नौतपा में धरती तपने के इंतजार में किसान, पुरवा हवा चलने से उमस बरकरार

हिन्दुस्तान, नवादा
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जेठ के महीने में पड़ने वाला नौतपा भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के लिए जाना जाता है। इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव ने किसानों को दुविधा में डाल दिया है। किसानों को डर है कि सही तपन न मिलने पर फसलों के प्रबंधन में दिक्कत आ सकती है। नवादा जिले में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

नौतपा में धरती तपने के इंतजार में किसान, पुरवा हवा चलने से उमस बरकरार

जेठ के महीने में पड़ने वाला नौतपा अमूमन भीषण गर्मी, चटक धूप और लू के थपेड़ों के लिए जाना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के नौ दिनों में धरती जितनी ज्यादा तपती है, मानसून उतना ही बेहतर बरसता है। अच्छी फसल की उम्मीद में जिले के किसान इस दौरान सूरज के रौद्र रूप का इंतजार कर रहे हैं ताकि मिट्टी को सही ऊष्मा मिल सके, लेकिन इन दिनों प्रकृति का मिजाज कुछ अलग ही है।

किसानों की दुविधा

सोमवार से नौतपा के आरम्भ के बाद से मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है, जिसने किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि मौसम का रूख क्या रहेगा, क्योंकि आगामी खरीफ की फसल पूरी तरह से इस पर ही निर्भर करेगी। बुधवार को जिले में 38 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 27 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहने से किसानों की दुविधा बनी रही। बुधवार की सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही का दौर शुरू हो गया था। सूरज और बादलों के बीच लुका-छिपी का खेल दिन भर चलता रहा। मौसम के इस बदले मिजाज के पीछे पुरवा हवा का चलना माना जा रहा है। पुरवा हवाओं के कारण वातावरण में नमी की मात्रा काफी बढ़ी रही, जिससे तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी न होने के बावजूद उमस चरम पर रही। ​इस चिपचिपी गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी को दोगुना रखा। ​मौसम के इस अनोखे रंग ने सबसे ज्यादा देश के अन्नदाता यानी किसानों को चिंता में डाल दिया है। देर-सवेर बादलों को चीरकर निकलने वाली तीखी धूप और फिर अचानक छा जाने वाले बादलों के कारण किसान अपनी आगे की रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं।

खेतों की तैयारी

उलझ कर रह गया है किसानों का गणित परंपरागत रूप से नौतपा में खेतों की गहरी जुताई की जाती है ताकि तेज धूप से मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और खरपतवार के बीज नष्ट हो जाएं। इसे मिट्टी का शोधन कहा जाता है। लेकिन इस बार धूप-छांव के खेल और उमस भरे माहौल के कारण किसान दुविधा में हैं कि खरीफ फसलों धान, मक्का आदि के लिए खेतों को तैयार करना शुरू करें या अभी और इंतजार करें। किसानों को डर है कि अगर समय पर सही तपन नहीं मिली और बिना सही चक्र के प्री-मानसून की बारिश हो गई, तो फसलों के प्रबंधन में भारी दिक्कत आ सकती है।

येलो अलर्ट

-------------------- अगले 48 घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी ​नवादा। नवादा जिले में बुधवार को मौसम बदला-बदला रहा। बादलों के छाए रहने से आंशिक राहत के बाद जिले के तापमान में भी हल्की गिरावट आई। मौसम विशेषज्ञ रौशन कुमार ने सैटेलाइट चित्रों और वर्तमान मौसमी प्रणालियों के आधार पर बताया कि नवादा में आने वाले अगले 2-3 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2°से 4°डिग्री सेल्सियस तक की और कमी आने की संभावना है। वहीं, अगले 5 दिनों तक न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। जिले में अगले 48 घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस अवधि में नवादा के विभिन्न इलाकों में तेज हवाएं चलने, मेघ गर्जन होने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) चमकने की प्रबल आशंका बनी हुई है। (नवादा से राजेश मंझवेकर)

सामान्य प्रश्न

नौतपा के दौरान किसानों की दुविधा क्या है?
किसानों को डर है कि अगर समय पर सही तपन नहीं मिली और बिना सही चक्र के प्री-मानसून की बारिश हो गई, तो फसलों के प्रबंधन में भारी दिक्कत आ सकती है।
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