
ऐतिहासिक सीतामढ़ी मेला कल, किया जाएगा भव्य उद्घाटन
नवादा/मेसकौर, हिसं/निसं।आस्था, संस्कृति और किसानों की समृद्धि का प्रतीक नवादा का सुप्रसिद्ध सीतामढ़ी मेला इस वर्ष और भी भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है।
नवादा/मेसकौर, हिसं/निसं। आस्था, संस्कृति और किसानों की समृद्धि का प्रतीक नवादा का सुप्रसिद्ध सीतामढ़ी मेला इस वर्ष और भी भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है। मेसकौर प्रखंड स्थित माता सीता की निर्वासन स्थली और लव-कुश की जन्मभूमि माने जाने वाले इस ऐतिहासिक स्थल पर, मार्गशीर्ष यानी अगहन पूर्णिमा के पावन अवसर पर 04 दिसम्बर को मेले का विधिवत उद्घाटन होगा। मेले को लेकर सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में अभी से ही उत्सव का माहौल बन गया है। दूर-दराज में रहने वाले परिजन और रिश्तेदार मेला देखने के लिए आसपास के घरों में जुटने लगे हैं, जिससे ग्रामीण अंचल में रौनक कई गुना बढ़ गई है।
यह जन-सैलाब ही इस मेले की लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। इस बार मेले के आयोजन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। जिला प्रशासन की देखरेख में हुई बंदोबस्ती में मेले का ठेका 17.21 लाख रुपये में हुआ है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। राजस्व उगाही में किसी तरह की परेशानी न हो और लोगों को अधिक समय तक मेले का लुत्फ उठाने का मौका मिले, इसके लिए इस बार मेला की अवधि तीन दिनों से बढ़ाकर सात दिनों की गई है। इस निर्णय से स्थानीय व्यापारियों और आमजनों दोनों में हर्ष का माहौल है। जिला प्रशासन भी सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम पर लगातार नजर रख रहा है। किसानों की समृद्धि और आस्था का संगम सीतामढ़ी मेला सिर्फ मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि सदियों पुरानी ग्रामीण संस्कृति और किसानों की समृद्धि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उत्सव है। अगहन पूर्णिमा तक जब धान की फसल घर आ जाती है, तब किसान अपनी खुशियां मनाने के लिए इस मेले में उमड़ते हैं। जानकार बताते हैं कि यह मेला फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो नवादा जिले की कृषि-आधारित आजीविका को दर्शाता है। मेले में काष्ठ कला, पारंपरिक खेल-खिलौने, मीना बाजार और आधुनिक झूले जैसे आसमानी झूला और ब्रेक डांस आकर्षण का केंद्र होंगे। काठ बाजार का है विशेष महत्व सीतामढ़ी मेले की एक अनूठी विशेषता यहां का विशाल काठ बाजार है। लकड़ी के आकर्षक और टिकाऊ सामान खरीदने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। पारम्परिक खाट, पीढ़ा, पलंग, दरवाजे के चौखट और कृषि उपकरण जैसे सामानों की खरीदारी के लिए अनेक लोग पूरे साल भर इस मेले का इंतजार करते हैं। यह काठ बाजार न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की कला का भी प्रदर्शन करता है। मेले के दौरान, माता सीता की गुफा में स्थित प्रतिमा के दर्शन और पूजा के लिए भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग मन्नतें मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर माता का आभार जताते हैं। सीतामढ़ी मेला इस बार सात दिन तक चलने से आस्था, काष्ठ कला और मनोरंजन का यह संगम अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित करेगा, जिससे नवादा जिले का यह ऐतिहासिक आयोजन एक बार फिर अपनी भव्यता की छाप छोड़ेगा। मनोरंजन और जातीय चौपाल मेला क्षेत्र में पारंपरिक मनोरंजन के साधन भी मौजूद रहेंगे। स्थानीय मनोरंजन के लिए अस्थायी थियेटर का सेटअप, जो लंबे समय से मेले का हिस्सा रहे हैं, उपलब्ध होगा। जातीय चौपाल यह मेला सामाजिक समरसता का केंद्र भी है। विभिन्न जातियों की अलग-अलग धर्मशालाएं हैं, जहां सामाजिक बैठकें और जातीय चौपाल भी लगती है। महोत्सव के रूप में यह परंपरा और मजबूत हो सकती है।

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