Robbery on the grain of the poor department silent - गरीबों के अनाज पर पड़ रहा डाका, विभाग मौन DA Image
14 दिसंबर, 2019|1:51|IST

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गरीबों के अनाज पर पड़ रहा डाका, विभाग मौन

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जिले में गरीबों के अनाज की लूट मची है। जन वितरण प्रणाली की दुकानें लूट-खसोट का अड्डा बनी है। गरीबों को मिलने वाले अनाज की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है, लेकिन प्रशासन के आला अधिकारी मामले पर चुप्पी साधे हैं। ऐसे में पीडीएस डीलरों की मनमानी चरम पर है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने रोह प्रखंड की सिउर पंचायत के पीडीएस डीलरों से इस सिस्टम की पोल-खोल शुरू की है। इसी कड़ी में हिन्दुस्तान टीम हाल के दिनों में जिले के सीमावर्ती प्रखंड सिरदला की बांधी पंचायत स्थित चपरी गांव पहुंची और ग्रामीणों से जन वितरण प्रणाली में मिलनेवाले राशन-किरासन का हाल जाना। जन वितरण प्रणाली की पड़ताल में कई खुलासे हुए। इस दौरान आपूर्ति विभाग की कई खामियां निकल कर सामने आयी। आलम यह है कि अधिकारियों की मिलीभगत से डीलरों का हौसला चरम पर है और गरीब, वंचित परिवारों का खुलेआम शोषण हो रहा है। जबकि गांव के लोगों ने तीन सितंबर को रजौली एसडीओ को आवेदन देकर अनाज नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई है।

खाद्यान्न उत्सव में नहीं मिला अनाज

बांधी पंचायत के चपरी गांव में शिवनंदन प्रसाद, लाइसेंस नंबर 375/09 के तहत ग्रामीणों को अनाज उपलब्ध कराते हैं। रूबी देवा, शैला देवी, दीपू कुमार, सुरेश प्रसाद, रामलखन प्रसाद, शंकर यादव, सूमा देवी, मीना देवी, देवंती देवी सहित करीब 40 ग्रामीणों ने बताया कि खाद्यान्न उत्सव के दौरान पीडीएस डीलर दुकान नहीं खोलता है। लोगों ने बताया कि खाद्यान्न उत्सव के दौरान एक से दो दिनों तक डीलर कुछ घंटे दुकान खोलकर अपने चहेते लाभुकों को अनाज बांट देता है, ताकि किसी तरह की जांच होने पर ये लाभुक अधिकारियों के समक्ष मनचाहा बयान दे सके, लेकिन गांव में बड़ी संख्या में लाभुकों को राशन-किरासन नहीं बांटा जाता। अगस्त महीने के राशन-किरासन नहीं बांटने की शिकायत की गयी। हालांकि कलेक्ट्रेट स्थित जनसंपर्क शाखा ने प्रेस विज्ञप्ति संख्या 800 के तहत डीएम कौशल कुमार के निर्देश का हवाला दिया था। इसके अनुसार, अगस्त महीने में 23 अगस्त से 31 अगस्त तक खाद्यान्न वितरण किया जाना था। 29 अगस्त से 31 अगस्त तक खाद्यान्न दिवस मनाने की बात थी। साथ ही छूटे हुए उपभोक्ताओं को 01 सितंबर से 07 सितंबर तक राशन किरासन बांटने की हिदायत थी, लेकिन डीएम के निर्देश के बावजूद पीडीएस डीलर ने ग्रामीणों को राशन-किरासन नहीं बांटा।

