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27 सितम्बर, 2020|7:24|IST

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आयुष्मान से गरीबों का कल्याण नहीं

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जिले की गरीब जनता आज भी आयुष्मान भारत योजना से वंचित है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल 2018-19 का बजट पेश करते वक्त तात्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए एक स्वास्थ्य बीमा की घोषणा की थी। जिसे पिछले साल 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जंयती से देशभर में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना(आयुष्मान भारत) के नाम से लागू कर दिया गया। लेकिन 14 महीने बीतने को है, जिले के लाभुक परिवारों को योजना से कोई भी स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।

आंकड़ों पर गौर करें, तो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत जिले के 1,83,939 परिवारों को जोड़ा गया है। जिनमें 09,93,271 लोगों का स्वास्थ्य बीमा होना है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक मात्र 7.5 फीसदी लोगों को ही योजना से जोड़ पाया है। करीब 72 हजार लोगों का गोल्डेन कार्ड बना है। ऐसे में सरकार की यह योजना जिले के गरीब परिवारों के लिए सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।

सलाना मिलेगा पांच लाख का मेडिकल इंश्योरेंस

मोदीकेयर के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी यह योजना गरीब लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेस स्कीम है। इसके तहत जुड़े हरेक परिवार को सलाना पांच लाख रुपए का मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा। सरकार ग्रामीण क्षेत्र के गरीब, उपेक्षित परिवारों के साथ ही शहरी गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा दे रही है। जिससे इन परिवारों के किसी भी सदस्य का हेल्थ इमरजेंसी की दौरान पांच लाख तक का मुफ्त इलाज कराया जा सके। बता दें कि एक परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा किया गया है। यदि इलाज पर इससे अधिक की राशि खर्च होती है, तो उसे परिवार को वहन करना होगा। अगले साल लाभुक फिर से पांच लाख रुपए तक का इलाज करा सकेंगे।

एसईसीसी के तहत लाभुक का हुआ है चयन

सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना 2011 के तहत लाभुकों का चयन किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में डीवन, डीटू, डीथ्री, डीफोर, डीफाइव और डीसेवन कैटेगरी के लोग आयुष्मान भारत योजना में शामिल किए गए है। जबकि शहरी इलाके में 11 पूर्व निर्धारित पेशे के लोगों को योजना से जोड़ा गया है। इनमें फुटपाथी दुकानदार, रेहड़ी-खोमचे लगानेवाले लोग, रिक्शाचालक, ड्राईवर, भवन निर्माण में लगे मजदूर-मिस्त्री, दिहाड़ी पर कार्य करनेवाले लोग, दिव्यांग, निराश्रित जैसे लोग शामिल हैं।

योजना में तकरीबन हर बीमारी का इलाज

आयुष्मान भारत योजना में तकरीबन हर बीमारी के इलाज और अस्पताल में दाखिल होने का खर्च कवर किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने योजना के तहत 1354 चिकित्सा पैकेज शामिल किए है। जिनमें कोरोनरी बाइपास सर्जरी, घुटना बदलना और स्टंट डालना जैसे खर्चीले इलाज भी शामिल है। इस योजना के लाभुक सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज करा सकते है। साथ ही योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी लाभुक चिकित्सा सेवा का लाभ ले सकते हैं। जिले में दो निजी अस्पताल प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े है। इनमें जिला मुख्यालय स्थित कमला नर्सिंग होम और मेट्रो हॉस्पिटल शामिल है।

28 तक लाभुकों के बनाए जाएंगे गोल्डेन कार्ड

जिलेभर के पंचायतों में शिविर लगाकर प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के लाभुकों का गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है। राजधानी पटना से स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी कर योजना के लाभुकों को गोल्डेन कार्ड मुहैया कराने का फरमान जारी किया है। जिसको लेकर जिले के 187 पंचायतों में 18 नवबंर से 28 नवंबर तक शिविर का आयोजन किया गया है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और हरेक प्रखंड के पीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। हर पंचायत के पंचायत भवन में शिविर का आयोजन होगा। जिसमें प्रखंड अनुश्रवण व मूल्यांकन सहायक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेक, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक को पूरे साजो सामान के साथ शिविर में कार्ड बनाने का काम करना है। साथ ही हरेक प्रखंड के बीडीओ को निर्देश दिया गया है कि पंचाय़ती राज विभाग के कार्यपालक सहायक को कम्प्यूटर सिस्टम के साथ शिविर में उपस्थित रहना सुनिश्चित कराएं। सभी जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के लाभुक को योजना से जोड़ने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया है। जिला जन संपर्क पदाधिकारी को अपने स्तर से प्रचार-प्रसार कराने को कहा गया है।

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