जिले में 13 हजार हेक्टेयर में होगी बुवाई, मूंग-मक्का पर जोर
नवादा जिले में कृषि परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, जहां किसान अब गरमा खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इस बार 2026 सीजन के लिए 13,843.321 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फसलों के आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें मूंग और मक्का की खेती पर विशेष जोर दिया गया है।

नवादा जिले के कृषि परिदृश्य में हालिया दिनों एक सकारात्मक बदलाव की लहर देखी जा रही है। पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती पर निर्भर रहने वाले जिले के किसान अब गरमा खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यही कारण है कि इस बार नवादा जिले में गरमा 2026 सीजन के लिए सभी 14 प्रखंडों में कुल 13,843.321 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फसलों के आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना में सबसे अधिक जोर दलहन और मक्का की खेती पर दिया गया है, जो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यत: किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम जिला कृषि विभाग द्वारा उठाया गया है।
जिला कृषि पदाधिकारी अजीत प्रकाश ने बताया कि नवादा जिला मूंग के उत्पादन का बड़ा केंद्र बनने की राह पर है। कुल लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा, यानी 10,953.305 हेक्टेयर केवल मूंग के लिए आवंटित किया गया है। इसके बाद दूसरे स्थान पर मक्का है, जिसका लक्ष्य 1,558.628 हेक्टेयर निर्धारित है। दलहन फसलों में उरद दाल के लिए 360.886 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तिलहन फसलों में सूरजमुखी के लिए 511.42 हेक्टेयर और तिल के लिए 157.068 हेक्टेयर पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। क्षेत्रफल के हिसाब से अकबरपुर प्रखंड जिले में शीर्ष पर है, जहां सबसे अधिक 1,464.919 हेक्टेयर का लक्ष्य है। वहीं, नवादा सदर और सिरदला जैसे प्रखंड भी 1,300 हेक्टेयर के करीब के लक्ष्य के साथ प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। अनुदानित मूल्य पर उन्नत बीजों की उपलब्धता से बढ़ी रुचि किसानों की इस बढ़ती रुचि के पीछे सबसे बड़ा कारण सरकारी अनुदानित मूल्य पर उन्नत बीजों की उपलब्धता है। पूर्व के वर्षों में बीज की ऊंची कीमतों और कालाबाजारी के डर से किसान गरमा फसलों से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन इस बार स्थिति बदली हुई है। विशेष यह है कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बीज वितरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि कृषि विभाग द्वारा दलहन और तिलहन के बीजों पर भारी सब्सिडी दी जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी खेती करना किफायती हो गया है। जिले के विभिन्न प्रखंडों में बीज सीधे किसानों के दरवाजे तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे उनके समय और परिवहन लागत की बचत हो रही है। जलवायु सापेक्ष खेती समय की मांग जिला कृषि पदाधिकारी अजीत प्रकाश ने बताया कि इस सीजन में मूंग, उड़द, सूरजमुखी और हाइब्रिड मक्का की खेती को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। रबी की फसल कटने और खरीफ की बुआई के बीच जो समय बचता है, उसमें मूंग एक कैश क्रॉप के रूप में उभरी है। यह न केवल कम समय में तैयार होती है, बल्कि मिट्टी की नाइट्रोजन सोखने की क्षमता को बढ़ाकर उर्वरता भी बढ़ाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते मौसम और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जलवायु सापेक्ष खेती समय की मांग है। नवादा जैसे जिले के लिए, जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं, गरमा खेती एक वरदान साबित हो रही है। वर्जन: धान और गेहूं की तुलना में इन फसलों को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। गरमा खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली है, जिससे प्रतिकूल मौसम में भी किसानों की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहती है। केवल धान-गेहूं के चक्र में फंसे रहने से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही थी और आय भी सीमित थी। गरमा खेती के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय का एक ठोस जरिया मिल गया है। -अजीत प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, नवादा। फसल विविधीकरण से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ नवादा। विभाग की इस योजना में ढैंचा के लिए 151.006 हेक्टेयर को भी शामिल किया गया है, जो मिट्टी की सेहत सुधारने और जैविक खाद के विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण है। वारिसलीगंज और अकबरपुर जैसे क्षेत्रों में मूंगफली की खेती के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गरमा फसलों की खेती कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली होती है। मूंग और उरद जैसी फसलें न केवल कम समय में तैयार होती हैं, बल्कि वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं। (नवादा से राजेश मंझवेकर)
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