्त करने वाली है। किसान केवल एक बार पूंजी लगाकर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। बढ़ती जनसंख्या और घटती जमीन का समाधान शिवम बताते हैं कि भारत की बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती योग्य भूमि कम हो रही है क्योंकि जमीन का उपयोग घर, स्कूल और फैक्ट्रियां बनाने में हो रहा है। उनकी फिश क्रॉप तकनीक इसी समस्या का समाधान है, जो कम जगह में शुद्ध और ऑर्गेनिक भोजन उपलब्ध कराती है। उपलब्धियों का सफर रहा है अब तक काफी बेहतर शिवम की यह पहली सफलता नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी मेधा का प्रदर्शन किया है। अंतरराष्ट्रीय कॉम्पटीशन शोध शिखर 2022 में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले शिवम युक्ति इनोवेशन नेशनल कॉम्पटीशन में तीन लाख रुपए की इनाम की राशि प्राप्त कर चुके हैं। शिवम ने फिश क्रॉप के अलावा स्मार्ट सोलर साइकिल तथा पोमैटो यानी पोटैटो अर्थात आलू व टोमैटो अर्थात टमाटर की संयुक्त खास नस्ल एवं ब्रिपोमैटो की बैंगन, आलू व टमाटर की संयुक्त नस्ल जैसे कई अन्य रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर भी सफल काम कर चुके हैं। उनके पिता गणेश सिंह पुत्र की इस उपलब्धिक पर फूले नहीं समा रहे हैं, जबकि उनका पूरा गांव आज शिवम की इस वैश्विक सफलता पर गर्व कर रहा है।

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