माह रमजान में मालिक-ए-हकीकी से सभी मांग रहे गुनाहों की माफी
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।साल भर के इस्लामी महीनों में सबसे अफजल और फजीलत वाला महीना रमजान-उल-मुबारक पूरे अकीदत और एहतराम के साथ जारी है।

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। साल भर के इस्लामी महीनों में सबसे अफजल और फजीलत वाला महीना रमजान-उल-मुबारक पूरे अकीदत और एहतराम के साथ जारी है। यह वह मुकद्दस महीना है, जो न केवल बंदे को अपने मालिक-ए-हकीकी के करीब ला रहा है, बल्कि समाज में इंसानियत और हमदर्दी का पैगाम भी दे रहा है। सभी अपने गुनाहों की माफी के लिए शिद्दत से जुटे हैं। नेक अमल और इबादतों का दौर की जानकारी देते हुए इस्लामिक स्कॉलर, शिक्षाविद सह प्रसिद्ध शायर रेजा तस्लीम ने बताया कि रमजान के इस रूहानी दौर में हर नेक अमल का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
जिले के तमाम मस्जिदों और घरों में इबादतों का सिलसिला जारी है। लोग सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कड़े अनुशासन के साथ रोजा रख रहे हैं। यह सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह नफ्स (स्वयं) को तमाम बुराइयों से रोकने और संयम बरतने का सबसे बड़ा जरिया है। सभी नमाज, कुरान की तिलावत और तरावीह के जरिए अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं। सेवा और सद्भावना की मिसाल रेजा तस्लीम ने बताया कि रमजान का यह महीना हमें गरीबों और बेसहारों का सहारा बनना सिखाता है। जिले भर में लोग बढ़-चढ़कर दान-पुण्य जकात और खैरात कर रहे हैं, ताकि समाज का कोई भी तबका खुशियों से वंचित न रहे। इस के साथ ही, सभी जिले की प्रगति और शांति के लिए दुआ कर रहे हैं। इस पाक मौके पर जिले के तमाम बाशिंदों के लिए दिली दुआएं मांगने का सिलसिला जारी है। उन्होंने बताया कि इस पाक मुकद्दस मौके को लेकर स्थानीय लोगों का मानना है कि इस महीने की बरकत से हमारे जिले में प्यार, मोहब्बत, अमन और शांति हमेशा कायम रहेगी। सभी ने कहा कि अल्लाह से यही दुआ है कि वह सभी को खूब तरक्कियों से नवाजे और हमारा जिला प्रगति की राह पर हमेशा आगे बढ़ता रहे। इस्लामिक स्कॉलर रेजा तस्लीम ने जोर दे कर कहा कि रमजान का यह पवित्र महीना हमें अनुशासन, धैर्य और आपसी भाईचारे की सीख देता है, जिससे न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि पूरा समाज रोशन होता है। ---------------------- तक्वा और आत्म-शुद्धि का मार्ग है रमजान नवादा। रमजान का असल मकसद तक्वा यानी परहेजगारी हासिल करना है। रेजा तस्लीम ने बताया कि यह महीना केवल खान-पान के त्याग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंखों, जुबान और विचारों की पाकीजगी का नाम है। जब एक रोजेदार चिलचिलाती धूप और प्यास के बावजूद पानी की एक बूंद को भी हाथ नहीं लगाता, तो वह असल में अपने धैर्य (सब्र) का इम्तिहान दे रहा होता है। यह आत्म-संयम उसे साल के बाकी ग्यारह महीनों में भी नेक राह पर चलने की ताकत देता है। उन्होंने बताया कि नवादा जिले की गंगा-जमुनी तहजीब रमजान के दौरान और भी निखर कर सामने आती है। इफ्तार की दस्तरखान पर जब विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ बैठते हैं, तो वह दृश्य आपसी सद्भाव की सबसे खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। यह महीना हमें यह एहसास दिलाता है कि भूख और प्यास का कोई मजहब नहीं होता, और मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है। ------------------------- आधुनिक दौर में रूहानी सुकून नवादा। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के बीच, रमजान का महीना एक रूहानी ब्रेक की तरह आता है। तरावीह की नमाजों में घंटों खड़े रहना और रात के आखिरी पहर में सहरी के लिए जागना, इंसान को अनुशासन और समय की अहमियत सिखाता है। रेजा तस्लीम ने विशेष संदेश देते हुए दुआओं के साथ कहा कि जिले का हर घर खुशहाली से महके क्योंकि यह महीना हमें नफरतों को मिटाकर मोहब्बत बांटने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है।
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