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वार्ड 13 : मिर्जापुर-ननौरा मुख्य मार्ग जर्जर, आवागमन में संकट

वार्ड 13 : मिर्जापुर-ननौरा मुख्य मार्ग जर्जर, आवागमन में संकट

संक्षेप:

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर सड़कों की हालत प्रशासन के दावों और धरातल की हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है।

Jan 13, 2026 03:20 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर सड़कों की हालत प्रशासन के दावों और धरातल की हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है। शहर के वार्ड नंबर 13 के अंतर्गत आने वाला मिर्जापुर-ननौरा मुख्य मार्ग इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है। यह मार्ग न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है। लेकिन नवादा नगर परिषद और संबंधित विभाग द्वारा इस ओर ध्यान न दिया जाना स्थानीय लोगों में रोष का कारण है। मिर्जापुर-ननौरा मार्ग का यह हिस्सा शहर के यातायात दबाव को कम करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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यदि इस सड़क का पुननिर्माण जल्द नहीं कराया गया, तो यह न केवल आवागमन को बाधित करेगा बल्कि नवादा की शहरी व्यवस्था पर एक बड़ा धब्बा बना रहेगा। स्थानीय निवासियों की मांग है कि इस सड़क की गुणवत्ता की जांच हो और आधुनिक तकनीक से इसका नवनिर्माण कराया जाए ताकि यह अगले कई वर्षों तक टिक सके। शहर के स्मार्ट बनने की दिशा में पहला कदम सुरक्षित और सुगम सड़कें ही हैं। सात साल का सफर, निर्माण से जर्जरता तक विडंबना यह है कि जिस सड़क का निर्माण महज सात साल पहले हुआ था, वह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। आमतौर पर एक मानक पिच रोड की आयु 10 से 15 वर्ष मानी जाती है, लेकिन गुणवत्ता में कमी और उचित रखरखाव के अभाव के कारण यह मार्ग समय से पहले ही जर्जर हो चुका है। वर्तमान में इस सड़क की स्थिति ऐसी है कि यहां सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, यह पहचानना मुश्किल हो जाता है। आमजनों की शिकायत है कि यदि यह सड़क महज सात वर्षों में अपनी संरचनात्मक अखंडता खो चुकी है, तो यह स्पष्ट रूप से इस संभावनाओं की ओर इशारा करता है कि या तो निम्न-स्तरीय इंजीनियरिंग या निर्माण सामग्री में भ्रष्टाचार की घुसपैठ रही है। तार्किक रूप से देखें तो सात साल पहले इस मार्ग का निर्माण उस समय के यातायात भार को ध्यान में रखकर किया गया होगा। लेकिन नवादा के विस्तार और मिर्जापुर क्षेत्र के व्यापारिक केंद्र बनने के कारण, इस मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ा है। ऐस में कहा जा सकता है कि निर्माण के समय भविष्य के इस ट्रैफिक प्रोजेक्शन को नजरअंदाज किया गया। निश्चित रूप से यह योजनाकारों की अदूरदर्शिता रही। आमलोगों को है बेहतरी की आस मिर्जापुर से ननौरा जाने वाला यह मुख्य मार्ग हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही का गवाह बनता है। सड़क जर्जर होने के कारण कई समस्याएं आम हो गई हैं। आए दिन दुपहिया वाहन चालक इन गड्ढों के कारण असंतुलित होकर गिर रहे हैं। रात के समय स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है। सड़क उखड़ने के कारण वाहनों के गुजरने पर उड़ने वाली धूल स्थानीय दुकानदारों और निवासियों के श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। हल्की बारिश होते ही ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, जिससे पैदल चलने वालों और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐस में आमजन