
3.30 लाख मतदाता तय करेंगे रजौली विधानसभा की तकदीर
नवादा। राजेश मंझवेकर राजनीतिक नजरिए से रजौली विधानसभा क्षेत्र इन दिनों खूब चर्चा में है। राहुल गांधी की यात्रा के दरम्यान ही तेजस्वी यादव द्वारा राजद के निवर्तमान विधायक प्रकाशवीर का टिकट कट जाने की...
नवादा। राजेश मंझवेकर राजनीतिक नजरिए से रजौली विधानसभा क्षेत्र इन दिनों खूब चर्चा में है। राहुल गांधी की यात्रा के दरम्यान ही तेजस्वी यादव द्वारा राजद के निवर्तमान विधायक प्रकाशवीर का टिकट कट जाने की घोषणा महज एक समर्थक की मांग पर कर दिए जाने के बाद से यह सीट लाइमलाइट में है। रजौली विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,30,377 मतदाता हैं, जो नए चुनावी समीकरणों के लिहाज से और भी अहम बन गया है। पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,72,128, महिला मतदाताओं की संख्या 1,58,232 और थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 17 है। यहां का जेंडर रेशियो 919 है, जो महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का संकेत देता है और बताता है कि वे इस बार भी निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
लेकिन सारी परिस्थितियां युवा मतदाताओं की ताकत का अहसास करा रही है। बेरोजगारी, शिक्षा, स्थानीय विकास समेत सड़क, बिजली व पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ज्यादा सजग दिख रहे युवा क्षेत्र की दिशा व दशा निर्धारित करने वाले साबित होते दिख रहे हैं। रजौली विधानसभा क्षेत्र में 18 से 19 वर्ष के 5,294 और 20 से 29 वर्ष के 69,413 मतदाता हैं, जो मिलकर कुल मतदाताओं का लगभग एक-चौथाई हिस्सा बनाते हैं। इस वर्ग के अनेक युवा न केवल पहली बार वोट डालने की ऊर्जा लिए हुए है बल्कि बेरोजगारी, शिक्षा, स्थानीय विकास और सड़क, बिजली और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ज्यादा सजग दिख रहे हैं। उनके मतदान का यही आधार साबित होने वाला है। युवा मतदाताओं की यह बड़ी संख्या किसी भी उम्मीदवार के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। सबसे अहम बात यह है कि युवा को बरगलाना आसान भी नहीं होगा। किसी वाद में बंधे बिना तथा बिना किसी राग-द्वेष के वह अपने मताधिकार से क्षेत्र का भविष्य तय करने को तैयार हैं। वरिष्ठ मतदाताओं और सामाजिक समीकरणों की भूमिका पर नजर 85 वर्ष से अधिक आयु वाले 1,870 मतदाताओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि पारंपरिक मतदाताओं का एक मजबूत हिस्सा अब भी सक्रिय है। ये मतदाता जातिगत व पारिवारिक निष्ठाओं को महत्व देने के लिए जाने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में 3,098 दिव्यांग मतदाता और 531 सर्विस वोटर्स हैं, जिनके लिए मतदान व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना मतदान को सीधे ही प्रभावित करने वाला साबित होगा। रजौली विधानसभा में सामाजिक रूप से पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जातियों का वर्चस्व रहा है। इन जातिगत समूहों के साथ-साथ अल्पसंख्यक मतदाता भी यहां राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित करते हैं। परंपरागत रूप से यह क्षेत्र कई बार पार्टी परिवर्तन का गवाह रहा है, इसीलिए हर दल यहां विशेष रणनीति तैयार करता नजर आ रहा है। महिला मतदाताओं की भूमिका रहेगी बड़ी रजौली की 1,58,232 महिला मतदाताओं को अब चुनावी रुझानों के निर्णायक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों पहले जहां महिलाएं मतदान प्रतिशत में पिछड़ती थीं, वहीं अब उनकी भागीदारी पुरुषों के बराबर है। स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता और महिला पंचायत प्रतिनिधियों की बढ़ती संख्या ने इस सामाजिक बदलाव को मजबूत आधार दिया है। इस बार यह वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेगा। मुख्य चुनावी मुद्दे अर्थात बेरोजगारी, कृषि संकट, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण और स्थानीय विद्यालयों की स्थिति पर महिलाएं भी अब सोचने लगीं हैं और आम मतदाताओं के साथ इस मसले पर कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। समस्याएं हैं सामने, समाधान की मांग है जोर पर ग्रामीण इलाकों में किसानों में समर्थन मूल्य और सिंचाई सुविधाओं की कमी के असंतोष से भरे दिख रहे हैं तो शहरी मतदाता रोजगार, बिजली और सुरक्षा के पहलुओं को लेकर अधिक मुखर हैं। युवा वर्ग रोजगार और तकनीकी शिक्षा को लेकर परिवर्तन चाहता है। ऐसे में यह सवाल अहम हो कर रह गया है कि कौन तय करेगा इस बार के चुनाव की दिशा। तब जा कर आंकड़े बताते हैं कि युवा मतदाता, जो लगभग 75 हजार के करीब हैं और जिनकी प्राथमिकता विकास एवं रोजगार है, वह काफी प्रभावी रहेंगे। जबकि महिला मतदाता, जो संख्या और सजगता दोनों में मजबूत स्थिति में हैं। साथ ही, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मतदाता, जो पारंपरिक रूप से चुनावी परिणामों को प्रभावित करते आए हैं, उनकी भी दखल बनी रहेगी। ऐसे में स्पष्ट दिख रहा है कि यदि महिला और युवा वोट बैंक किसी एक दिशा में झुकता है, तो नतीजों पर इसका सीधा असर दिखेगा। जाहिर है, उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी होगा कि वे विकास और रोजगार को लेकर विश्वसनीय योजना प्रस्तुत करें। मतदाताओं को प्रभावित करें। ----------------------- संभावित चुनावी समीकरण और जातीय गठजोड़ नवादा। रजौली की जातीय और सामाजिक संरचना के कारण यहां का चुनाव हमेशा त्रिकोणीय या चतुष्कोणी मुकाबले में बदल जाता है। मुख्य पार्टियां अर्थात राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों ही यादव, पासवान, कुरमी, महादलित समेत अगड़े और मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए लगातार क्षेत्रीय समीकरण बना रही हैं। परंपरागत रूप से, यह सीट महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबले वाली रही है। राजद उम्मीदवार पिंकी भारती दलित, अल्पसंख्यक विशेषत: मुस्लिम और यादव मतदाताओं के एक बड़े हिस्से के एकजुट होने का लाभ उठाने की जुगत में हैं तो एनडीए समर्थित लोजपा-आर प्रत्याशी विमल राजवंशी की कोशिश है कि वह दलित समुदाय के वोटों को बांटकर और अति पिछड़ा वर्ग तथा सवर्ण मतदाताओं का समर्थन प्राप्त कर खुद की स्थिति को मजबूत कर लें। कुल मिला कर, रजौली क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पीने के पानी की जरूरतों की पूर्ति के अलावा रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं मुख्य मुद्दे चले आ रहे हैं, जबकि महंगाई और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे भी मतदाताओं को प्रभावित करेंगे।

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