
नवादा में मंगरबीघा पुल के पास रास्ता बंद, आवाजाही पर पड़ा बुरा असर
नवादा शहर के मंगरबीघा पुल के पास आवागमन ठप हो गया है, जिससे एक हजार घरों की आबादी चार दिनों से कैद है। मिट्टी धंसने और जलजमाव के कारण लोग मजबूरन लंबा रास्ता अपनाने को विवश हैं। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, और स्थानीय प्रशासन से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा शहर के मंगरबीघा पुल के पास आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाने से आसपास के वार्डों में रहने वाले करीब एक हजार घरों की आबादी चार दिनों से जैसे कैद होकर रह गई है। पुल के एप्रोच रोड पर मिट्टी धंसने और जलजमाव के कारण यह मार्ग पूरी तरह से बंद हो कर रह गया है। अब लोग मजबूरन दूसरी ओर से लम्बा चक्कर काटकर गुजरने को विवश हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के पास एप्रोच रोड में इतनी दलदली गंदगी और कीचड़ जमा हैं कि पैदल चलना तो दूर, छोटे वाहन तक फंस जा रहे हैं।
फिसलन जानलेवा बनी हुई है। कई लोगों ने बताया कि अब बच्चों का स्कूल जाना लगभग असंभव हो गया है। छात्र-छात्राओं को कीचड़ और दलदल पार कर निकलना पड़ रहा है, जिससे कई बार वे गिर भी जाते हैं। इस रास्ते से रोज गुजरने वाले लोगों में गहरी नाराजगी है। लोगों ने बताया कि समस्या की जानकारी स्थानीय प्रशासन और ठेकेदार दोनों को दी गई, मगर चार दिनों से लगातार संपर्क करने की कोशिश बेकार रही है। शहर ऐसी समस्याओं से होता रहता है दो-चार सिर्फ मंगरबीघा ही नहीं वरन शहर भर में अनेक स्थानों पर कीचड़ और गंदगी से हालात बेहद बुरे हो कर रह गए हैं। अभी विधानसभा चुनावों का दौर है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि यह बेहट बुरे हाल तक पहुंच चुकी समस्या कभी मुद्दा तक नहीं बन पाता। ऐसे में हालात बदतर होते जा रहे हैं। शहर के पॉश इलाके वीआईपी कॉलोनी, नवीन नगर, पटेल नगर आदि समेत शहर के बीचोबीच थाना रोड समेत पुरानी बाजार, कलाली रोड, स्टेशन रोड, सोनरपट्टी रोड आदि ऐसे इलाके हैं, जहां मामूली बारिश के बाद भी स्थिति इतनी गंभीर हो कर रह जाती है कि लोग बिलबिला कर रह जाते हैं। पार नवादा में सद्भावनरा चौक के पीछे स्थित आम्बेडकर नगर, बायपास के समीप स्थित डोभरापर आदि इलाके तो जैसे टापू बन कर रह जाते हैं। ऐन बारिश के दिनों में तो इधर से आना-जाना दुश्वार हो जाता है। समाधान शून्य ही है। किसी को भी इसकी चिंता नहीं है। इधर के रहवासी बस अपने भाग्य को कोसने को बाध्य हैं। न जाने कब बहुरेंगे नवादा शहर के दिन नवादा। जो बुरे हालात नवादा शहर झेल रहा है, उससे निजात की कोई गुंजाइश फिलहाल तो नहीं दिखती। पूरे नवादा शहर में कीचड़ और जलजमाव की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है, लेकिन इसके समाधान को लेकर कोई ठोस रणनीति तक नहीं बन पा रही। हर साल बरसात के समय यही हालात बनते हैं और मरम्मत का काम केवल कागजों पर ही सीमित रह जाता है। सबसे निराशाजनक बात यह है कि मौजूदा विधानसभा चुनाव प्रचार में इन समस्याओं का कहीं भी उल्लेख तक नहीं किया जा रहा। यानी क्षेत्र का नुमाइन्दा बनने का सपना सहेजने वाले इसे अपनी प्राथमिक कार्यसूची में शामिल तक नहीं रखते। विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार सड़क, नाली और सफाई जैसे मुद्दों को लेकर जनता से वादे तो कर रहे हैं, पर मौजूदा संकट की चर्चा तक नहीं कर रहे। लोगों का कहना है कि जब शहर के अंदर आम जनजीवन ठप है, तब चुनावी माहौल के दरम्यान भी यह मुद्दा नहीं उठाया जाना बेहद निराशाजनक है। शहर के अनेक लोगों ने ऐसी स्थायी हो कर रह गयी समस्या पर कहा कि जलजमाव, कीचड़ और ऐसा ही मुद्दा चुनावी प्राथमिकता में लाना आवश्यक है। उनका कहना है कि जब तक इस दिशा में ठोस योजना और जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, हर साल हजारों परिवारों को इसी तरह की मुसीबत झेलनी पड़ेगी।

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