पकरीबरावां के बरा का स्वाद सात समंदर पार, पर निर्यात की दरकार
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।आसमान का तारा देखो, दुल्ली चंद का बरा देखो... एक दौर में यह नारा नवादा जिले के पकरीबरावां की गलियों में गूंजता था। आज यह महज एक नारा नहीं, बल्कि एक विरासत की पहचान बन चुका...

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। आसमान का तारा देखो, दुल्ली चंद का बरा देखो... एक दौर में यह नारा नवादा जिले के पकरीबरावां की गलियों में गूंजता था। आज यह महज एक नारा नहीं, बल्कि एक विरासत की पहचान बन चुका है। मैदा और चीनी के अनूठे संगम से तैयार होने वाली पकरीबरावां की सुप्रसिद्ध बरा मिठाई आज अपनी मिठास से सरहदों को लांघ चुकी है। खाड़ी देशों (गल्फ) से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक, इस मिठाई के दीवाने हर जगह मौजूद हैं। तीन पीढ़ियों का स्वाद और वही शिद्दत आज भी बरकरार रहने से पकरीबरावां की बरा मिठाई लगातार अपने पंख पसार रही है।
इस मिठाई को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने का श्रेय पकरीबरावां के स्वर्गीय दुल्ली चंद को जाता है। जेपी आश्रम सोखोदेवरा का भ्रमण करने पहुंचे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने उनकी ही दुकान में इस मिठाई का रसास्वादन किया था और इसके दीवाने हो गए थे। उन्होंने इस मिठाई की भरपूर प्रशंसा की थी, जिसके बाद से इस मिठाई ने ऊंचाई का सफर शुरू कर दिया। वर्तमान में बरा मिठाई जिले की मिठाइयों में उच्चतम दर्जे पर काबिज है। दुल्लीचंद ने जिस शुद्धता और लगन से इस मिठाई को बनाना शुरू किया था, उनके पोते रवि शंकर पप्पू आज भी उसी शिद्दत से इस विरासत को संभाले हुए हैं। यही कारण है कि दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फूड फेस्ट में भी नवादा के इस बरा मिठाई का जलवा बरकरार रहता है। आधुनिक मशीनरी के दौर में भी यहां गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता। उल्लेखनीय है कि पकरीबरावां की बरा मिठाई ने देश भर के फूड फेस्ट में अपना जलवा बरकरार रखा है। बेहद नफासत भरी है इसकी बनावट बरा मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसकी कोमलता है। इसे बनाने की प्रक्रिया जितनी जटिल है, इसे संभालना उतना ही चुनौतीपूर्ण। मैदा और चीनी की चाशनी के मेल से तैयार यह मिठाई इतनी नाजुक होती है कि इसे बनाने से लेकर खाने तक हल्के हाथों का इस्तेमाल करना पड़ता है। जरा सी असावधानी हुई नहीं कि यह मिठाई कांच की तरह टूटकर बिखर जाती है। इसी नफासत और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के कारण इसे मिठाइयों की रानी भी कहा जाता है। बिना सरकारी मदद के ग्लोबल हुआ देसी स्वाद हैरानी की बात यह है कि इस मिठाई का कोई आधिकारिक निर्यात नहीं होता। इसके बावजूद यह मिठाई दुबई, सऊदी अरब, कतर और नेपाल के घरों तक पहुंच रही है। दरअसल, नवादा और आसपास के जिलों के जो लोग विदेश में रहते हैं, वे जब भी घर आते हैं, तो लौटते समय अपने साथ पकरीबरावां का बरा ले जाना नहीं भूलते। रिश्तों और परिचितों के माध्यम से यह मिठाई दुनिया के कोने-कोने में मिठास घोल रही है। नेपाल तक इसकी धमक सहजता से पहुंच चुकी है। स्थानीय लोगों के परिजनों के स्वाद ने बरा मिठाई को ग्लोबल बना दिया है। जीआई टैग और ब्रांडिंग की उम्मीद यूं तो पूरे बिहार और देश के अन्य राज्यों में बरा मिठाई प्रसिद्ध है, लेकिन जो बात पकरीबरावां के पानी और दुल्ली चंद के वंशजों के हाथों के हुनर में है, वह कहीं और नहीं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का मानना है कि यदि सरकार इस मिठाई की ब्रांडिंग और निर्यात के लिए उचित कदम उठाए, तो यह न केवल नवादा की अर्थव्यवस्था को बदल सकती है, बल्कि इसे जीआई टैग मिलने की राह भी आसान हो सकती है। वर्तमान में जब प्रगति मैदान के फूड फेस्ट में लोग इस मिठाई का आनंद लेते हैं, तो नवादा की मिट्टी की खुशबू दूर-दूर तक फैलती है। पकरीबरावां की पहचान बन चुकी बरा मिठाई आज भी अपनी उसी पुरानी साख के साथ खड़ी है, बस इंतजार है तो इसे एक वैश्विक बाजार और पहचान मिलने की।

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