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1 दिसंबर, 2020|1:36|IST

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सार्वजनिक बस सेवा शुरू पर नियमों का हुआ उल्लंघन

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नवादा सहित राज्य भर में मंगलवार से सार्वजनिक परिवहन के साधनों का परिचालन शुरू हो गया। इसके साथ ही यात्रियों को पटना, गया और विभिन्न प्रखंडों के लिए बस सेवाएं मिलने लगी। बस, ऑटो-रिक्शा और अन्य वाहनों से यात्रियों का आना-जाना भी प्रारंभ हो गया। लेकिन इस बीच नियमों के पालन पर सख्ती नहीं दिखी। पहले ही दिन वाहन संचालन को बनाए गए नियमों का उल्लंघन हुआ। बसों में कहीं एक सीट पर एक से अधिक यात्री दिखे, तो किसी में यात्रियों की संख्या नदारद दिखी। कई वाहन चालक बिना मास्क लगाए हुए नजर आए, तो बसों पर सफर कर रहे यात्री भी लापरवाह दिखे। टोका-टोकी होने पर यात्री और बस संचालकों ने स्थिति में सुधार लाने की बात कही है। हालांकि वाहन परिचालन शुरु होने के पहले ही दिन नियमों की धज्जियां उड़ी। प्रशासनिक तंत्र ने इसकी अनदेखी की। मामले की पड़ताल के लिए आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान संवाददाता ने शहर के विभिन्न बस पड़ाव का जायजा लिया। इस दौरान स्थिति बेहद संतोष जनक नहीं दिखी।

बिना मास्क अधिकतर यात्री, पूछताछ पर लपेटा रूमाल व पल्लू

वाहन परिचालन के पहले ही दिन नियमों की धज्जियां उड़ी। अधिकतर बसों पर एक सीट-एक यात्री से अधिक लोग दिखे। हालांकि जब तक बसें पड़ाव में रही, तब तक नियमों का पालन हुआ, लेकिन बस पड़ाव से निकलते ही बसों पर यात्रियों की संख्या में इजाफा देखा गया। रजौली बस स्टैंड के पास गया को जानवाले वाहनों पर यात्रियों की संख्या कम दिखी। अधिकतर बसें खाली-खाली नजर आई। लेकिन सद्भावना चौक के बाद हिसुआ जाते-जाते यात्री बसों में सवारियों की भीड़ दिखी। इनमें से अधिकतर लोग बिना मास्क के नजर आएं। आलम यह था कि बस का ड्राईवर मास्क पहने दिखा, तो कंडक्टर बिना मास्क के। पड़ताल के दौरान किसी ने गमछे से मुंह ढक लिया, तो महिलाओं ने साड़ियों के पल्लू का सहारा लिया। आलम यह रहा कि सख्ती के अभाव में लोग अपनी मर्जी करते दिखे।

कागजों में सिमटा कानून, नहीं हुआ पालन

वाहनों के परिचालन को लेकर विभाग ने कई नियम-कानून बनाएं हैं, लेकिन यह सिर्फ कागजों में सिमटे रहें। असलियत तो सड़क पर दौड़ते वाहनों में नजर आई। अधिकतर वाहनों में सैनेटाईजर का अभाव दिखा। बिहार बस स्टैंड के पास बसों से उतरने के दौरान यात्रियों में आपाधापी का माहौल रहा। हालांकि बस पड़ाव में खड़ी बसों पर चढ़ने को लेकर यात्रियों में कोई जल्दबाजी नहीं दिखी, लेकिन बस संचालकों ने यात्रियों के लिए किसी तरह के सैनेटाईजर की व्यवस्था नहीं की थी। बस खुलने के समय सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो सका। प्रत्येक ट्रिप के बाद वाहन संचालकों को गाड़ियों को सैनेटाइज करने का निर्देश हैं, लेकिन बस स्टैंड में गाड़ी लगाते ही यात्रियों को बैठने की जद्दोजहद दिखी। देखा जाएं, तो विभाग ने सिर्फ एक नियमों का पुलिंदा दिया है, जिसका धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है।

अब भी लगे है बसों में प्रेशर हॉर्न, विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई

