वारिसलीगंज:फायनेंस कम्पनी से लोन के नाम पर ठगी में चार धराये
नवादा की पुलिस ने अपसढ़ गांव में ऑनलाइन ठगी करने वाले चार अंतरजिला साइबर आरोपितों को गिरफ्तार किया। आरोपितों के पास से 10 मोबाइल, 14 सिम, 02 एटीएम कार्ड और अन्य सामान बरामद किए गए। गिरोह का सरगना उत्तराखंड में बैठा है, जो कस्टमर डेटाशीट उपलब्ध कराता था।

फोटो वारिसलीगंज - तकनीकी सूचना पर अपसढ़ गांव में छापेमारी कर पुलिस ने आरोपितों को धर दबोचा - 10 मोबाइल, 14 सिम, 02 एटीएम कार्ड आदि किये गये आरोपितों के पास से बरामद नवादा/वारिसलीगंज, हिप्र/निसं नवादा की पुलिस ने विभिन्न फायनेंस कम्पनियों के नाम पर सस्ते दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी करते चार अंतरजिला साइबर आरोपितों को धर दबोचा। इनमें से एक विधि विरुद्ध किशोर बताया जाता है। तकनीकी सर्विलांस व मानवीय इंटेलिजेंस की मदद से वारिसलीगंज पुलिस की एसआईटी ने सोमवार को आरोपितों को अपसढ़ गांव से करीब पांच सौ मीटर दूर आम के एक बगीचे से रंगेहाथ दबोच लिया।
पुलिस को बगीचे में बैठकर अपराधियों के एक गिरोह द्वारा विभिन्न राज्यों के लोगों को फोन कर ठगी करने की सूचना मिली थी। सूचना पर टीम का गठन कर छापेमारी की गयी। छापेमारी के क्रम में पांच आरोपित मौके से भाग निकले। गिरफ्तार आरोपितों के पास से 10 मोबाइल, 14 सिम, 05 पेज कस्टमर डेटाशीट, 02 एटीएम, 01 आधार कार्ड, 01 वोटर आईडी, 01 पैन कार्ड व 01 ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड बरामद किया गया है। नवादा के एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर की गयी छापेमारी की मॉनिटरिंग पकरीबरावां एसडीपीओ राकेश कुमार भास्कर ने की। जबकि नेतृत्व थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने किया। टीम में वारिसलीगंज पुलिस के कई अधिकारी शामिल थे। इन्हें किया गया गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपितों में एक शेखपुरा जिले के शेखोपुर सराय का है। जबकि शेष वारिसलीगंज के अपसढ़ गांव के बताये जाते हैं। इनमें अपसढ़ गांव के रामाशीष सिंह का बेटा राजाराम कुमार, यदुनंदन सिंह का बेटा प्रिंस कुमार व श्यामनंदन सिंह का बेटा गौतम कुमार शामिल हैं। वहीं एक अन्य पकड़ा गया आरोपित विधि विरुद्ध किशोर बताया जाता है। जिसे निरुद्ध कर लिया गया है। उत्तराखंड में बैठा है सरगना वारिसलीगंज थाने में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में पकड़े गये आरोपितों ने स्वीकार किया कि उनके द्वारा उपलब्ध कस्टमर डेटा शीट के नंबरों पर कॉल कर लोगों को विभिन्न बैंकों व फायनेंस कम्पनियों से लोन दिलाने का प्रलोभन दिया जाता था। झांसे में आने पर लोगों का आईडी कार्ड व बैंक डिटेल मांगा जाता था। इसके बाद उनसे लोन प्रोसेसिंग फीस व अन्य मदों के नाम पर ठगी की जाती थी। आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह का सरगना उत्तराखंड में बैठा है और वहीं से उन्हें कस्टमर डेटाशीट उपलब्ध कराता है। उसका एक स्थानीय शागिर्द उन्हें कस्टमर डेटाशीट लाकर देता है। ठगी की गयी राशि सभी साथी आपस में बंटवारा कर लेते थे। पश्चिम बंगाल के सिम पाये गये आरोपितों के पास से बरामद 14 सिमों की तकनीकी जांच की गयी। जांच में कई सिम फर्जी पाये गये। इनमें से कुछ सिम पश्चिम बंगाल, झारखंड, जमुई, शेखपुरा, नालंदा व जहानाबाद जिलों के पाये गये हैं। साथ ही आरोपितों के मोाबाइल से ठगी के कई साक्ष्य बरामद किये गये हैं। इस मामले में कुल 11 आरोपितों के विरुद्ध 19 जनवरी को कांड संख्या-37/26 दर्ज किया गया। इनमें पकड़े गये चार आरोपित शामिल हैं। आरोपितों के विरुद्ध साइबर ठगी व संगठित रूप से धोखाधड़ी करने समेत बीएनएस की विभिन्न धाराओं व आईटीएक्ट के तहत प्राथमिकी में आरोपितों के विरुद्ध आरोप दर्ज किये गये हैं।
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