Nawada News: जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में भी अब होगा मछली का उत्पादन
Nawada News: नवादा जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में मत्स्य पालन की नई योजना शुरू की गई है। जल संकट और भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए पांच जलाशयों का निर्माण कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सशक्त बनाना और मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

Nawada News: जिले के पथरीले और पहाड़ी क्षेत्रों में अब मत्स्य पालन की नई क्रांति देखने को मिलेगी। पानी की किल्लत और भौगोलिक चुनौतियों से जूझने वाले इन इलाकों में जल जीवन और आजीविका के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। राज्य सरकार की विशेष योजना के तहत नवादा जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पांच जलाशयों का निर्माण कराया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और मछली उत्पादन में जिले को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना है।
योजना का कार्यान्वयन
जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुमार कुंदन ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए जिले के पहाड़ी प्रखंडों कौआकोल, रजौली, गोविंदपुर और सिरदला आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मगध प्रमंडल के मत्स्य उपनिदेशक द्वारा प्राप्त आवेदनों की गहन जांच के बाद अंतिम रूप से 05 लाभुकों का चयन कर लिया गया है। चयनित लाभुकों में सिरदला प्रखंड के 04 और रजौली प्रखंड का 01 आवेदक शामिल है। योजना के तहत प्रति इकाई लागत:10.34 लाख रुपये निर्धारित जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी नंदन कुमार ने बताया कि यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति संवर्ग के आवेदकों के लिए संचालित की जा रही है। योजना के तहत प्रति इकाई लागत:10.34 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सरकारी अनुदान के प्रावधान के तहत राज्य सरकार द्वारा कुल लागत पर 80 फीसदी का भारी अनुदान दिया जा रहा है। लाभार्थी को कुल लागत की महज 20 फीसदी राशि ही लगानी होगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए इस व्यवसाय से जुड़ना बेहद आसान हो जाएगा।
स्वास्थ्य और जल आपूर्ति
निजी या लीज की भूमि पर स्थापना योजना के मानकों के अनुसार, प्रत्येक इकाई की स्थापना 0.4 एकड़ जल क्षेत्र में की जानी है। जिन आवेदकों के पास अपनी निजी भूमि नहीं है, उनके लिए भी योजना में विकल्प रखा गया है। आवेदक लीज यानी किराए पर भूमि लेकर भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इससे भूमिहीन या कम भूमि वाले एससी वर्ग के किसान भी मत्स्य पालन के इस प्रोजेक्ट से जुड़ पा रहे हैं। साल भर पानी के लिए सोलर पंप सेट का मिलेगा सहारा पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मियों के दिनों में अक्सर जल स्रोत सूख जाते हैं और जलस्तर नीचे चला जाता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी पांचों जलाशयों में सालों भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सोलर पंप सेट स्थापित किए जाएंगे। सौर ऊर्जा आधारित इन पंपों की मदद से बारिश न होने या सूखे के मौसम में भी जलाशयों में पर्याप्त पानी भरा रहेगा। इससे न सिर्फ बिजली पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि बिना किसी अतिरिक्त डीजल या बिजली खर्च के मछलियों का बेहतर विकास संभव हो सकेगा।
सुविधाएं और रोजगार
------------------- मत्स्य पालकों को तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर होंगे उपलब्ध नवादा। मत्स्य पालकों को नए तालाब के साथ ही तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होंगे। इसके तहत बिजली पर निर्भरता खत्म करने और सालों भर विशेष रूप से गर्मियों में तालाबों में पानी का जलस्तर बनाए रखने के लिए सोलर पावर से चलने वाले मोटर पंप लगाए जाएंगे। पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा का संतुलन बनाए रखने और मछलियों के त्वरित विकास के लिए एरेटर मशीनें स्थापित की जाएंगी। जलाशयों के किनारे निर्बाध संचालन के लिए बोरिंग कराई जाएगी तथा उपकरण व दाना यानी फीड सुरक्षित रखने के लिए एक कमरे का निर्माण भी किया जाएगा। रात के समय जलाशयों की निगरानी और सुरक्षा के लिए सोलर पैनल और लाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था रहेगी। इन सुविधाओं से मछली पालन को लेकर न केवल सूखे की आशंका दूर होगी, बल्कि गुणवत्तापूर्ण मछली उत्पादन में भी कई गुना वृद्धि होगी।
आर्थिक लाभ और विकास
--------------------- स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर नवादा। जिले में इस अनूठी पहल से पहाड़ी इलाकों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। अब तक जिन क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण खेती या मत्स्य पालन असंभव माना जाता था, वहां सोलर तकनीक और सरकारी अनुदान के बल पर उत्पादन शुरू होने जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पलायन पर रोक लगेगी और बाजार में ताजा मछली की आवक बढ़ने से जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ---------------------- वर्जन: योजना से जिले के पठारी व पहाड़ी क्षेत्र में मछली उत्पादन की राह आसान हो गयी है। इससे गुणवत्तापूर्ण मछली का उत्पादन तो बढ़ेगा ही, साथ ही रोजगार के भी अवसर उपलब्ध होंगे। सबसे अहम तो यह है कि जिनके पास अपनी जमीन नहीं है, वह भी लीज पर लेकर योजना का लाभ उठा रहे हैं। नवादा जिला मछली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बने, इस योजना उद्देश्य यही है। - मनीष कुमार कुंदन, जिला मत्स्य पदाधिकारी, नवादा। (नवादा से राजेश मंझवेकर)