करीब दो महीनें पहले जून में जिला प्रशासन और व्यवसायियों की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें 01 जुलाई से शहर में वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू करने, फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने, पार्किंग और वेंडिंग जोन बनाने जैसे कई नियमों पर वार्ता हुई थी। इस दौरान एसपी हरिप्रसाथ एस ने वाहनों में लगे प्रेशर हॉर्न हटाने को आदेश दिए थे। शुरुआती दौर में जिला परिवहन पदाधिकारी अभ्येन्द्र मोहन सिंह ने कुछ वाहनों के प्रेशर हॉर्न को खुलवाया भी। लेकिन मंगलवार को सड़कों पर जो बसें सरपट दौड़ लगा रही थी, उनके प्रेशर हॉर्न ने आम आदमी को परेशान किया। बड़ी संख्या में वाहनों पर प्रेशर हॉर्न लगे है, जिनको खुलवाने की कवायद करनी होगी। फिलहाल, विभाग किसी तरह की कोई कार्रवाई करता नहीं दिख रहा है।

ऑटो-रिक्शा पर ठूंस के ले जाए जा रहे यात्री

लॉकडाउन के दौरान जिलेभर में ऑटो-रिक्शा का परिचालन किया गया। दूर-दराज के ग्रामीण इन वाहनों से अपने जरूरी काम निपटाने जिला मुख्यालय पहुंचें। इस दौरान ऑटो-रिक्शा पर सीमित संख्या में ही यात्री ढोए गए, लेकिन मंगलवार का नजारा कुछ खास ही दिखा। बसों के सड़कों पर आने से यात्रियों को वाहन मिलने शुरु हो गए, जिसके बाद ऑटो-रिक्शा वाले मनमानी पर उतारू हो गए। कम भाड़ा और अधिक यात्री लेकर ऑटो-रिक्शा का परिचालन होने लगा है। आलम यह है कि नवादा से हिसुआ, अकबरपुर, फतेहपुर, ओढ़नपुर, कादिरगंज और अन्य कम दूरी के जगहों के यात्रियों को ऑटो-रिक्शा में ठूंस-ठूंस कर गंतव्य स्थलों तक पहुंचाने का काम होने लगा हैं। जिले के तीन बस स्टैंडों पर यह नजारा आम हैं, लेकिन कहीं कोई प्रशासनिक अधिकारी किसी तरह की कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। जिससे वाहन चालकों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ हैं।

वाहन संचालन पर जारी प्रतिबंध हटा

राज्य परिवहन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने पत्र जारी कर जिलों के डीएम व एसपी को सार्वजनिक परिवहन साधनों के परिचालन संबंधी आदेश दिये है। सचिव ने कहा है कि कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम को लेकर राज्य सरकार समय-समय पर निर्णय ले रही है। इस दौरान 24 अगस्त को आपातकालीन प्रबंधन ग्रुप की बैठक में 25 अगस्त से सार्वजनिक परिवहन साधनों के परिचालन पर सहमति बनी। बता दें कि इसके पूर्व मालवाहक और अति आवश्यक सेवा से जुड़े वाहनों का परिचालन जारी थी, लेकिन सार्वजनिक तौर पर यात्री बाहन बंद किए गए थे। नए आदेश आने के बाद मंगलवार से वाहन संचालन पर जारी प्रतिबंध हटा लिया गया। हालांकि जिले में 09 जुलाई से ही लॉकडाउन लगाया गया था, जिसके कारण इसी दिन से सार्वजनिक परिवहन के साधन के संचालन पर प्रतिबंध लगे थे। पूरे 47 दिन के बाद एक बार फिर से बसों का चलना शुरु हुआ है।

कोविड-19 के दौरान पालन के लिए कुछ जरूरी नियम

- वाहनों को प्रतिदिन धुलवाना, साफ-सुथरा रखना, हरेक ट्रिप पर सैनेटाईज करना

- ड्राईवर और कंडक्टर को साफ कपड़े पहनने के साथ मास्क लगाना और ग्लब्स पहनना

- वाहन पर यात्रियों के चढ़ने और उतरने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

- वाहन के एक सीट पर एक यात्री बिठाने को सुनिश्चित करना

- बसों में चढ़ने के दौरान यात्रियों के हाथों को सैनेटाईज कराना

- यात्रा के दौरान यात्रियों को मास्क लगाना या मुंह ढकना अनिवार्य

- बिना मास्क लगाएं यात्रियों को वाहनों पर चढ़ने की अनुमति नहीं

- वाहनों की रेलिंग, खिड़की व अन्य जगहों को कम से कम उपयोग

- बसों में यात्रा के दौरान पान, गुटखा, खैनी के प्रयोग पर प्रतिबंध

- बस पड़ाव और सार्वजनिक स्थलों पर जहां-तहां थूकने पर प्रतिबंध

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  • Web Title:Public bus service started violation of rules