
नैतिकता, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही ही राजनीति में शुचिता का अर्थ
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। राजनीति में शुचिता की कसौटी पर खरे उतरने से तात्पर्य है कि उच्चतम नैतिक मानकों, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक...
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। राजनीति में शुचिता की कसौटी पर खरे उतरने से तात्पर्य है कि उच्चतम नैतिक मानकों, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक संस्थाओं द्वारा किया जाना चाहिए। यह केवल भ्रष्टाचार-मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निःस्वार्थ सेवा भाव, ईमानदारी, लोक कल्याण के प्रति समर्पण और नैतिक आचरण भी शामिल है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता और सुशासन के लिए राजनीतिक शुचिता एक मूल आधार है। जब राजनीति में शुचिता का अभाव होता है, तो पूरी व्यवस्था पर अविश्वास और निराशा छा जाती है, जिससे राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य बाधित होता है। इसकी कसौटी में नैतिकता, पारदर्शिता, कानून का सम्मान और जनहित को सर्वोपरि रखना शामिल है।
एक स्वच्छ राजनीति ही जनता के विश्वास को बनाए रख सकती है और लोकतंत्र को मजबूत कर सकती है। यह वह दर्पण है जिसमें एक राष्ट्र का नैतिक चरित्र दिखाई देता है। राजनीतिक दलों को केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा का माध्यम बनना चाहिए, जिसके लिए शुचिता अत्यंत आवश्यक है। राजनीति में शुचिता की कसौटी की बात की जाए तो सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जनप्रतिनिधियों का व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन हर तरह के भ्रष्टाचार, छल-कपट और अनैतिकता से मुक्त होना चाहिए। उन्हें वित्तीय और अन्य हितों के टकराव से दूर रहते हुए केवल जनहित में निर्णय लेना चाहिए। राजनेताओं को अपने कार्यों, निर्णयों और खर्चों के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। कानून का शासन और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान तथा अपराधीकरण से मुक्ति अतिआवश्यक है। इसके अलावा निःस्वार्थ लोक सेवा और नैतिक आचरण एवं सार्वजनिक व्यवहार में शालीनता और मर्यादा बनी रहनी चाहिए। ---------------------- प्रबुद्धजनों की राय: 1.राजनीति में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता और नैतिकता पर जोर देना अत्यंत आवश्यक है। यह केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि नेतृत्व के व्यक्तिगत आचरण से आती है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में सुधार करके गंभीर अपराधों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से रोकना एक बड़ा कदम हो सकता है। - वरुण कुमार, छात्र, नवादा 2.जब तक नेता नैतिकता की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे, तब तक जनता का विश्वास नहीं बढ़ेगा, और लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा। शुचिता ही सुशासन की गारंटी है। किसी भी देश की संस्कृति का आईना उसकी राजनीति की भाषा होती है। नेता सार्वजनिक रूप से अपशब्दों का प्रयोग कर लोकतंत्र की गरिमा का अपमान करते हैं। यह माफी योग्य नहीं। -राजीव रंजन, दवा व्यवसायी, नवादा 3.राजनीति को शब्दों का हथियार नहीं, बल्कि विचारों का साधन बनाना चाहिए। संवेदनशील और संतुलित भाषा का प्रयोग ही राजनीतिक शुचिता का एक अभिन्न अंग है, जो लाखों लोगों को प्रभावित करता है। मन सरसों की पोटली की तरह है। एक बार बिखर गई, तो सारे दानों को बटोर लेना असंभव सा हो जाता है। -दीपक कुमार, अस्पताल कर्मी, नवादा 4.एक बार नैतिक पतन शुरू हो जाए, तो भ्रष्टाचार और अवसरवाद पूरी व्यवस्था को खोखला कर देता है। राजनीति तो इससे कतई अछूती नहीं। शुचिता का संकल्प सत्तारूढ़ होने या विपक्ष में बैठने से पहले लेना चाहिए। राष्ट्रनिर्माण का लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब राजनीति सत्ताभिमुख न होकर राष्ट्राभिमुख हो। -दिलीप कुमार, प्राइवेट जॉब, नवादा 5.राजनीतिक शुचिता के लिए कानूनी और विधायी परिवर्तनों की आवश्यकता है। यदि कोई शीर्ष नेता गंभीर अपराध में लंबे समय तक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वचालित रूप से पदच्युत करने का प्रावधान होना चाहिए। यह कदम राजनीतिक जवाबदेही का एक नया मानदंड स्थापित करेगा। सत्ता का संरक्षण अपराध का कवच नहीं बन सकता। -सन्नी कुमार, प्राइवेट जॉब, नवादा 6.लोकतंत्र की सर्वोच्चता केवल तब बनी रह सकती है जब प्रतिनिधि नैतिकता की जिम्मेदारी समझें। आज की राजनीति में शुचिता का धूमिल होना एक गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं को स्वविवेक का उपयोग करना चाहिए और लकीर के फकीर बनने से बचना चाहिए। उन्हें केवल सत्ता की लालसा रखने वाले नेताओं के पीछे नहीं चलना चाहिए। - नवलेश कुमार, प्राइवेट जॉब, नवादा 7.मूल्यपरक राजनीति के लिए हम सभी को आवाज उठानी चाहिए। जब युवा शक्ति नैतिकता और ईमानदारी को प्राथमिकता देगी, तभी राजनीति में सकारात्मक बदलाव आएगा। हिंसा और अवसरवाद की राजनीति शुचिता की सबसे बड़ी दुश्मन है। खर्चों में मितव्ययिता और अपव्यय को रोकना भी शुचिता का एक व्यावहारिक पैमाना है। - रवि कुमार, अस्पताल कर्मी, नवादा 8.सिविल सेवकों के चयन में जिस तरह योग्यता और नैतिक प्रतिमान की कसौटी रखी जाती है, वैसे ही राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी होनी चाहिए। शुचिता के लिए निःस्वार्थता सर्वोपरि है। सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को अपने, अपने परिवार या मित्रों के लिए वित्तीय लाभ प्राप्त करने हेतु निर्णय नहीं लेना चाहिए। -अरविंद कुमार, अस्पताल कर्मी, नवादा 9.नैतिकता शासन की नींव है। इसका हर हाल में ख्याल रहना चाहिए। राजनीति का अपराधीकरण शुचिता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। जब अपराधी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति बाहुबल और धनबल के दम पर चुनाव जीतते हैं, तो वे जनता के हितों को किनारे कर देते हैं। इस राजनेता-अपराधी गठजोड़ को तोड़ने को प्राथमिकता देनी होगी। -सरजू कुमार, प्राइवेट जॉब, नवादा 10.शुचिता की शुरुआत शिक्षा और पाठ्यक्रम से होनी चाहिए। नैतिकता और मानवीय मूल्यों को स्कूली शिक्षा में शामिल करना आवश्यक है, ताकि आज के छात्र कल के मूल्यपरक नागरिक और राजनेता बन सकें। चरित्रवान व्यक्ति को ही जनप्रतिनिधि के तौर पर वरीयता देने की संस्कृति को समाज में स्थापित करना होगा। - रमेश कुमार, दवा व्यवसायी, नवादा

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