परिवार में जितने सदस्य, नहीं मिलता उतना अनाज

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत पूर्वविक्ता प्राप्त परिवार (प्रीऑरिटी हाउस होल्ड) के लिए सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। प्रीऑरिटी हाउस होल्ड (पीएचएच) के हरेक सदस्य को 5 किग्रा अनाज उपलब्ध कराना है, जिसमें 3 किग्रा चावल और 2 किग्रा गेहूं दिया जाना है, लेकिन सरकार का ये कानून बांधी पंचायत के चपरी ग्रामीणों के लिए लागू नहीं होता। गांव के पांचू शर्मा और राचो दवी के परिवार में 23 सदस्य है। देखा जाए, तो इनके हिस्से में 115 किग्रा अनाज आता है, लेकिन राचो देवी ने बताया कि पीडीएस डीलर उन्हें सिर्फ 10-15 किग्रा अनाज ही देता है। यही हाल कारू पासवान का है, 15 परिवार के सदस्य को मात्र 25 किग्रा अनाज डीलर देता है। सत्येन्द्र प्रसाद, संजय प्रसाद, शंकर यादव, रामरतन प्रसाद, चंदा राजवंशी जगदीश शर्मा सहित गांव के अधिकतर ग्रामीणों ने बताया कि उनके परिवारों के सदस्यों की निर्धारित संख्या के हिसाब से पीडीएस डीलर खाद्यान्न नहीं देता है।

दर्जनों लाभुकों के नाम सूची से उड़ाए

समाज के ऐसे परिवार जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना में दर्ज किया गया है। सरकार इन पूर्विविक्ता प्राप्त परिवारों को राशन-किरासन मुहैया कराती है। पड़ताल के दौरान ये बातें निकलकर आयी कि चपरी गांव में एसईसीसी में नामित कई ऐसे लाभुक भी हैं, जिन्हें पहले अनाज मिलता था, लेकिन पिछले कई महीनों से अनाज नहीं मिल रहा। लोगों ने बताया कि पीडीएस डीलर का कहना है कि सूची से उनका नाम कट गया है। सिरदला प्रखंड के एसईसीसी में दर्ज ब्लॉक उपखंड 277-01 के मिलान पर गृह संख्या-09 के बिन्देश्वरी प्रसाद, गृह संख्या 07 के राजेन्द्र प्रसाद, गृह संख्या 19 के रमेश प्रसाद, गृह संख्या 27 के रामावतार प्रसाद, गृह संख्या 28 के भागीरथ प्रसाद, गृह संख्या 30 के दिलीप प्रसाद सहित कई ऐसे ग्रामीण है, जिन्हें डीलर नाम विलोपित हो जाने का बहाना बनाकर अनाज नहीं दे रहे हैं। लेकिन इनके नाम एसईसीसी सूची में दर्ज पाए गये।

कम मिलता है अनाज, किरासन चार-पांच महीने में एक बार

ग्रामीणों ने बताया कि पीडीएस डीलर अनाज की पूरी कीमत लेने के बाद एक से दो किग्रा अनाज कम देता है, एक तो सदस्यों की संख्या के अनुपात में मिलनेवाले अनाज की कटौती तो होती है, साथ ही जो अनाज दिया जाता है, उसमें भी एक से दो किग्रा अनाज कम तौला जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि पीडीएस डीलर अनाज उठाव के दौरान प्रति बोरी कम अनाज मिलने की बात करके ग्रामीणों को भी कम अनाज देता है। लगभग सभी ग्रामीणों की शिकायत रही कि डीलर चार से पांच महीनों के बाद एक महीने डेढ़ से दो लीटर किरासन तेल देता है, लेकिन राशन कार्ड पर सभी महीनों की सूची दुरुस्त रखने में कोई कसर नहीं छोड़ा। लोगों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण बिजली की समस्या बनी रहती है। ऐसे में लोगों को किरासन उंचे दाम पर खरीद कर घरों को रौशन करना पड़ता है। कई गरीबों के घरों में तो शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता हैं।

