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धान क्रय : 20 दिनों में हो सकी है 127 एमटी धान की खरीद

धान क्रय : 20 दिनों में हो सकी है 127 एमटी धान की खरीद

संक्षेप:

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में धान क्रय शुरू हुए 20 दिन हो गए हैं। अब तक कुल 23 किसानों से 127 एमटी धान की खरीद पूरी कर ली गयी है। जिले के 143 पैक्स और 10 व्यापार मंडल के माध्यम से धान क्रय...

Dec 06, 2025 02:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में धान क्रय शुरू हुए 20 दिन हो गए हैं। अब तक कुल 23 किसानों से 127 एमटी धान की खरीद पूरी कर ली गयी है। जिले के 143 पैक्स और 10 व्यापार मंडल के माध्यम से धान क्रय किया जा रहा है। जिले में 15 नवम्बर से धान क्रय का आरम्भ हो चुका है। नमी की अधिकता के कारण धान खरीद की रफ्तार धीमी चल ही रही थी कि समिति अध्यक्षों और मिलरों के बीच ठन गयी और धान क्रय कुंद पड़ गया। काफी खींचतान के बाद सीधे संयुक्त निबंधक ने पहल की और तब जा कर शुक्रवार से दोबारा धान क्रय शुरू हो गया है।

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उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद धान क्रय का अपेक्षित गति मिल सकेगी। सामान्यत: नवादा जिले में 15 दिसम्बर से ही धान खरीद संभव हो पाती है क्योंकि इससे पूर्व धान में सामान्यत: 21 फीसदी तक नमी बनी रहती है। कुल मिला कर अभी तक सांकेतिक रूप से ही अभियान चल रहा था। लेकिन तमाम बाधाओं के खत्म हो जाने के बाद अब खरीदारी तेज होने की पूरी उम्मीद सहकारिता विभाग को है। जिले में इस वर्ष धान की बम्पर पैदावार हुई है, इसलिए सरकारी खरीद को लेकर बेहतरी की पूरी उम्मीद है। समिति अध्यक्ष और मिलरों की खींचतान से रही बाधा धान क्रय शुरू होने के तुरंत बाद ही समिति अध्यक्षों और मिलरों के बीच कुछ विवाद खड़े हो गए। समिति अध्यक्षों की शिकायत थी कि मिलर 100 किलो की जगह 105 किलो धान लेते हैं। जबकि 20 रुपए प्रति क्विंटल की जगह 100 रुपए प्रति क्विंटल का दर वसूलते हैं। इस विवाद के बाद सभी पैक्स और व्यापार मंडल के अध्यक्षों ने गोलबंद हो कर धान की खरीदारी बंद कर दिया, जबकि मिलरों से मिलिंग कराना ही रोक दिया। चूंकि इस विवाद के कारण धान क्रय अभियान बुरी तरह से प्रभावित होने लगा था, जिसके बाद संयुक्त निबंधक ने निजी स्तर पर पहल की और दोनों पक्षों में सुलह कराया। अब जा कर शुक्रवार से धान क्रय फिर से शुरू हो गया है। एक मिलर किया गया ब्लैकलिस्टेड उल्लेखनीय है कि इस विवाद के बीच ही जिले के एक मिलर महावीर राइस मिल को असहयोग व मनमाने रवैए पर ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। इस संबंध में जानकारी देते जिला सहकारिता पदाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि एक तरफ विभाग संबंधित विवाद को समाप्त कर धान क्रय की बाधा खत्म करने को लेकर प्रयासरत रहा, दूसरी तरफ उक्त मिलर का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा। इस कारण मिलर के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गयी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धान क्रय अभियान को जिस भी तत्व या पक्ष द्वारा बाधा पहुंचेगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी स्तर पर किसी भी प्रकार दोहन स्वीकार नहीं होगा। ----------------------- धान में अधिक नमी की समस्या से अब भी है परेशानी नवादा। धान की कटाई के तुरंत बाद उसमें नमी की मात्रा सरकारी मानकों के अनुसार 17 प्रतिशत या उससे कम होनी चाहिए, लेकिन यह इस से अभी भी अधिक बनी हुई है। किसान धान को सुखाने के लिए समय ले रहे हैं, ताकि बाद में नमी के नाम पर रिजेक्शन का सामना न करना पड़े। इधर, सरकारी पंजीकरण की प्रक्रिया में अभी किसान लगातार जुटे दिख रहे हैं। सभी कागजी कार्रवाई व ऑनलाइन पंजीकरण तथा सत्यापन आदि की प्रक्रिया पूरी करने में लगने वाला समय अब समाप्ति पर है। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे लेने के बाद स्वत: धान बेचने को लेकर किसानों में तत्परता रहेगी। उल्लेखनीय है कि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य साधारण धान का 2369 रुपए प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-1 धान की दर 2389 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। ----------------------- लक्ष्य पाने को प्रशासनिक पहल में आई तेजी नवादा। अभी जिले में धान क्रय का लक्ष्य गत वर्ष के अनुकूल 1.20 लाख एमटी का रखा गया है। जिला सहकारिता विभाग द्वारा सभी पैक्स और व्यापार मंडलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को धान बेचने में किसी भी तरह की परेशानी न होने दें। डीसीओ ने कहा कि सभी क्रय केंद्रों पर धान मापक यंत्र (नमी मापने वाला), बोरियां और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध करा देने के बाद धान क्रय में तेजी बरतने का निर्देश दिया गया है। पंजीकरण करा चुके किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा है कि किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, उनका पूरा धान खरीदा जाएगा और भुगतान सीधा उनके बैंक खाते में किया जाएगा। जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि पैक्स और व्यापार मंडल अपनी क्रय क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, नमी की जांच में लचीला रुख अपनाते हुए किसानों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे जल्द से जल्द अपने धान को केंद्र तक पहुंचा सकें।