लोन देने के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधी धराए
पुलिस ने लोन देने के नाम पर ठगी करने के आरोप में चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान 39300 रूपए नगद, 6 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और एक पर्स बरामद किया गया। ठग ग्राहकों से विभिन्न शुल्कों के नाम पर पैसे वसूलते थे। वारिसलीगंज थाना क्षेत्र में ठगी का धंधा जारी है।

विभिन्न कंपनियों से लोन देने के नाम पर ठगी करने के आरोप में पुलिस ने चार साइबर अपराधियों को धर दबोचा। गुप्त सूचना पर थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी के नेतृत्व में गठित टीम ने गुरुवार को थाना क्षेत्र की मोहीउद्दीपुर पंचायत की अनुसूचित टोला दोवाय नगर स्थित नहर के पूरब खंधा पर छापेमारी कर यह सफलता हासिल की। पकड़े गए ठगों में भवानी बीघा ग्रामीण अर्जुन प्रसाद का 30 वर्षीय पुत्र विकास कुमार, बेलदरिया ग्रामीण मनोज कुमार का 21 वर्षीय पुत्र अक्षय कुमार, मंजौर ग्रामीण विनोद कुमार शर्मा का 22 वर्षीय पुत्र टिंकू शर्मा तथा एक विधि विरुद्ध किशोर शामिल है।
छापेमारी का विवरण
छापेमारी के क्रम में 39300 रूपया नगद, 06 एंड्रॉयड मोबाइल फोन एवं एक पर्स को बरामद किया गया है। शुक्रवार को वारिसलीगंज थाना में प्रेस वार्ता कर थानाध्यक्ष ने मामले की विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि गुप्त सूचना पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस पदाधिकारियों की टीम गठित कर दोवाय नगर स्थित सकरी नहर के पूरब खंधा में छापेमारी की गई। इस दौरान कुल चार लोग खनधा में बैठकर डेटा सीट में रहे ग्राहकों के मोबाइल फोन पर विभिन्न कंपनियों का सस्ता ऋण दिलवाने के प्रलोभन देकर ठगी करते पकड़े गए। पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी कर सभी ठगों को गिरफ्तार कर थाना लाया गया। जहां एक विधि विरुद्ध बालक समेत कुल चार लोगों से सघन पूछताछ की गई। बताया गया कि ऋण देने के बहाने ठगों द्वारा विभिन्न प्रकार का प्रलोभन देकर ग्राहकों को फंसाया जाता है। ततपश्चात बार बार प्रोसेसिंग फीस, बैंक चार्ज, टिकट शुल्क समेत तरह तरह से अपनी फर्जी बैंक खाते में राशि मंगवाई जाती है। जिसे ठग आसानी से एटीएम के माध्यम से निकासी कर ली जाती है।
धंधे में लिप्त लोग
छापेमारी टीम में थानाध्यक्ष समेत पुअनि रमेश कुमार, पुअनि सुशील कुमार तथा पुलिस बल शामिल रहे। लगातार कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा ठगी का धंधा बता दें कि वारिसलीगंज थाना क्षेत्र से अब तक सैकड़ों युवक ठगी करते पकड़ाकर जेल यात्रा कर चुके है। बाबजूद धंधा बदस्तूर जारी है। धंधे में लिप्त बड़े बड़े लोग महानगरों में बकायदा आवास लेकर वहीं से ठग गिरोह का संचालन करते हैं। नए युवाओ को पहले कमीशन पर रखा जाता है। काम में दक्ष हो जाने पर ठगी गई राशि में हिस्सेदारी मिलती है। 10 वर्ष पहले जिस व्यक्ति के पास साइकिल खरीदने का पैसा नहीं था, आज ठगी की कमाई से लक्जरी कार व अन्य वाहन के स्वामी बने हैं। एसी युक्त आलीशान बंगला एवं अन्य सुविधाएं उनके लिए आम बात हो गई है। (वारिसलीगंज से उमा शंकर पाठक)
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