जिले के एनआईसी पर पा सकते हैं जानकारी

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने मामले की गहराई तक पड़ताल की। जिला के एनआईसी वेब पोर्टल पर आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड को खंगाला गया। स्टैकहोल्डर आईडेंटिटी मैनेजमेंट सिस्टम में पब्लिक पोर्टल रिपोर्ट के तहत फेयर प्राईस शॉप वाइज रिपोर्ट में पेज नंबर 23 पर क्रमांक संख्या 1255 पर पीडीएस डीलर शिवनंदन प्रसाद पाए गए, जिनका लाइसेंस नंबर 375/07 मिला और दुकान संख्या 190100200457 पाया गया। इसके अनुसार, जनवितरण प्रणाली की इस दुकान पर बीपीएल 193, एएवाई(अंत्योदय योजना) 63 और एपीएल 162 लाभुकों को राशन किरासन बांटा जाना हैं। जनवितरण प्रणाली के इस दुकान पर कुल 418 लाभुक हैं, लेकिन मुश्किल से 50 से 75 लाभुकों को राशन किरासन बांटा जाता हैं।

विभाग के पास आंकड़े तक दुरुस्त नहीं

नवादा। जिला आपूर्ति शाखा के पास राशन किरासन संबंधित अद्यतन आकंडे़ तक उपलब्ध नहीं हैं। गुरुवार को विभाग में कई बार की भाग दौड़ के बाद भी सही से आंकड़े तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके। सुबह के साढ़े दस बजे से दोपहर के साढ़े तीन बजे तक विभाग में टालमटोल जारी रही है। इसके बाद राज्य सरकार के आपूर्ति विभाग से संबंधित आकंड़े जुटाए गए हैं। ऐसे में आम जनता सहज अंदाजा लगा सकती है कि दस्तावेजों तक उनकी पहुंच कितनी सुलभ होगी। राज्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जून 2014 में जिले के जनवितरण प्रणाली के दुकानों की संख्या 1213 हैं, जिनमें 1053 ग्रामीण क्षेत्रों में है, बाकी 160 दुकाने शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। हालांकि आंकडों के अनुसार इनमें 299 दुकान रिक्त हैं।

राज्य सरकार के खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर ने 08 अगस्त को पत्रांक संख्या 3682 के तहत अगस्त, 2019 के केरोसिन उपावंटन को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त और सभी जिला पदाधिकारी को पत्र जारी किया है। जिसके तहत नवादा जिले में नेशनल फूड सेक्यूरिटी एक्ट (एनएफएसए) के अंतर्गत आच्छादित ग्रामीण परिवारों की संख्या 2,55,420 हैं। साथ ही नॉन नेशनल फूड सेक्यूरिटी एक्ट ( नॉन एनएफएसए) के अंतर्गत आच्छादित ग्रामीण परिवारों की संख्या 94,318 हैं। जिलेभर में इतने परिवारों को राशन-किरोसिन बांटे जाने हैं।

शिकायतें पड़ती हैं भारी, बनती है उगाही का साधन

नवादा। उपभोक्ताओं की शिकायतें उन पर ही भारी पड़ती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि पीडीएस दुकानदारों की शिकायत अधिकारियों से की जाती है, तो यह भी कमाई की जरिया बन जाता है। विभागीय अधिकारी पीडीएस डीलरों को शिकायत पत्र दिखाकर आर्थिक दोहन करते हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। पीडीएस डीलर शिकायतकर्ताओं पर गाज गिराता है। आवेदन देने वाले उपभोक्ताओं पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई कर उन्हें अनाज देने के दौरान परेशान किया जाता है। साथ ही शिकायतकर्ताओं को कानूनी पचड़े में फंसाने की पूरी साजिश रची जाती है। फिलहाल चपरी गांव के लोग डीलर की काफी हद तक बढ़ गयी मनमानी के बाद बगावत पर उतर आए हैं। हालांकि ये सिर्फ चपरी गांव का ही मुद्दा नहीं है, बल्कि जिलेभर में गरीबों के अनाज की लूट-खसोट चरम पर है। जिले के अनाज माफिया गरीबों के अनाज की कालाबाजारी कर करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं। बावजूद जिले के जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी भ्रष्टाचार के इस खेल पर चुप्पी साधे हैं।

वर्जन

सिरदला प्रखंड की बांधी पंचायत के चपरी गांव के ग्रामीणों के आवेदन मिलने के बाद यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। डीलर द्वारा गरीबों को अनाज नहीं देने के मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आते ही दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - चंद्रशेखर आजार, एसडीओ, रजौली

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