संकट : शहर के तीन नंबर बस पड़ाव पर है सुविधाओं का घोर अभाव
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर के तीन नंबर बस स्टैंड में सुविधाओं का घोर अभाव है। इस बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं की नितांत कमी है।

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर के तीन नंबर बस स्टैंड में सुविधाओं का घोर अभाव है। इस बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं की नितांत कमी है। न तो यहां पर्याप्त बैठने की जगह है और न ही साफ-सुथरा वातावरण ही है। आवश्यक बुनियादी ढांचे भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। बस पड़ाव संख्या तीन पर एक पुराना जर्जर हाल यात्री शेड है, जिसका इस्तेमाल करने यात्रीगण बचते हैं। शौचालय की व्यवस्था किसी हद तक ठीक कही जा सकती है लेकिन यहां पर स्थित सिर्फ एक चापाकल रहने से पेयजल का संकट बरकरार है। गर्मी में आम यात्री पानी खरीद कर पीने को बाध्य रहते हैं।
तीन नंबर बस पड़ाव का हाल इतना बुरा है कि किसी प्रकार की यात्री सुविधा के नितांत अभाव के कारण हर घड़ी मुश्किलों से सामना करने की नौबत यात्रियों के सामने रहती है। परेशानी यह भी है कि स्टैंड के बाहर निकल कर सड़कों पर यात्री बसों व अन्य वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो कर रह गयी है। हाल यह है कि नवादा रेलवे क्रॉसिंग से लेकर बस पड़ाव स्थित दुर्गा मंदिर के आगे तक शहर वासी के यहां की अव्यवस्था कष्टकारी बन कर रह गयी है। बस स्टैंड में किराया तालिका तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अंजान यात्रियों से मनमाना किराया वाहन संचालकों और बस एजेंटों के द्वारा वसूला जाता है और आम यात्री आर्थिक दोहन के शिकार होते हैं। सुविधाओं का अभाव, यात्रियों पर पड़ रहा है भारी नवादा के तीन नंबर बस स्टैंड में यात्रियों को पर्याप्त बैठने की जगह यात्री शेड के अलावा भी कहीं नहीं है। आम यात्रियों को खड़े रह कर समय बिताना पड़ता है। अनेक यात्री अपने लगेज पर ही टिक कर खड़े दिख जाते हैं अथवा छोटे बच्चों को बैग या अटैची पर बिठा कर रखते हैं। इन हालातों में बस की प्रतीक्षा करते हुए बड़ों को कभी इस पैर तो कभी उस पैर पर अपने आप को एडजस्ट करने की नौबत बनी रहती है। इस हाल में लोग किसी होटल में या दुकान के आसपास खड़े रहते हैं। यहां बैठने की शर्त यही है कि कुछ खाना-पीना पड़ेगा। सिर्फ बैठने की जरूरत की पूर्ति के लिए होटल में खाना-पीना न सिर्फ यात्रियों के लिए पॉकेट पर भारी पड़ता है, बल्कि उनकी सेहत के लिए कष्टकारी साबित होता है। यहां आसपास तक कतई साफ-सुथरा वातावरण नहीं है, जो अलग ही परेशानी का सबब बना रहता है। अकेला यात्री फिर भी मैनेज कर लेता है लेकिन महिलाओं तथा परिवार के साथ रहने वाले यात्री यहां की परेशानी देख कर अपना सिर धुनने को बाध्य हो जाते हैं। पर्याप्त जगह की कमी, स्वच्छता का संकट बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, जिससे उन्हें परेशानी होती ही है जबकि बस पड़ाव का क्षेत्रफल भी काफी कम है। बसों व अन्य वाहनों की संख्या के लिहाज से यहां पर्याप्त जगह का अभाव काफी खटकता है। यात्री घनत्व अलग ही परेशानी का सबब बना पड़ा रहता है। यात्री घनत्व के कारण स्च्छता की कमी का खामियाजा भुगतना भी काफी भारी पड़ जाता है। छोटे से बस पड़ाव में बड़ी संख्या में बसें खड़ी रहती हैं तो यात्री उनके बीच से जैसे-तैसे आने-जाने को बाध्य रहते हैं और इस दरम्यान बस स्टैंड पर पसरी गंदगी और कचरा पूरे वातावरण को जहां अस्वच्छ बनाए रहता है, वहीं आम यात्रियों को दुर्गंध और गंदगी झेलने को भी बाध्य रखता है। नगर परिषद के कर्मियों की लापरवाही का जीता-जागता नमूना यह बस पड़ाव बन कर रह गया है। ले-दे कर पूरे साल भर में बस विश्वकर्मा पूजा के समय बस संवाहकों, चालकों और बस कर्मियों द्वारा बस पड़ाव की सफाई अपने स्तर से करायी जाती है, जो बस दो-चार दिन के लिए ठीकठाक रह पाती है। इसके बाद वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन जाती है। आधारभूत सुविधाओं का अभाव है कष्टकारी तीन नंबर बस स्टैंड पर आधारभूत सुविधाओं का अभाव बेहद कष्टकारी साबित हो रहा है। पीने के पानी, कम संख्या में उपलब्ध शौचालय, मूत्रालय