बेहतरी पर टकटकी लगाए बैठे हैं। आम लोगों ने सीधे-सीधे कहा कि नवादा नगर परिषद को यह समझना होगा कि अब इस मार्ग पर पैचवर्क करना सार्वजनिक धन की बर्बादी होगी। वर्तमान स्थिति की मांग है कि फुल-डेप्थ रिक्लेमेशन यानी सड़क के बेस यानी आधार को फिर से मजबूत किया जाए। कंक्रीट व्हाइट-टॉपिंग की जरूरत बताते हुए सुझाव दिया गया कि ट्रैफिक लोड को देखते हुए बेहतर सीमेंट-कंक्रीट का उपयोग हो। सड़क निर्माण से पहले ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण अनिवार्य किया जाए। मिर्जापुर-ननौरा मार्ग की यह हालत नवादा के नागरिकों के धैर्य की परीक्षा है। यदि शहर के मुख्य मार्ग सात साल भी नहीं टिक पा रहे, तो स्मार्ट सिटी या विकसित नवादा की परिकल्पना महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगी। -------------------- नल-जल की स्थिति है खराब, चापाकल का भी साथ नहीं नवादा। नवादा नगर परिषद के वार्ड नंबर 13 के लोग नल-जल की बेहतर व्यवस्था नहीं रहने के कारण पेयजल की परेशानी से दो-चार होने को बाध्य हैं। यह संकट दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। वार्ड स्थित मिर्जापुर, मिर्जापुर महादलित टोला, सूर्य मंदिर और ननौरा रोड आदि प्रमुख मोहल्ले एकसमान नल-जल की समस्या झेल रहे हैं। यह समस्या पेयजल की किल्लत का कारण बनी रहती है। कमोबेश लगभग सम्पूर्ण वार्डवासियों को पेयजल के संकट से जूझने की नौबत बनी हुई रहती है। परेशानी का सबब तो यह है कि पेयजल की समस्या ठंड के इस मौसम में भी बनी हुई है जबकि गर्मी में तो यह समस्या और भी विकराल हो जाती है। मुश्किल यह भी है कि इसका समाधान स्थायी रूप से निकल नहीं पा रहा है। नल-जल की समस्या एक अलग ही समस्या का कारण बन रही है। नल-जल की पाइपलाइन बिछाने के क्रम में सड़कें तोड़ दिए जाने से भी परेशानी बनी रहती है। हालांकि इस वार्ड के लिए एक अच्छी बात यह है कि यहां नली-गली की स्थिति ठीकठाक है। स्थानीय वार्ड पार्षद गीता देवी ने अपने फंड का भरपूर सदुपयोग इस योजना पर किया है, जिसका लाभ दिखाई भी पड़ता है। इसके अलावा वार्ड में अन्य कई मूलभूत समस्याएं हैं, जिसे झेलने की नौबत बनी रहती है। हालांकि इन समस्याओं से जूझने की स्थिति के बीच भी संतोष की बात यह है कि वार्ड पार्षद के फंड से विकास कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। बस बड़े फंड की आवश्यकता वाले विकास कार्य इस वार्ड में भी बाधित हैं। --------------------- वार्ड का कायाकल्प किया जाना अब भी है शेष नवादा। नवादा शहरी क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 के विभिन्न मोहल्ले में जल निकासी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण यह परेशानी बनी हुई है। हालांकि यहां से खुरी नदी बेहद करीब है लेकिन तमाम बाधाओं के कारण सभी मोहल्लों से नाले की निकासी नदी तक कर पाना संरचनागत दिक्कतों के कारण संभव नहीं हो पा रहा है। खुरी नदी तक पहुंचने में कई स्थानों पर ऊंचाई के कारण मुश्किलों का सामना करने की नौबत बनी हुई है। ऐसी कई मुश्किलें सामने रहने से अब भी विकास की राह इस वार्ड से हो कर पूरी तरह से नहीं गुजर पा रही है। लोग अपने जनप्रतिनिधि की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी कोशिशों के बावजूद पूरी तरह से बात बन नहीं पा रही है। वार्ड पार्षद के फंड से कुछेक जरूरतों की पूर्ति जरूर की गई है लेकिन वार्ड का सम्पूर्ण कायाकल्प होने में अभी काफी देर लगने की संभावना बन रही है। वार्ड पार्षद गीता देवी कहती हैं कि निजी फंड से नाली निर्माण और गली में सोलिंग तथा पेवर ब्लॉक आदि के कार्य कराए गए हैं जबकि अब