
रजौली : प्रखंड में अबतक धान खरीदारी की प्रक्रिया नहीं हुई शुरू
रजौली प्रखंड में धान की कीमतें निर्धारित होने के बावजूद धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जिले से लक्ष्य नहीं मिला है, जबकि पैक्स अध्यक्ष मिलरों की मनमानी से नाराज हैं और हड़ताल की चेतावनी दे रहे हैं। किसान उचित मूल्य की उम्मीद में परेशान हैं।
रजौली, निज संवाददाता सरकार द्वारा धान की कीमतें निर्धारित किए जाने के बावजूद रजौली प्रखंड में धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। एक तरफ जहां अधिकारी जिले से लक्ष्य न मिलने का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पैक्स अध्यक्षों ने मिलरों की मनमानी से तंग आकर हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे दी है। इस असमंजस के बीच किसान अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी आदेश की बाट जोह रहे हैं या फिर बाजारों में औने-पौने दाम में बेचने पर मजबूर हो रहे हैं, क्षेत्र में अभी धान की कटनी भी पूरी तरह से संपन्न नहीं हुई है, इसके अलावा, सरकारी मानक के अनुसार धान अधिप्राप्ति के लिए फसल में नमी की मात्रा 17% होनी चाहिए, जो अभी मानकों के अनुरूप नहीं है।
नमी ज्यादा होने के कारण अभी खरीद संभव नहीं है। सरकार ने इस वर्ष साधारण धान के लिए 2369 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई है। इस संबंध में प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग को अब तक जिले से धान अधिप्राप्ति का कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है, लक्ष्य मिलते ही नियमानुसार प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। जबकी रजौली पूर्वी पंचायत के पैक्स अध्यक्ष अनिल कुमार ने जब एक किसान से धान खरीद की तो पैक्स संघ में विरोध उत्पन्न हो गया। क्यों नाराज हैं पैक्स अध्यक्ष :- पैक्स अध्यक्षों की नाराजगी की मुख्य वजह पिछले साल का अनुभव है। संघ का कहना है कि पिछली बार धान अधिप्राप्ति के बाद मिलरों (राइस मिल मालिकों) द्वारा उन्हें काफी परेशान किया गया था। समय पर चावल तैयार न करने और अन्य तकनीकी पेच फंसाने के कारण पैक्स अध्यक्षों को आर्थिक और मानसिक दवाब झेलना पड़ा था। प्रखंड के 15 पैक्स अध्यक्षों ने दो टूक कहा है कि जब तक मिलरों की मनमानी पर लगाम नहीं लगती और उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं होता, वे धान की खरीदारी का बहिष्कार करेंगे। शादी के सीजन में किसानों पर गहरा संकट फिलहाल, अधिकारियों के लक्ष्य के इंतजार और पैक्स अध्यक्षों की हड़ताल के बीच रजौली का आम किसान पिसता नजर आ रहा है। जिसे अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में अभी और वक्त लग सकता है। फिलहाल रजौली में धान खरीद तीन चुनौतियों के बीच फंसी है। इनमें नमी का 17% वाला मानक, जिले से लक्ष्य का न मिलना और पैक्स-मिलर विवाद है। इन सब के बीच किसान यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे अपनी फसल को खलिहान में रखें या मंडी की राह देखें, जहां पर व्यवसायी उनसे औने-पौने दाम पर धान की खरीद कर अपनी मुनाफा अर्जित कर सकें। हालांकि शादियों का सीजन भी चालू हो गया है, जिससे किसानों के समक्ष बाजारों में अपने धान बेचने की मजबूरी उत्पन्न है, अगर जल्द ही इसका निराकरण नहीं किया गया तो किसान दलालों के चक्कर में पड़कर अपनी अच्छी खासी मुनाफे को गवा सकते हैं।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




