जिले के स्कूलों में बच्चों की टैबलेट से नहीं बन रही हाजिरी
जिले के सरकारी स्कूलों में पिछले साल दिए गए टैबलेट का उपयोग अभी तक सही तरीके से नहीं हो रहा है। बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी बनाने के लिए टैबलेट दिए गए थे, लेकिन 70 फीसदी प्रारंभिक स्कूलों में हाजिरी नहीं बन रही है। कई शिक्षक टैब ऑपरेट नहीं कर पा रहे हैं और छात्रों की उपस्थिति भी कम है।

जिले के सरकारी प्रारंभिक, हाई व इंटर स्कूलों को पिछले साल ही बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी बनाने के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए गए। टैबलेट मिले हुए कई माह बीत जाने के बाद भी अधिकांश स्कूलों में बच्चों की हाईटेक हाजिरी अभी तक नहीं बन रही है। बच्चों की डिजिटल हाजिरी बनाने के लिए सभी सरकारी स्कूलों को दो दो टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। सरकारी स्कूलों में हाईटेक माहौल बनाने तथा फर्जी उपस्थिति पर लगाम लगाने के लिए टैब से उपस्थिति बनाने का नियम बनाया गया। स्कूलों में टैबलेट इसलिए उपलब्ध कराया गया कि बच्चों और शिक्षकों की हाजिरी एक साथ बन सके।
कुछ हाई स्कूलों में टैब का उपयोग कर हाजिरी बनाई जा रही है, पर 70 फीसदी प्रारंभिक स्कूलों में अभी तक बच्चों की हाजिरी टैब से नहीं बन रही है। विभाग की ओर से शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए टैब से हाजिरी बनाने का नियम लाया गया था। फरवरी 2026 में ही आदेश जारी किया गया था कि सभी टीचर और छात्रों की टैब से हाजिरी बनाना जरूरी है। पर इसका असर अभी तक स्कूलों में देखने को नहीं मिल रहा है। अप्रैल में नया सेशन शुरू हो जाने के बाद भी यही स्थिति है। स्कूलों में टैब से हाजिरी नहीं बनने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लेकिन दो से तीन कारण ज्यादा महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह ये है कि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति कम रहने के कारण टैब से हाजिरी नहीं बन पा रही है। जबकि कई शिक्षक टैब को ऑपरेट ही नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर स्कूलों में कम्प्यूटर टीचर भी नहीं हैं। ऐसे में हाल ये है कि टैब रहने के बाद भी हाजिरी बनाने में मुश्किल हो रही है। तीसरा कारण ये भी माना जा रहा है कि बगैर स्कूल पहुंचे मोबाइल से फोटो खींचकर हाजिर बन सकती है, लेकिन टैब से हाजिरी बनाने के लिए जियोटैगिंग यानी स्कूल में होना जरूरी है। उपस्थिति पंजी पर बन रही हाजिरी कई सरकारी स्कूलों में टैब से हाजिरी बनाने की जगह पर उपस्थिति पंजी पर ऑफलाइन हाजिरी बनाई जा रही है। बच्चों की हाजिरी जिस तरह से पहले ली जाती थी। उसी अंदाज में अभी भी ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में उपस्थिति पंजी पर बच्चों की हाजिरी बन रही है। (नवादा से शशि भूषण पाठक)
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