रसोई तक पहुंची युद्ध की आंच, मसालों के दाम में भारी उछाल
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण नवादा के किराना बाजार में मसालों की कीमतों में 15 से 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे माल ढुलाई के खर्च में वृद्धि हुई है। स्थानीय लोग महंगाई को लेकर चिंतित हैं और सरकार से नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर आम आदमी की थाली तक पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की स्थितियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ नवादा के स्थानीय किराना बाजार को भी झकझोर दिया है। पिछले दो महीनों में, यानी युद्ध की सुगबुगाहट और शुरुआत से लेकर अब तक, नवादा के बाजारों में किराना सामग्रियों, विशेषकर मसालों की कीमतों में जो उछाल आया है, उसने मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। अमेरिका-ईरान के बीच छिड़ी इस जंग ने वैश्विक सप्लाई चेन यानी आपूर्ति शृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके मुख्य कारणों को लेकर बाजार के जानकार बताते हैं कि युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात पर असर पड़ा है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई के खर्च में 20% से 30% तक की वृद्धि हुई है। ट्रक संचालकों ने किराया बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर मसालों और अन्य किराना सामानों की लैंडिंग कॉस्ट पर पड़ रहा है। भारत कई महत्वपूर्ण मसालों और उनके कच्चे माल का आयात-निर्यात खाड़ी के रास्तों से करता है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ गया है और कई शिपमेंट बीच रास्ते में ही अटके हुए हैं।
मसालों की कीमतों में वृद्धि
दो माह में मसालों की कीमतों में 15 से 40 फीसदी की वृद्धि नवादा के पुरानी बाजार रोड स्थित किराना दुकान श्री श्याम ट्रेडर्स के संचालक अरविंद कुमार ने बताया कि पिछले दो महीनों में मसालों की कीमतों में 15% से लेकर 40% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। नवादा के खुदरा दुकानदार प्रवीण कुमार मिंटू बताते हैं कि पहले जो ग्राहक आधा किलो जीरा या मिर्च लेकर जाते थे, वे अब पाव भर या 100 ग्राम से काम चला रहे हैं। मसालों के थोक दाम बढ़ने से छोटे दुकानदारों का मुनाफा भी कम हो गया है। इधर, थोक मंडी में रोज नए भाव आ रहे हैं। ट्रांसपोर्टर कह रहे हैं कि डीजल महंगा हो गया है और बाहर से माल आने में देरी हो रही है। हम चाहकर भी पुरानी कीमतों पर सामान नहीं बेच सकते।
आम जनता पर बढ़ता ही जा रहा है बोझ
पार नवादा की एक गृहिणी उमा देवी का कहना है कि रसोई चलाना अब चुनौती बन गया है। सिर्फ मसाले ही नहीं, तेल आदि के दाम भी बढ़ गए हैं। युद्ध कहीं और हो रहा है, लेकिन उसकी मार हमारी जेब पर पड़ रही है। सरकार को जमाखोरों पर नकेल कसनी चाहिए ताकि कीमतें नियंत्रण में रहें। पार नवादा गांधी नगर की ही गृहिणी पूजा कुमारी कहती हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच का यह संघर्ष न जाने कितनी महंगाई दिखाएगा। नवादा के प्रशासन को चाहिए कि वे स्थानीय स्तर पर मूल्य निर्धारण की निगरानी करें ताकि आपदा के इस समय में कोई भी व्यापारी अनुचित लाभ न कमा सके। फिलहाल, जिले की जनता तो यही चाहती दुनिया में भी और अपने बजट में भी। ----------------- इनसेट मसाले की कीमतों का अंतर (रुपए प्रति किलो में): मसाले दो माह पूर्व की कीमत वर्तमान कीमत वृद्धि प्रतिशत जीरा (साबुत) 650 880 230 35% काली मिर्च (साबुत) 720 950 230 32% हल्दी (साबुत) 160 210 50 31% लाल मिर्च (तीखी) 240 330 90 37% इलायची (छोटी) 1800 2500 700 39% धनिया (साबुत) 120 155 35 29% लौंग 900 1250 350 38% (नवादा से राजेश मंझवेकर)
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