का अभाव और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों को जो कठिनाई पड़ती है, उसका समाधान निकाले जाने पर किसी का ध्यान नहीं है। इन कमियों के कारण, यात्रियों को इस बस पड़ाव पर अपना समय बिताना मुश्किल हो जाता है और यह उनके लिए भारी परेशानीदायक साबित होती है। एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन यहां बस कर्मियों का ही जमावड़ा लगा रहता है। कोई स्नान आदि से निपट रहा होता है तो कोई बस आदि ही धोने में भिड़ा रहता है। आम यात्रियों के लिए यहां तक जा पाना ही संभव नहीं हो पाता है, जबकि महिलाओं के लिए इस सार्वजनिक शौचालय का उपयोग कर पाना और भी दुष्कर कार्य साबित होता है। मजबूरन कई लोगों को किसी दुकान की आड़ में पेशाब आदि करने की मजबूरी रहती है, जिससे यहां गंदगी का अम्बार भी हलकान करने वाली स्थिति तक पहुंच चुकी है। साफ-सफाई तो सिरे से नदारद है और इस कारण परेशानी दोहरी हो कर रह गयी है। -------------------- यात्रियों की व्यथा: तीन नंबर बस पड़ाव पूरी तरह से परेशानी का पर्याय बन कर रह गया है। कोई यात्री शेड अथवा बैठने की जगह उपलब्ध नहीं रहना, यात्रियों के लिए बेहद मुश्किलों भरा साबित होता है। शौचालय और पेयजल का संकट अलग ही बेहद भारी पड़ता है। - परमानन्द कुमार, मिर्जापुर, यात्री। शहर स्थित अत्यंत व्यस्त तीन नंबर बस पड़ाव राजस्व उपार्जन का बेहद मजबूत साधन है लेकिन इसके विपरीत सुविधाओं का नितांत अभाव है। यात्रियों की सुविधाओं का किसी भी स्तर पर ध्यान नहीं रखा गया है। नगर परिषद की पहल होनी चाहिए। - भूषण सिंह, कौआकोल, यात्री। तीन नंबर बस पड़ाव नवादा जिले के रोह, पकरीबरावां, कौआकोल समेत जमुई जैसे जिले के यात्रियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस कारण यहां यात्रियों की आवाजाही बड़ी संख्या में होती है। लेकिन यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने पर किसी का ध्यान नहीं है। - अनिल प्रसाद, गढ़पर, यात्री। तीन नंबर बस स्टैंड की स्थिति काफी नारकीय बनी रहती है। यहां आने वाला यात्री तत्काल वाहन पकड़ कर निकल भागने की फिराक में रहता है। यहां रूकना किसी सजा से कम नहीं है। किराया भी मनमाना वसूला जाना परेशानी दायक है। इस पर अंकुश जरूरी है। - मो. सिकंदर, रसूल नगर, यात्री। ------------------------ अंतरजिला बस पड़ाव है तीन नंबर बस स्टैंड नवादा। जिला मुख्यालय स्थित तीन नंबर बस स्टैंड अंतरजिला बस पड़ाव की हैसियत रखता है। यहां से जिला अंतर्गत कई प्रमुख प्रखंड मुख्यालयों रोह, पकरीबरावां, वारिसलीगंज, काशीचक, कौआकोल आदि के लिए बसें खुलती हैं, जबकि यहां से जमुई, शेखपुरा, मुंगेर आदि जिलों के लिए भी बसें खुलती हैं। कनेक्टिविटी की बात की जाए तो यह बस पड़ाव देवघर से लेकर भागलपुर तक के लिए जुड़ाव का कार्य करती है। इस बस पड़ाव के समीप ही नवादा रेलवे स्टेशन का होना बेहद अधिभार वाला साबित होता है। ऐसे में यात्री सुविधाओं की आवश्यकता सबसे अधिक इसी बस पड़ाव के लिए है, लेकिन दुर्भाग्य से सबसे ज्यादा अनदेखी इसी बस पड़ाव की हो रही है। निराशा का आलम यह है कि शाम के बाद से इस बस पड़ाव से यात्रा करना लोग मुनासिब तक नहीं समझते हैं, जबकि नवादा स्टेशन पर उतरने वाले अनेक लोग देर-सबेर इसी के भरोसे यहां तक पहुंचते हैं और निराशा के साथ लौटने को बाध्य होते हैं। शाम के बाद यहां सामान्य रूप से रौशनी तक की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में कोई भी शाम ढलने से पूर्व ही यहां से बस पकड़ लेना चाहता है अथवा उसकी कोशिश रहती है कि यहां से वापस ही लौट जाया जाए। अनेक लोग इस बस पड़ाव से देर शाम तक बसों के नहीं खुलने की व्यवस्था रहने के कारण अधिक पैसे दे कर होटल आदि में ठहरने को मजबूर होते हैं, अथवा अपने किसी परिचित के घर जाने का रास्ता चुनते हैं। एक रात के अनावश्यक ठहराव के बाद ही वह अगली सुबह बस पड़ाव से खुलने वाली बसों का सहारा लेकर अपने गंतव्य तक का सफर पूरा कर पाते हैं। ऐसे में आम यात्रियों ने इस बस पड़ाव के महत्व को समझते हुए ज्यादा से ज्यादा सुविधाजनक बनाने की मांग सक्षम पक्षों से की है, ताकि दिन हो या रात इस बस पड़ाव का लाभ उठाया जा सके।
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