भी कई ऐसी योजनाएं हैं, जिसके चयनित होने के बाद निर्माण कार्य की गति बढ़ सकेगी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि जल निकासी से जुड़े कुछ कार्य ऐसे हैं, जिसे राज्य मद से कराए जाने को लेकर सूचीबद्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बोर्ड की बैठक के क्रम में इसे चिह्नित करने की पहल होगी ताकि स्वीकृति के बाद इस दिशा में कुछ सार्थक हो सके। ---------------------- विभागीय समर्थन की रहती है प्रतीक्षा नवादा। वार्ड पार्षद ने कार्यों की बाधा के लिए विभागीय शिथिलता को कोसते हुए कहा कि मेरी कोशिशें जारी हैं लेकिन कई बार फंड की प्राप्ति में परेशानी उठानी पड़ती है। वार्ड में स्थित चार आंगनबाड़ी केन्द्रों में से किसी का भी अपना भवन नहीं रहना वार्ड पार्षद भी परेशानी का सबब मानती हैं। इसीलिए वह कहती हैं कि आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए सरकारी जमीन की अनुपलब्धता का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकारी जमीन की कमी के कारण सामुदायिक भवन अथवा सामुदायिक शौचालय आदि भी जमीन पर नहीं उतर पा रहे हैं। नल-जल के लिए स्वयं के स्तर पर प्रयास कर रहा हूं लेकिन संकट का समाधान नहीं निकल पा रहा है। नल-जल क्षतिग्रस्त है। गर्मी के दिनों में काफी परेशानी होती है। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए विभिन्न माध्यमों से शिकायती आवेदन दिया गया है। अपने ईमानदार प्रयास से वार्ड की सूरत बदलने की कवायद जारी रहने का दावा स्थानीय वार्ड पार्षद करती हैं। अच्छा यह है कि स्थानीय निवासी उनका समर्थन करते दिखते हैं। ---------------------- वार्डवासियों के बोल : वार्ड पार्षद के द्वारा अब तक किए गए प्रयास दिखते हैं। ढाई सालों में उन्होंने कई बेहतर कार्य कराए हैं। लेकिन अब भी कई कार्य बाधित हैं, जिससे थोड़ी निराशा है। सड़क और पेयजल की दिक्कत का समाधान एकदम जरूरी है। -जैनों कुमार, मिर्जापुर सूर्य मंदिर। मिर्जापुर-ननौरा पथ के निर्माण की प्रबल जरूरत है। हालांकि वार्ड के अंदर पीसीसी और गली-नाली का कार्य बेहतर तरीके से कराए गए हैं। इसे विस्तार देने की अब भी जरूरत है। इस अहम जरूरत को समझा जाए। -मदन लाल, व्यवसायी, मिर्जापुर। सड़क और गलियों की बेहतरी समय की जरूरत है। तकनीकी बाधा है लेकिन इसे दूर करना नगर परिषद की जिम्मेदारी है जबकि वार्ड पार्षद को इस कार्य को प्राथमिकता देनी होगी। नल-जल के पानी की भी व्यवस्था हो। -सरोज कुमार उर्फ लाल बाबू, मिर्जापुर। सड़क की बाधा को दूर करना निहायत ही जरूरी हो चला है। इसकी अनदेखी सही नहीं। सरकारी जमीन नहीं रहने का नुकसान भी वार्ड को हो रहा है और नए निर्माण की बाधा बनी हुई है। पार्षद के स्तर से प्रयास जारी हैं। यह बेहतर है। -मनोज कुमार, मिर्जापुर सूर्य मंदिर रोड। ----------------------- वर्जन : सड़क निर्माण विभागीय स्तर की चीज है। मेरी पहल रहती है। अपने फंड से हर घर तक पीसीसी का काम कराना व हर घर तक नाली-गली का काम पूरा कराना यह मेरी सर्वोच्च प्राथमिता रही। यह कार्य वार्ड में बेहतरी के साथ दिखते हैं। नल-जल का लाभ घर-घर तक पहुंचाना निश्चित रूप से वार्ड की जरूरत है, जिस पर मेरा ध्यान है। शैक्षणिक और स्वास्थ्य की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए हर प्रयास जारी हैं। शेष कार्यकाल में इन सभी जरूरी कार्यों को कराने पर मेरा जोर है। विभिन्न योजनाएं चिह्नित करा चुकी हूं। कुछ को स्वीकृति मिल भी चुकी है। बस राज्य मद से फंड का इंतजार है। इसके बाद वृहद स्तर के कार्यों को गति मिल सकेगी। -गीता देवी, वार्ड पार्षद, वार्ड नंबर-13, नवादा।